प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। देवोत्थान एकादशी पर्व पर बाजारो में खरीददारो की भीड़ उमड़ पड़ी। दुकानदारो ने भी जरूरत के सामानो को करीने से सजाकर अपनी दुकानो पर ग्राहको को आकर्षित करने के लिए पूरी व्यवस्था किये थे। परम्परा के अनुसार लोग व्रत के लिए फलाहारी सामानो के साथ गन्ना, शकरकंद, सिंघाड़ा आदि की खरीददारी करते दिखाई दे रहे थे। परम्परा के अनुसार देवोत्थान एकादशी के दिन लोग अन्य नहीं खाते है। ऐसे में लोग फलो के साथ ही फलाहारी सामानो पर ही आश्रित रहते है। शहर में जगह जगह दुकाने सजाई गई है। उन पर ग्राहको की भीड़ भी रही। देवोत्थान एकादशी पर्व पर दरिद्र खदेड़ने की भी परम्परा है। घर के बच्चे हड़ा हड़ैया खेलकर दरिद्र को अपने पास पड़ोस व गांव से भगाने का उपक्रम करते है। हालाकि शहरी क्षेत्र में लाग टायर आदि जलाकर सिफ परम्परा का निर्वहन करते है। जबकि ग्रामीण क्षेत्रो में इस पर्व को पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसे मनाने के लिए व्यवसायियो ने भी गन्ना, सिंघाड़ा, शकरकंद, सुथनी सूरज आदि की दुकाने करीने से सजायी है। वहां पर खरीददारो की भारी भीड़ जुटी रही। प्राचीन मान्यता के अनुसार रात को दरिद्र खदेड़ने के बाद सूप को जलाकर उसकी आग तापी जाए। इससे सेहुआ नामक बीमारी नहीं होती है। इस पर्व पर गन्ने का पूजन किया जाता है। कार्तिक माह में महिलाओ द्वारा मां तुलसी की भी पूजा की जाती है।
प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। देवोत्थान एकादशी पर्व पर बाजारो में खरीददारो की भीड़ उमड़ पड़ी। दुकानदारो ने भी जरूरत के सामानो को करीने से सजाकर अपनी दुकानो पर ग्राहको को आकर्षित करने के लिए पूरी व्यवस्था किये थे। परम्परा के अनुसार लोग व्रत के लिए फलाहारी सामानो के साथ गन्ना, शकरकंद, सिंघाड़ा आदि की खरीददारी करते दिखाई दे रहे थे। परम्परा के अनुसार देवोत्थान एकादशी के दिन लोग अन्य नहीं खाते है। ऐसे में लोग फलो के साथ ही फलाहारी सामानो पर ही आश्रित रहते है। शहर में जगह जगह दुकाने सजाई गई है। उन पर ग्राहको की भीड़ भी रही। देवोत्थान एकादशी पर्व पर दरिद्र खदेड़ने की भी परम्परा है। घर के बच्चे हड़ा हड़ैया खेलकर दरिद्र को अपने पास पड़ोस व गांव से भगाने का उपक्रम करते है। हालाकि शहरी क्षेत्र में लाग टायर आदि जलाकर सिफ परम्परा का निर्वहन करते है। जबकि ग्रामीण क्षेत्रो में इस पर्व को पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसे मनाने के लिए व्यवसायियो ने भी गन्ना, सिंघाड़ा, शकरकंद, सुथनी सूरज आदि की दुकाने करीने से सजायी है। वहां पर खरीददारो की भारी भीड़ जुटी रही। प्राचीन मान्यता के अनुसार रात को दरिद्र खदेड़ने के बाद सूप को जलाकर उसकी आग तापी जाए। इससे सेहुआ नामक बीमारी नहीं होती है। इस पर्व पर गन्ने का पूजन किया जाता है। कार्तिक माह में महिलाओ द्वारा मां तुलसी की भी पूजा की जाती है।



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