उगते सूर्य को दिया गया अर्ध्य ,किया अभिनन्दन
प्रतापगढ़ । संस्कार भारती प्रतापगढ़ द्वारा मां बेल्हा देवी मंदिर प्रांगण में उगते सूर्य भगवान को अर्घ्य देकर अभिनंदन किया गया इकाई के अध्यक्ष शिशिर खरें,डा0 पीयूषकांत शर्मा,सत्येन्द्र मृदुल,रमेश त्रिपाठी प्रभात जी,प्रतोषजी सुनील प्रभाकर ,सुरेश संभव आदि नें भगवान भास्कर को अर्घ्य देकर नववर्ष का स्वागत किया। सायं ६ वजे विभाग प्रमुख सत्येन्द्र मिश्र मृदुल के आवास पर सरस काव्य संध्या का आयोजन व्यंगकार डा राजेंद्र राज व युवा गीतकार सुनील प्रभाकर के कुशल संचालन में सम्पन्न हुआ।वरिष्ठ गीतकार डा श्याम शंकर शुक्ल श्यामजी मुख्य अतिथि व यशभारती सम्मान से पुरस्कृत डा शिवानी मातनहेलिया विशिष्ठ अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे , जिनके द्वारा मां भारती व डा हेडगेवार,एवं पूज्य गुरूजी के चित्र पर माल्यार्पण दीप प्रज्ज्वलन कियागया।कविवर व्योमजीद्वारा मां भारती की वंदना व मृदुलजी की अगुवाई में सामूहिक ध्येय गीत गाया गया।आजकेदिन की महत्ता व संस्कारमय राष्ट्रकेलिए चिंतनशील होने पर रघुवीरजी विभाग प्रमुख कुटुंब प्रवोधनसमिति नें बल दिया।इस अवसर पर राजेश कुमार मिश्र,डा पीयूषकांत शर्मा,अनिल प्रताप त्रिपाठी नेंभीअपने अवसरोचित उद्गार व्यक्त किये।काव्यपाठ के क्रम में वियोगीजी नें-मैं नील सिंधु मे नील कमल व भारती भर दो धरा पर ज्ञान की अभिव्यंजना,पढ़कर लोगोंको मनमुग्ध किया।कविवर सुरेश संभव की पंक्तियां-कहां करूं जयघोष शंख ध्वनि कहां ध्वजा फहराऊं।सराही गयीं।सचिव अनूप अनुपमकी रचना-बना पहेली जीवन सारा कुछ भी समझ न आए,लोगों को खूब पसंद आयीं।डा श्यामजी वें अपनें खंडकाव्य सीय स्वयंवरसे कुछ सुंदर छंद सुनाकर श्रोताओं को आनंदित किया।सत्येन्द्र मृदुल ने-नववर्ष हो मंगल सुखद नित पल्लवित हों सब यहां।पढ़कर नववर्ष की बधाई दी।डा राजेंन्द्रराज नेंभगवान राम की महिमा का गुणगान किया।इनके अतिरिक्त डा शिवानी,व्योम जी,अभिनव व अभिज्ञान आदि द्वारा अवसरोचितकाव्यपाठ कियागया।आयोजन में रमा शंकर शुक्ल कुसुम साक्षी,आदिकीउपस्थिति उल्लेखनीय रही।अंतमें अध्यक्ष शिशिर करें व मृदुल जी द्वारा सभी अतिथियों व आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।



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