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भाजपा को होगा अयोध्या में सपा की बिगड़ी रणनीति का फायदा

रुदौली व बीकापुर विधानसभा में भाजपा व सपा की सीधी टक्कर अब हुई त्रिकोणीय
अयोध्या जनपद के पांचों विधानसभा से चुनावी मैदान में उतरे भाजपा , सपा, बसपा व  कांग्रेस के प्रत्याशी
अयोध्या । अयोध्या जनपद के रुदौली व बीकापुर सीट पर प्रत्याशियों की भारी उठापटक के बाद अंततः मंगलवार की अपराह्न समाजवादी पार्टी ने अपने उम्मीदवारों को लेकर अपनी आखिरी मोहर लगा तो दी लेकिन पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा प्रत्याशियों के चुनाव को लेकर रुदौली में सपा का वर्चस्व लगभग हिल सा गया । रुदौली से पूर्व घोषित सपा उम्मीदवार पूर्व मंत्री अब्बास अली जैदी “रुश्दी मियां” के टिकट कट जाने से रुश्दी सहित पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी से बगावत कर बहुजन समाज पार्टी का दामन थाम लिया तथा इस बगावत का भरपूर फायदा उठाते हुए बसपा सुप्रीमो सुश्री मायावती ने आनन फानन में रुश्दी को रुदौली से अपना प्रत्याशी घोषित कर उनका नामांकन करा दिया । वैसे रुश्दी मियां के नामांकन से पूर्व रुदौली विधानसभा से पूर्व घोषित उम्मीदवार चौधरी एहसान अली उर्फ शहरयार ने बसपा से अपना पर्चा दाखिल कर दिया था अतः रुश्दी के पर्चा दाख़िले के बाद पार्टी के निर्देशानुसार उनका पर्चा खारिज कर दिया गया । यही नहीं जनपद के बीकापुर विधानसभा सीट पर सपा से दो उम्मीदवार बलराम मौर्या व हाजी फिरोज खान उर्फ गब्बर ने पर्चा दाखिल किया जिसमें सपा मुखिया द्वारा बलराम मौर्या का पर्चा खारिज कर हाजी फिरोज खान उर्फ गब्बर को अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया । वहीं रुदौली विधानसभा से एकमात्र आनंसेन यादव ने सपा प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन कर क्षेत्र में चुनाव प्रचार व जनसंपर्क चालू कर दिया । फिलहाल सपा मुखिया द्वारा पूर्व मंत्री अब्बास अली जैदी का टिकट काटे जाने से रुदौली की स्थानीय कार्यकारिणी भंग हो गई है तथा तमाम सपा नेता साइकिल से उतरकर हाथी पर सवार हो गए हैं अब ऐसे में सपा उम्मीदवार आनंदसेन के सामने वरिष्ठ व अनुभवी कार्यकर्ताओं को लेकर संकट खड़ा हो गया है अब वें किसके सहारे चुनाव मैदान में अपना प्रचार प्रसार करेंगे । यही नहीं कमोबेश यही स्थिति बीकापुर विधानसभा की भी है वहां भी वर्षों से समाजवादी पार्टी के लिए पूरी निष्ठा के साथ जी तोड़ मेहनत कर रहे राघवेंद्र सिंह अनूप को भी सपा की उपेक्षा का शिकार होना पड़ा जिससे आहत होकर उन्होंने बीकापुर सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया है। समाजवादी पार्टी का यह विघटन भारतीय जनता पार्टी के लिए कहीं न कहीं वरदान साबित होता प्रतीत हो रहा है , अगर बात रुदौली विधानसभा की करें तो यहाँ यादव व मुसलमान मतदाताओं को एक साथ एक प्लेटफार्म पर होनें की वजह से सपा चुनाव जीत रही थी परंतु रुदौली की राजनीति में रामचंद्र यादव के प्रवेश के बाद यादव मतदाताओं का मत भाजपा में खिसक जाने से  पिछले दस वर्षों से रुदौली विधानसभा पर काबिज सपा को पिछले दो चुनाव से मुँहकी खानी पड़ रही है लेकिन इस बार के चुनाव में कुछ हद तक यादवों की घर वापसी की उम्मीद ने सपाइयों के मनोबल को बढा रखा था लेकिन समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा