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शीत लहर में गो आश्रय के पशुओं की हालत दयनीय

होलागढ़(प्रयागराज)। इलाके में इन दिनों कड़ाके की ठंढ पड़ रही है। ऐसे में लोगों से अधिक गो आश्रय में रह रहे पशुओं की हालत सबसे अधिक दयनीय है। उमरिया बादल में बने गो आश्रय में लगभग 80 मवेशी हैं।यहां पशुओं को शीत से बचाव का कोई खास इंतजाम नहीं किया गया है। टीन शेड के चारो तरफ पालिथिंन तो लगाया गया था मगर इस समय पूरा जीर्ण शीर्ण अर्थात फट गया है। एक कमरे में भूसा तो है मगर पशुओं को खाने को कम ही दिया जा रहा है। पशुओं को शीत से बचने के लिए जूट की बोरी भी नहीं ओढ़ाया गया है।गो सेवक विनोद कुमार और हरि प्रसाद ने बताया कि गो आश्रय का निरीक्षण हेतु सेक्टर प्रभारी,ग्राम पंचायत विकास अधिकारी,एडीओ पंचायत और बीडीओ बहुत ही कम आते हैं।लोगों का मानना है कि अधिकारी समय समय पर देखरेख करते रहें तो व्यवस्था में सुधार होता रहे।हलाकि इसी आश्रय के बगल गंगापार का पहला स्थायी गो आश्रय स्थल बना दिया गया है। तथा बीते दिनों क्षेत्रीय विधायक विक्रमा जीत मौर्य ने 7 जनवरी को उद्घाटन भी किया था मगर आज तक उसे चालू नहीं किया जा सका है।ऐसा लगता है महज उद्घाटन का खानापूर्ती ही किया गया है। उधर कमोवेश यही हाल सांगीपुर,कमालपुर आदि के गो आश्रय का भी है।

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होलागढ़(प्रयागराज)। इलाके में इन दिनों कड़ाके की ठंढ पड़ रही है। ऐसे में लोगों से अधिक गो आश्रय में रह रहे पशुओं की हालत सबसे अधिक दयनीय है। उमरिया बादल में बने गो आश्रय में लगभग 80 मवेशी हैं।यहां पशुओं को शीत से बचाव का कोई खास इंतजाम नहीं किया गया है। टीन शेड के चारो तरफ पालिथिंन तो लगाया गया था मगर इस समय पूरा जीर्ण शीर्ण अर्थात फट गया है। एक कमरे में भूसा तो है मगर पशुओं को खाने को कम ही दिया जा रहा है। पशुओं को शीत से बचने के लिए जूट की बोरी भी नहीं ओढ़ाया गया है।गो सेवक विनोद कुमार और हरि प्रसाद ने बताया कि गो आश्रय का निरीक्षण हेतु सेक्टर प्रभारी,ग्राम पंचायत विकास अधिकारी,एडीओ पंचायत और बीडीओ बहुत ही कम आते हैं।लोगों का मानना है कि अधिकारी समय समय पर देखरेख करते रहें तो व्यवस्था में सुधार होता रहे।हलाकि इसी आश्रय के बगल गंगापार का पहला स्थायी गो आश्रय स्थल बना दिया गया है। तथा बीते दिनों क्षेत्रीय विधायक विक्रमा जीत मौर्य ने 7 जनवरी को उद्घाटन भी किया था मगर आज तक उसे चालू नहीं किया जा सका है।ऐसा लगता है महज उद्घाटन का खानापूर्ती ही किया गया है। उधर कमोवेश यही हाल सांगीपुर,कमालपुर आदि के गो आश्रय का भी है।

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