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रानीगंज की सियासत में आया भूचाल

सपा ने विनोद दुबे को बनाया प्रत्याशी तो शिवाकांत ओझा ने थामा भाजपा का दामन
रानीगंज (प्रतापगढ़) । समाजवादी पार्टी द्वारा रानीगंज विधानसभा से विनोद दुबे को प्रत्याशी बनाये जाने से रानीगंज की राजनीति में उथल पुथल शुरू ही थी कि गुरुवार को पूर्व मंत्री प्रो शिवाकांत ओझा के सपा छोड़कर भाजपा में शामिल होने की खबर आग की तरह फैलने लगी। शिवाकांत ओझा को भाजपा में शामिल होने की खबर मिलते ही भाजपा विधायक धीरज ओझा टिकट कटने के भय से बैठक छोड़कर पार्टी  हाईकमान के पास निकल गए। शिवाकांत ओझा के भाजपा में शामिल होने की खबर सोशल मीडिया में वायरल होने लगी। कयास लगाया जा रहा कि भाजपा शिवाकांत ओझा को रानीगंज से चुनावी मैदान में उतार सकती है। अब सवाल उठता है कि अगर शिवाकांत ओझा को भाजपा टिकट देकर रानीगंज से प्रत्याशी बनाती है तो वर्तमान विधायक धीरज ओझा का क्या होगा। दोनों नेताओं की दिशा अलग होने से क्या एक ही पार्टी में चुनाव प्रचार करेंगे अथवा धीरज ओझा को भाजपा टिकट देती है तो क्या शिवाकांत ओझा धीरज ओझा के समर्थन में प्रचार में उतरेंगे! फिलहाल नेता किसी भी दल से हो कितनी भी बगावत हो फिर भी एक मंच पर बैठकर सारे गिले शिकवे दरकिनार कर सकते है किन्तु कार्यकर्त्ता और समर्थक एक दूसरे से विवाद कर अपनी कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह लगा देते है।

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सपा ने विनोद दुबे को बनाया प्रत्याशी तो शिवाकांत ओझा ने थामा भाजपा का दामन
रानीगंज (प्रतापगढ़) । समाजवादी पार्टी द्वारा रानीगंज विधानसभा से विनोद दुबे को प्रत्याशी बनाये जाने से रानीगंज की राजनीति में उथल पुथल शुरू ही थी कि गुरुवार को पूर्व मंत्री प्रो शिवाकांत ओझा के सपा छोड़कर भाजपा में शामिल होने की खबर आग की तरह फैलने लगी। शिवाकांत ओझा को भाजपा में शामिल होने की खबर मिलते ही भाजपा विधायक धीरज ओझा टिकट कटने के भय से बैठक छोड़कर पार्टी  हाईकमान के पास निकल गए। शिवाकांत ओझा के भाजपा में शामिल होने की खबर सोशल मीडिया में वायरल होने लगी। कयास लगाया जा रहा कि भाजपा शिवाकांत ओझा को रानीगंज से चुनावी मैदान में उतार सकती है। अब सवाल उठता है कि अगर शिवाकांत ओझा को भाजपा टिकट देकर रानीगंज से प्रत्याशी बनाती है तो वर्तमान विधायक धीरज ओझा का क्या होगा। दोनों नेताओं की दिशा अलग होने से क्या एक ही पार्टी में चुनाव प्रचार करेंगे अथवा धीरज ओझा को भाजपा टिकट देती है तो क्या शिवाकांत ओझा धीरज ओझा के समर्थन में प्रचार में उतरेंगे! फिलहाल नेता किसी भी दल से हो कितनी भी बगावत हो फिर भी एक मंच पर बैठकर सारे गिले शिकवे दरकिनार कर सकते है किन्तु कार्यकर्त्ता और समर्थक एक दूसरे से विवाद कर अपनी कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह लगा देते है।

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