पार्टी से पूर्व घोषित उम्मीदवार अब्बास अली ज़ैदी “रुश्दी मियां” को हटाकर आनंदसेन यादव को अपना प्रत्याशी घोषित करने से नाराज रुश्दी का बसपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में कूद पड़ने से सपा का यादव प्लस मुस्लिम का समीकरण लगभग फेल होता नज़र आ रहा है । बता दें कि रुश्दी ने बसपा से चुनाव लड़ने का फैसला सिर्फ़ अपनी मर्जी से ही नहीं लिया है बल्कि सपा से टिकट कटने के बाद उन्होंने अपने हजारों समर्थकों की इजाज़त के बाद यह फैसला लिया है यही समर्थक अब उनके चुनावी वैतरणी के खेवनहार हैं । सपा के बेस वोट माने जाने वाले इन मुस्लिम मतदाताओं के सपा की नाव पर सवार होनें से कहीं न कहीं सपा प्रत्याशी आनंदसेन यादव को अब चुनावी वैतरणी पार करने के लिए काफी जद्दोजहद का सामना करना पड़ेगा । वहीं बीकापुर सीट पर सपा से बागी हुए राघवेंद्र सिंह “अनूप” का निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना पर्चा दाख़िल करने के पश्चात यह कहना कि सपा में कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं है उनकी सपा के प्रति भारी असंतोष का द्योतक है जो बीकापुर विधानसभा सीट पर भी सपा को भारी नुकसान पहुंचा सकता है । कुल मिलाकर सपा मुखिया द्वारा अपने क्षेत्रीय नेताओं के साथ बिना सामंजस्य बनाये मनमाने ढंग से टिकट वितरण कहीं न कहीं उन्हें जनपद की पांचों सीटों पर कड़ी शिकस्त का कारण बन सकता है ।  बता दें कि अभी तक जहां अयोध्या की पांचों सीटों पर सपा व भाजपा सीधी टक्कर में थी वहीं अब रुदौली व बीकापुर की सीट पर यह मुकाबला त्रिकोणीय नज़र आ रहा है जिसका सीधा फायदा भाजपा को होता प्रतीत हो रहा है ।

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रुदौली व बीकापुर विधानसभा में भाजपा व सपा की सीधी टक्कर अब हुई त्रिकोणीय
अयोध्या जनपद के पांचों विधानसभा से चुनावी मैदान में उतरे भाजपा , सपा, बसपा व  कांग्रेस के प्रत्याशी
अयोध्या । अयोध्या जनपद के रुदौली व बीकापुर सीट पर प्रत्याशियों की भारी उठापटक के बाद अंततः मंगलवार की अपराह्न समाजवादी पार्टी ने अपने उम्मीदवारों को लेकर अपनी आखिरी मोहर लगा तो दी लेकिन पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा प्रत्याशियों के चुनाव को लेकर रुदौली में सपा का वर्चस्व लगभग हिल सा गया । रुदौली से पूर्व घोषित सपा उम्मीदवार पूर्व मंत्री अब्बास अली जैदी “रुश्दी मियां” के टिकट कट जाने से रुश्दी सहित पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी से बगावत कर बहुजन समाज पार्टी का दामन थाम लिया तथा इस बगावत का भरपूर फायदा उठाते हुए बसपा सुप्रीमो सुश्री मायावती ने आनन फानन में रुश्दी को रुदौली से अपना प्रत्याशी घोषित कर उनका नामांकन करा दिया । वैसे रुश्दी मियां के नामांकन से पूर्व रुदौली विधानसभा से पूर्व घोषित उम्मीदवार चौधरी एहसान अली उर्फ शहरयार ने बसपा से अपना पर्चा दाखिल कर दिया था अतः रुश्दी के पर्चा दाख़िले के बाद पार्टी के निर्देशानुसार उनका पर्चा खारिज कर दिया गया । यही नहीं जनपद के बीकापुर विधानसभा सीट पर सपा से दो उम्मीदवार बलराम मौर्या व हाजी फिरोज खान उर्फ गब्बर ने पर्चा दाखिल किया जिसमें सपा मुखिया द्वारा बलराम मौर्या का पर्चा खारिज कर हाजी फिरोज खान उर्फ गब्बर को अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया । वहीं