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चार महीनों से नहीं मिला राजकीय माध्यमिक शिक्षकों को वेतन, सौंपा ज्ञापन

प्रतापगढ़। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत संचालित राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को चार माह से वेतन नहीं मिल पा रहा है। अपनी स्थिति का हवाला देते हुए संघ के प्रान्तीय उपाध्यक्ष सालिकराम प्रजापति के नेतृत्व में शिक्षकों ने सोमवार को सीएम को संबोधित ज्ञापन एडीआई ओएस जटा शंकर यादव को सौंपा। ज्ञापन में शिक्षकों ने लिखा है कि राजकीय इण्टर कालेजों की तरह उन्हें भी नियमित वेतन दिया जाए। ऐसे विद्यालयों मंे नियुक्त शिक्षकों को नियमित वेतन न मिलने से उनके परिवारों के समक्ष आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। एडीआईओएस जटा शंकर यादव ने बताया कि राजकीय इण्टर कालेजों के शिक्षक व राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा आभियान के तहत नियुक्त शिक्षक दोनों एक ही हैं। अन्तर है कि रमसा द्व़ारा संचालित विद्यालयों के लिए बजट केन्द्र और राज्य सरकार मिलकर देती है। बजट मिलने में देरी की वजह से ऐसे विद्यालयों के शिक्षकों को वेतन समय से नहीं मिल पाता है। खास बात यह है कि रमसा द्वारा संचालित विद्यालयों के शिक्षक जब वेतन के लिए कई महीने इन्तिजार करेंगे तो विद्यालयों में पढ़ाई की क्या दशा होगी सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। यही कारण है कि इन विद्यालयों में राजकीय शिक्षक जाना नहीं चाहता है पर ट्रांसफर होने पर मजबूरी में उसे नौकरी करनी होती है। जिले में राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत हाईस्कूल तक संचालित विद्यालयों की संख्या दो दर्जन से अधिक हैं। ऐसे विद्यालयों के शिक्षक जब राजकीय इण्टर कालेजों के शिक्षकों से अपनी तुलना करते हैं तो उनमें हीन भावना का जन्म होने लगता है जबकि दोनों ही सरकारी शिक्षक हैं।


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प्रतापगढ़। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत संचालित राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को चार माह से वेतन नहीं मिल पा रहा है। अपनी स्थिति का हवाला देते हुए संघ के प्रान्तीय उपाध्यक्ष सालिकराम प्रजापति के नेतृत्व में शिक्षकों ने सोमवार को सीएम को संबोधित ज्ञापन एडीआई ओएस जटा शंकर यादव को सौंपा। ज्ञापन में शिक्षकों ने लिखा है कि राजकीय इण्टर कालेजों की तरह उन्हें भी नियमित वेतन दिया जाए। ऐसे विद्यालयों मंे नियुक्त शिक्षकों को नियमित वेतन न मिलने से उनके परिवारों के समक्ष आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। एडीआईओएस जटा शंकर यादव ने बताया कि राजकीय इण्टर कालेजों के शिक्षक व राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा आभियान के तहत नियुक्त शिक्षक दोनों एक ही हैं। अन्तर है कि रमसा द्व़ारा संचालित विद्यालयों के लिए बजट केन्द्र और राज्य सरकार मिलकर देती है। बजट मिलने में देरी की वजह से ऐसे विद्यालयों के शिक्षकों को वेतन समय से नहीं मिल पाता है। खास बात यह है कि रमसा द्वारा संचालित विद्यालयों के शिक्षक जब वेतन के लिए कई महीने इन्तिजार करेंगे तो विद्यालयों में पढ़ाई की क्या दशा होगी सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। यही कारण है कि इन विद्यालयों में राजकीय शिक्षक जाना नहीं चाहता है पर ट्रांसफर होने पर मजबूरी में उसे नौकरी करनी होती है। जिले में राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत हाईस्कूल तक संचालित विद्यालयों की संख्या दो दर्जन से अधिक हैं। ऐसे विद्यालयों के शिक्षक जब राजकीय इण्टर कालेजों के शिक्षकों से अपनी तुलना करते हैं तो उनमें हीन भावना का जन्म होने लगता है जबकि दोनों ही सरकारी शिक्षक हैं।


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