कई दिनो तक संकट से जूझता रहा अमित
सांगीपुर (नि.सं.)। स्थानीय विकास खण्ड के गांव सुबेदार का पुरवा नौगीर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के गांव का रहने वाला अमित पाल यूक्रेन देश में काफी संकट में रहा। जो गुरूवार की रात करीब 11.40 बजे रोमानिया देश से दिल्ली एयरपोर्ट पर सकुशल पहुंच गया। वहां पहुंचने पर उत्तर प्रदेश सरकार का वाहन खड़ा था जो छात्र को सकुशल घर पहुंचाने में मदद कर रहा था। अमित पाल के दिल्ली पहुंचने पर उसके रिश्तेदार रामकृष्ण पाल जो दिल्ली में फाइव स्टार होटल में मैनेजर के पद पर कार्यरत है। वह उसे अपने साथ दिल्ली के सागरपुर में ले गया। रामकृष्ण पाल ने फोन पर जानकारी देते हुए बताया कि अमित अभी सहमा हुआ है। उसे पूरी तरह आराम की जरूरत है। वही किया जा रहा है। वह कई दिनो तक संकट से जूझता रहा था। रामकृष्ण ने बताया कि लगभग 12 दिनो तक अमित समेत दस छात्र बिना नहाए, वही कपड़ा, खाना नाश्ता तथा टायलेट की परेशानी झेलते रहे। उस समय एक एक पल साल भर जैसा लग रहा था। वह लोग बस से बार्डर के 18 किमी. पूर्व बार्डर सील होने क कारण पैदल चलकर रोमानिया पहुंचे। इसके बाद तीन दिनो तक एयरपोर्ट पर रहना पड़ा। तीन दिन बाद भारत आने का नम्बर लगा। वहां से दस घण्टा बाद गुरूवार की रात 11.40 बजे वह दिल्ली पहुंचा। अमित के साथ पढ़ने वाले छह छात्रो ने गु्रप के साथ तिरंगा लेकर निकले थे। उन्हे निकलना मना था। इसलिए तिरंगा के सहारे रोमानिया पहुंचने पर तिरंगा का सम्मान करते हुए अपने साथ ले गए। उन्होने भारत सरकार को धन्यवाद दिया। अमित पाल यूक्रेन देश के टारजो पिल प्रदेश में रहते थे। वह एक वर्ष तक स्कूल के कैम्पस में रहे फिर किराए पर रहने लगे थे।
कई दिनो तक संकट से जूझता रहा अमित
सांगीपुर (नि.सं.)। स्थानीय विकास खण्ड के गांव सुबेदार का पुरवा नौगीर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के गांव का रहने वाला अमित पाल यूक्रेन देश में काफी संकट में रहा। जो गुरूवार की रात करीब 11.40 बजे रोमानिया देश से दिल्ली एयरपोर्ट पर सकुशल पहुंच गया। वहां पहुंचने पर उत्तर प्रदेश सरकार का वाहन खड़ा था जो छात्र को सकुशल घर पहुंचाने में मदद कर रहा था। अमित पाल के दिल्ली पहुंचने पर उसके रिश्तेदार रामकृष्ण पाल जो दिल्ली में फाइव स्टार होटल में मैनेजर के पद पर कार्यरत है। वह उसे अपने साथ दिल्ली के सागरपुर में ले गया। रामकृष्ण पाल ने फोन पर जानकारी देते हुए बताया कि अमित अभी सहमा हुआ है। उसे पूरी तरह आराम की जरूरत है। वही किया जा रहा है। वह कई दिनो तक संकट से जूझता रहा था। रामकृष्ण ने बताया कि लगभग 12 दिनो तक अमित समेत दस छात्र बिना नहाए, वही कपड़ा, खाना नाश्ता तथा टायलेट की परेशानी झेलते रहे। उस समय एक एक पल साल भर जैसा लग रहा था। वह लोग बस से बार्डर के 18 किमी. पूर्व बार्डर सील होने क कारण पैदल चलकर रोमानिया पहुंचे। इसके बाद तीन दिनो तक एयरपोर्ट पर रहना पड़ा। तीन दिन बाद भारत आने का नम्बर लगा। वहां से दस घण्टा बाद गुरूवार की रात 11.40 बजे वह दिल्ली पहुंचा। अमित के साथ पढ़ने वाले छह छात्रो ने गु्रप के साथ तिरंगा लेकर निकले थे। उन्हे निकलना मना था। इसलिए तिरंगा के सहारे रोमानिया पहुंचने पर तिरंगा का सम्मान करते हुए अपने साथ ले गए। उन्होने भारत सरकार को धन्यवाद दिया। अमित पाल यूक्रेन देश के टारजो पिल प्रदेश में रहते थे। वह एक वर्ष तक स्कूल के कैम्पस में रहे फिर किराए पर रहने लगे थे।



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