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गुरु पूर्णिमा पर परमहंस आश्रम जयतारा तालाब लौधना में आयोजित हुआ विशाल कार्यक्रम

हजारों भक्तों ने गुरु पूर्णिमा पर ग्रहण किया भंडारे का प्रसाद
कौशाम्बी । मंझनपुर तहसील  क्षेत्र के लौधना गांव के समीप स्थित परमहंस आश्रम जयतारा लौधना में गुरू पूर्णिमा के अवसर पर जहां भक्तों का बड़ा जमावड़ा होता है वहीं लोग गुरू का आर्शीवाद लेने के बाद संचालित भंडारे का प्रसाद भी चखते हैं। यहां पर बताना जरूरी होगा कि वैसे तो जिले के तमाम स्थानों पर गुरू पूर्णिमा भब्यता के साथ मनाई गई। लेकिन सदर तहसील के जयतारा लौधना गांव में स्थित आश्रम में गुरू पूर्णिमा का कार्यक्रम देखते बनता है। आसपास के लोगों की बातों पर यकीन करें तो कहा जा रहा है कि आश्रम में दान करने वालों की भी कमी नहीं होती है। भंडारे का सफल बनाए जाने के लिए लोग अपने हैसियत के मुताबिक खाद्यान्न सामाग्री भी उपलब्ध कराते हैं। इतना ही नहीं यहां मौजूद गुरूमहराज का भक्त पहुंचकर आर्शीवाद लेता है और वहां की भभूति को लेकर अपने घर जाता है। मान्यता के अनुसार उस भभूति को आर्शीवाद के रूप में ग्रहण करता है। यहां पर ऐसे भी संतों से भी रिश्ता जुड़ा है जो समाधि ले चुके हैं जिनकी पक्की कब्र भी स्थित है। लोग उनका भी दर्शन करते हैं। हालांकि यहां पर यह भी बताना जरूरी होगा कि आश्रम  की भब्यता ऐसी है कि लोग घूमने के लिए पहुंचते हैं, वहां की हरियाली लोगों को मंत्रमुग्ध करती है। इस तरह से परमहंस आश्रम जयतारा लौधना में गुरू पूर्णिमा के अवसर आयोजित होने वाले भंडारे में हजारों हजार लोग प्रसाद चखते हैं। बक्शीपार गांव निवासी उमेश सिंह ने बताया कि आश्रम में प्रत्येक वर्ष गुरू पूर्णिमा के अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन होता है।  मान्यता के अनुसार कड़ा स्थित महाकालेश्वर धाम मंदिर में भी लोग गुरू का आर्शीवाद लेने पहुंचे।

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हजारों भक्तों ने गुरु पूर्णिमा पर ग्रहण किया भंडारे का प्रसाद
कौशाम्बी । मंझनपुर तहसील  क्षेत्र के लौधना गांव के समीप स्थित परमहंस आश्रम जयतारा लौधना में गुरू पूर्णिमा के अवसर पर जहां भक्तों का बड़ा जमावड़ा होता है वहीं लोग गुरू का आर्शीवाद लेने के बाद संचालित भंडारे का प्रसाद भी चखते हैं। यहां पर बताना जरूरी होगा कि वैसे तो जिले के तमाम स्थानों पर गुरू पूर्णिमा भब्यता के साथ मनाई गई। लेकिन सदर तहसील के जयतारा लौधना गांव में स्थित आश्रम में गुरू पूर्णिमा का कार्यक्रम देखते बनता है। आसपास के लोगों की बातों पर यकीन करें तो कहा जा रहा है कि आश्रम में दान करने वालों की भी कमी नहीं होती है। भंडारे का सफल बनाए जाने के लिए लोग अपने हैसियत के मुताबिक खाद्यान्न सामाग्री भी उपलब्ध कराते हैं। इतना ही नहीं यहां मौजूद गुरूमहराज का भक्त पहुंचकर आर्शीवाद लेता है और वहां की भभूति को लेकर अपने घर जाता है। मान्यता के अनुसार उस भभूति को आर्शीवाद के रूप में ग्रहण करता है। यहां पर ऐसे भी संतों से भी रिश्ता जुड़ा है जो समाधि ले चुके हैं जिनकी पक्की कब्र भी स्थित है। लोग उनका भी दर्शन करते हैं। हालांकि यहां पर यह भी बताना जरूरी होगा कि आश्रम  की भब्यता ऐसी है कि लोग घूमने के लिए पहुंचते हैं, वहां की हरियाली लोगों को मंत्रमुग्ध करती है। इस तरह से परमहंस आश्रम जयतारा लौधना में गुरू पूर्णिमा के अवसर आयोजित होने वाले भंडारे में हजारों हजार लोग प्रसाद चखते हैं। बक्शीपार गांव निवासी उमेश सिंह ने बताया कि आश्रम में प्रत्येक वर्ष गुरू पूर्णिमा के अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन होता है।  मान्यता के अनुसार कड़ा स्थित महाकालेश्वर धाम मंदिर में भी लोग गुरू का आर्शीवाद लेने पहुंचे।

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