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भागवत कथा के विश्राम दिवस पर हुआ भंडारे का आयोजन

बछरावां रायबरेली। विकास क्षेत्र के ग्रामसभा  थुलेंडी में वर्षों से आस्था का केंद्र पलालेस्वर धाम में महाशिवरात्रि के अवसर पर तीन दिवसीय भागवत कथा का  आयोजन किया गया। कथा के आकर्षण केंद्र 8 वर्षीय कथा व्यास कृष्ण मोहन कान्हा रहे जिनके मुख से धर्म रूपी गंगा प्रवाहित हुई जिसमें कथा श्रवण करने आए हजारों श्रोताओं ने स्नान कर अपने आप को धन्य किया। 1 मार्च से प्रारंभ होने वाली कथा के एक दिन पूर्व श्रीरामचरितमानस के अखंड पाठ का आयोजन किया गया। अगले दिन शिव बारात तथा शिव लीला का मंचन किया गया। गुरुवार को कथा के विश्राम दिवस पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। कथा व्यास कृष्ण मोहन कान्हा ने कथा का श्रवण करने आए सभी श्रोताओं से कहा कि जिस प्रकार मनुष्य को जब प्यास लगती है तो केवल जल ही उसकी प्यास बुझा सकता है, और जब भूख लगती है तो भोजन ही उसकी भूख मिटा सकता है उसी प्रकार जीवन में कष्ट आने पर ईश्वर का भजन ही कष्टों का निवारण कर सकता है। पृथ्वी पर आए प्रत्येक मनुष्य का यह दायित्व है कि परमपिता परमेश्वर के भजन के लिए समय अवश्य निकालें क्योंकि ईश्वर के भजन से ही आपको सभी कष्टों से मुक्ति मिल सकती है। कथा आयोजक मंडल से सच्चिदानंद शुक्ला, श्रीकांत यादव, राजू पाठक, दिलीप पाठक, दिनेश त्रिवेदी, राम जी त्रिवेदी, वीरेंद्र श्रीवास्तव, शिव शंकर प्रजापति सहित हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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बछरावां रायबरेली। विकास क्षेत्र के ग्रामसभा  थुलेंडी में वर्षों से आस्था का केंद्र पलालेस्वर धाम में महाशिवरात्रि के अवसर पर तीन दिवसीय भागवत कथा का  आयोजन किया गया। कथा के आकर्षण केंद्र 8 वर्षीय कथा व्यास कृष्ण मोहन कान्हा रहे जिनके मुख से धर्म रूपी गंगा प्रवाहित हुई जिसमें कथा श्रवण करने आए हजारों श्रोताओं ने स्नान कर अपने आप को धन्य किया। 1 मार्च से प्रारंभ होने वाली कथा के एक दिन पूर्व श्रीरामचरितमानस के अखंड पाठ का आयोजन किया गया। अगले दिन शिव बारात तथा शिव लीला का मंचन किया गया। गुरुवार को कथा के विश्राम दिवस पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। कथा व्यास कृष्ण मोहन कान्हा ने कथा का श्रवण करने आए सभी श्रोताओं से कहा कि जिस प्रकार मनुष्य को जब प्यास लगती है तो केवल जल ही उसकी प्यास बुझा सकता है, और जब भूख लगती है तो भोजन ही उसकी भूख मिटा सकता है उसी प्रकार जीवन में कष्ट आने पर ईश्वर का भजन ही कष्टों का निवारण कर सकता है। पृथ्वी पर आए प्रत्येक मनुष्य का यह दायित्व है कि परमपिता परमेश्वर के भजन के लिए समय अवश्य निकालें क्योंकि ईश्वर के भजन से ही आपको सभी कष्टों से मुक्ति मिल सकती है। कथा आयोजक मंडल से सच्चिदानंद शुक्ला, श्रीकांत यादव, राजू पाठक, दिलीप पाठक, दिनेश त्रिवेदी, राम जी त्रिवेदी, वीरेंद्र श्रीवास्तव, शिव शंकर प्रजापति सहित हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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