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अधिवक्ता की हत्या में आरोपित पत्नी की जमानत अर्जी निरस्त

अयोध्या। नगर कोतवाली के शिव नगर कालोनी में अधिवक्ता आलोक कुमार द्विवेदी की नृशंस हत्या करने के मामले में जेल में  निरुद्ध आरोपित पत्नी अन्नपूर्णा का जमानत प्रार्थना पत्र सुनवाई के बाद खारिज हो गई है। यह आदेश जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीर नायक सिंह ने सुनवाई के दौरान केस गंभीर प्रकृति होने दिया है। यह घटना अयोध्या जिले के नगर कोतवाली थानान्तर्गत शिवनगर कालोनी का वर्ष 2008 का है। वादी पक्ष से अधिवक्ता अमित कुमार शुक्ला ने बहस के दौरान आरोपित की जमानत प्रार्थना पत्र का घोर विरोध करते हुये निरस्त करने की पैरवी किया। अभियोजन पक्ष के अनुसार कचेहरी मुख्यालय पर वकालत के पेशे से जुड़े अधिवक्ता आलोक कुमार द्विवेदी पुत्र शिवनन्दन थाना इनायतनगर के गांव दसौली का रहने वाला था। किसी बात को लेकर उसकी पत्नी अन्नपूर्णा से विवाद हुआ था। दोनों के बीच हुई तकरार के पश्चात अधिवक्ता आलोक कुमार की हत्या कर लाश छत के कुण्डे से साड़ी से बांधकर लटका दिया गया था। 20 अक्टूबर 2008 को मृतक अधिवक्ता के पिता शिवनन्दन को फोन से सूचना मिली की तुम्हारे पुत्र आलोक की हत्या कर दी गयी है। उसके वहां पहुचने पर पुलिस को भी सूचना दी गयी। पुलिस ने ताला तोड़कर लाश को कब्जे में किया। वादी का आरोप है कि उसके पुत्र के शरीर में चाकू के कई घाव थे। पुलिस की ओर से मुकदमा दर्ज न होने से मृतक के पिता ने अदालत में अर्जी देकर न्याय की गुहार किया था। न्यायालय के आदेश पर यह मुकदमा नगर कोतवाली में दर्ज हुआ। हालांकि पुलिस मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दिया था। जिस पर अदालत ने वादी की ओर से प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र आने पर पुर्नविवेचना का आदेश दिया था। इसी बीच मामले के विवेचक ने पुनः मुकदमें में  फाइनल लगाकर रिपोर्ट सम्बन्धित अदालत में प्रस्तुत किया गया। इसमें फिर फाइनल रिपोर्ट का विरोध करते हुये वादी के अधिवक्ता ने पुनः प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र अदालत में प्रस्तुत किया था। अदालत में विवेचक की फाइनल रिपोर्ट को संदेस्हास्पद होने पर 8 दिसम्बर 2014 को प्रकरण को परिवाद में दर्ज कर लिया। तत्पश्चात् वादी एवं गवाहों के बयानों पर सीजेएम ने मृतक अधिवक्ता की पत्नी अन्नपूर्णा, भानू प्रकाश, आनन्द प्रकाश व उसके जीजा प्रमोद कुमार पाण्डेय तथा स्वेता श्रीवास्तव को अपराध की धारा 302 भादवि के विचारणार्थ जरिए सम्मन 3 दिसम्बर 2020 को तलब करने का आदेश पारित किया है। मामले में चार आरोपी अभी जमानत नहीं कराया है।

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अयोध्या। नगर कोतवाली के शिव नगर कालोनी में अधिवक्ता आलोक कुमार द्विवेदी की नृशंस हत्या करने के मामले में जेल में  निरुद्ध आरोपित पत्नी अन्नपूर्णा का जमानत प्रार्थना पत्र सुनवाई के बाद खारिज हो गई है। यह आदेश जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीर नायक सिंह ने सुनवाई के दौरान केस गंभीर प्रकृति होने दिया है। यह घटना अयोध्या जिले के नगर कोतवाली थानान्तर्गत शिवनगर कालोनी का वर्ष 2008 का है। वादी पक्ष से अधिवक्ता अमित कुमार शुक्ला ने बहस के दौरान आरोपित की जमानत प्रार्थना पत्र का घोर विरोध करते हुये निरस्त करने की पैरवी किया। अभियोजन पक्ष के अनुसार कचेहरी मुख्यालय पर वकालत के पेशे से जुड़े अधिवक्ता आलोक कुमार द्विवेदी पुत्र शिवनन्दन थाना इनायतनगर के गांव दसौली का रहने वाला था। किसी बात को लेकर उसकी पत्नी अन्नपूर्णा से विवाद हुआ था। दोनों के बीच हुई तकरार के पश्चात अधिवक्ता आलोक कुमार की हत्या कर लाश छत के कुण्डे से साड़ी से बांधकर लटका दिया गया था। 20 अक्टूबर 2008 को मृतक अधिवक्ता के पिता शिवनन्दन को फोन से सूचना मिली की तुम्हारे पुत्र आलोक की हत्या कर दी गयी है। उसके वहां पहुचने पर पुलिस को भी सूचना दी गयी। पुलिस ने ताला तोड़कर लाश को कब्जे में किया। वादी का आरोप है कि उसके पुत्र के शरीर में चाकू के कई घाव थे। पुलिस की ओर से मुकदमा दर्ज न होने से मृतक के पिता ने अदालत में अर्जी देकर न्याय की गुहार किया था। न्यायालय के आदेश पर यह मुकदमा नगर कोतवाली में दर्ज हुआ। हालांकि पुलिस मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दिया था। जिस पर अदालत ने वादी की ओर से प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र आने पर पुर्नविवेचना का आदेश दिया था। इसी बीच मामले के विवेचक ने पुनः मुकदमें में  फाइनल लगाकर रिपोर्ट सम्बन्धित अदालत में प्रस्तुत किया गया। इसमें फिर फाइनल रिपोर्ट का विरोध करते हुये वादी के अधिवक्ता ने पुनः प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र अदालत में प्रस्तुत किया था। अदालत में विवेचक की फाइनल रिपोर्ट को संदेस्हास्पद होने पर 8 दिसम्बर 2014 को प्रकरण को परिवाद में दर्ज कर लिया। तत्पश्चात् वादी एवं गवाहों के बयानों पर सीजेएम ने मृतक अधिवक्ता की पत्नी अन्नपूर्णा, भानू प्रकाश, आनन्द प्रकाश व उसके जीजा प्रमोद कुमार पाण्डेय तथा स्वेता श्रीवास्तव को अपराध की धारा 302 भादवि के विचारणार्थ जरिए सम्मन 3 दिसम्बर 2020 को तलब करने का आदेश पारित किया है। मामले में चार आरोपी अभी जमानत नहीं कराया है।

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