रुदौली विधानसभा से एकमात्र आनंसेन यादव ने सपा प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन कर क्षेत्र में चुनाव प्रचार व जनसंपर्क चालू कर दिया । फिलहाल सपा मुखिया द्वारा पूर्व मंत्री अब्बास अली जैदी का टिकट काटे जाने से रुदौली की स्थानीय कार्यकारिणी भंग हो गई है तथा तमाम सपा नेता साइकिल से उतरकर हाथी पर सवार हो गए हैं अब ऐसे में सपा उम्मीदवार आनंदसेन के सामने वरिष्ठ व अनुभवी कार्यकर्ताओं को लेकर संकट खड़ा हो गया है अब वें किसके सहारे चुनाव मैदान में अपना प्रचार प्रसार करेंगे । यही नहीं कमोबेश यही स्थिति बीकापुर विधानसभा की भी है वहां भी वर्षों से समाजवादी पार्टी के लिए पूरी निष्ठा के साथ जी तोड़ मेहनत कर रहे राघवेंद्र सिंह अनूप को भी सपा की उपेक्षा का शिकार होना पड़ा जिससे आहत होकर उन्होंने बीकापुर सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया है। समाजवादी पार्टी का यह विघटन भारतीय जनता पार्टी के लिए कहीं न कहीं वरदान साबित होता प्रतीत हो रहा है , अगर बात रुदौली विधानसभा की करें तो यहाँ यादव व मुसलमान मतदाताओं को एक साथ एक प्लेटफार्म पर होनें की वजह से सपा चुनाव जीत रही थी परंतु रुदौली की राजनीति में रामचंद्र यादव के प्रवेश के बाद यादव मतदाताओं का मत भाजपा में खिसक जाने से  पिछले दस वर्षों से रुदौली विधानसभा पर काबिज सपा को पिछले दो चुनाव से मुँहकी खानी पड़ रही है लेकिन इस बार के चुनाव में कुछ हद तक यादवों की घर वापसी की उम्मीद ने सपाइयों के मनोबल को बढा रखा था लेकिन समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा पार्टी से पूर्व घोषित उम्मीदवार अब्बास अली ज़ैदी “रुश्दी मियां” को हटाकर आनंदसेन यादव को अपना प्रत्याशी घोषित करने से नाराज रुश्दी का बसपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में कूद पड़ने से सपा का यादव प्लस मुस्लिम का समीकरण लगभग फेल होता नज़र आ रहा है । बता दें कि रुश्दी ने बसपा से चुनाव लड़ने का फैसला सिर्फ़ अपनी मर्जी से ही नहीं लिया है बल्कि सपा से टिकट कटने के बाद उन्होंने अपने हजारों समर्थकों की इजाज़त के बाद यह फैसला लिया है यही समर्थक अब उनके चुनावी वैतरणी के खेवनहार हैं । सपा के बेस वोट माने जाने वाले इन मुस्लिम मतदाताओं के सपा की नाव पर सवार होनें से कहीं न कहीं सपा प्रत्याशी आनंदसेन यादव को अब चुनावी वैतरणी पार करने के लिए काफी जद्दोजहद का सामना करना पड़ेगा । वहीं बीकापुर सीट पर सपा से बागी हुए राघवेंद्र सिंह “अनूप” का निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना पर्चा दाख़िल करने के पश्चात यह कहना कि सपा में कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं है उनकी सपा के प्रति भारी असंतोष का द्योतक है जो बीकापुर विधानसभा सीट पर भी सपा को भारी नुकसान पहुंचा सकता है । कुल मिलाकर सपा मुखिया द्वारा अपने क्षेत्रीय नेताओं के साथ बिना सामंजस्य बनाये मनमाने ढंग से टिकट वितरण कहीं न कहीं उन्हें जनपद की पांचों सीटों पर कड़ी शिकस्त का कारण बन सकता है ।  बता दें कि अभी तक जहां अयोध्या की पांचों सीटों पर सपा व भाजपा सीधी टक्कर में थी वहीं अब रुदौली व बीकापुर की सीट पर यह मुकाबला त्रिकोणीय नज़र आ रहा है जिसका सीधा फायदा भाजपा को होता प्रतीत हो रहा है ।

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