V
E
उत्तर प्रदेश के जिले
भारत के राज्य
🔥 ट्रेंडिंग

तीन दिवासीय मेले का हुआ समापन

करारी,कौशाम्बी। मंझनपुर तहसील इलाके के अगियौना गांव में शीतला अष्टमी के मौके पर मां शीतला के मंदिर प्रांगण में लगने वाले ऐतिहासिक तीन दिवसीय मेला  वृहस्पतिवार को सम्पन्न हुआ।  लोगों ने माता शीतला की विधि विधान से पूजा अर्चना की एवं मन्नत मांगी। इसके साथ ही लोगों ने मेले में लगी दुकानों से घरेलू आदि सामानों की खूब खरीदारी की। महिलाओं और बच्चों ने झूले, सर्कस आदि का लुफ्त उठाया। मेले में सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस भी मुस्तैद दिखाई दी। करारी के अगियौना गांव में शीतला अष्टमी पर लगने वाले ऐतिहासिक तीन दिवसीय मेले का पौराणिक महत्व भी बताया जाता है। माता शीतला के दरबार में लगने वाले इस मेले में क्षेत्र के लोगों की काफी भीड़ भी उमड़ती है। मां शीतला मंदिर के पुजारी पंडित अन्नू महाराज ने बताया कि शीतला अष्टमी पर लगने वाले का दिन देवी शीतला को समर्पित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, शीतला माता चेचक, खसरा आदि की देवी के रूप में पूजी जाती हैं। इन्हें शक्ति के दो स्वरुप, देवी दुर्गा और देवी पार्वती के अवतार के रूप में जाना जाता है। मेले में आने वाले लोग मां शीतला का पूजन का करते हैं, ताकि उनके बच्चे और परिवार वाले इस तरह की बीमारियों से बचे रह सके। इसके अलावा लोग मां शीतला मंदिर के जलहरी से भी जल लेकर जाते हैं। उन्होंने बताया कि मेला करीब तीन सौ साल से लगता है।

"लोकमित्र" देश का बड़ा विश्वसनीय हिन्दी दैनिक एवं डिजिटल न्यूज़ चैनल है जो कि आपको राजनीति, मनोरंजन, देश-विदेश करंट अफेयर्स, खेल और देश की सभी बड़ी खबरों पर अपनी नजर रखता है और अपने पाठकों को जनता से जुड़े मुद्दों पर जागरूक बनाए रखता है।
करारी,कौशाम्बी। मंझनपुर तहसील इलाके के अगियौना गांव में शीतला अष्टमी के मौके पर मां शीतला के मंदिर प्रांगण में लगने वाले ऐतिहासिक तीन दिवसीय मेला  वृहस्पतिवार को सम्पन्न हुआ।  लोगों ने माता शीतला की विधि विधान से पूजा अर्चना की एवं मन्नत मांगी। इसके साथ ही लोगों ने मेले में लगी दुकानों से घरेलू आदि सामानों की खूब खरीदारी की। महिलाओं और बच्चों ने झूले, सर्कस आदि का लुफ्त उठाया। मेले में सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस भी मुस्तैद दिखाई दी। करारी के अगियौना गांव में शीतला अष्टमी पर लगने वाले ऐतिहासिक तीन दिवसीय मेले का पौराणिक महत्व भी बताया जाता है। माता शीतला के दरबार में लगने वाले इस मेले में क्षेत्र के लोगों की काफी भीड़ भी उमड़ती है। मां शीतला मंदिर के पुजारी पंडित अन्नू महाराज ने बताया कि शीतला अष्टमी पर लगने वाले का दिन देवी शीतला को समर्पित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, शीतला माता चेचक, खसरा आदि की देवी के रूप में पूजी जाती हैं। इन्हें शक्ति के दो स्वरुप, देवी दुर्गा और देवी पार्वती के अवतार के रूप में जाना जाता है। मेले में आने वाले लोग मां शीतला का पूजन का करते हैं, ताकि उनके बच्चे और परिवार वाले इस तरह की बीमारियों से बचे रह सके। इसके अलावा लोग मां शीतला मंदिर के जलहरी से भी जल लेकर जाते हैं। उन्होंने बताया कि मेला करीब तीन सौ साल से लगता है।

Leave a Comment