प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। धनतेरस के पर्व पर लोगो ने अपने घरो में विधिवत साफ सफाई करके भगवान धनवन्तरि की पूजा अर्चना की। साथ ही उनसे धान का भण्डार भरने की मन्नत मांगी। इस पर्व को लेकर जनपद शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के बाजारो में सुबह से ही दुकानदारो द्वारा अपनी अपनी दुकाने सजा गई थी। महंगाई के कारण लोगो ने अपनी हैसियत के मुताबिक खरीददारी करके त्योहार की परम्परा का निर्वहन किया। बता दे कि धनतेरस का पर्व युगो युगो से हमारे पूर्वज मनाते रहे है। इस दिन भगवान धनवन्तरि की पूजा करने से घर में धन धान्य की बढ़ोत्तरी होन की मान्यता है। यही वजह है कि लोग इस दिन अपने अपने घरो को पहले से ही साफ सुथरा कर लेते है। इस दिन भगवान धनवन्तरि की प्रतिमां को स्थापित करके विधि विधान के साथ भगवान की पूजा करते है। धनतेरस के दिन घर में कुछ नया खरीदकर लाने की परम्परा है। बुद्धि जीवियों का कहना है कि इस दिन घर पर सोने चांदी व बर्तन आदि खरीदने से घर में धन की प्राप्ति होती है। यही वजह है कि धनतेरस के दिन दुकानदारो द्वारा अपनी दुकाने सजा दी जाती है। बर्तन व जेवर की दुकानो पर अधिक खरीददारी होती है। इस दिन बाजाो में लाई, लावा, चिवरा गट्टा आदि की दुकाने में सजी थी। लोगो ने लाई, लावा, गट्टा आदि भी खरीदा। इसके अलावा चीनी के बने खिलौनो मिठाई की भी खरीददारी की गई। लोगो ने महंगाई को दर किनार करके खरीददारी की।
प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। धनतेरस के पर्व पर लोगो ने अपने घरो में विधिवत साफ सफाई करके भगवान धनवन्तरि की पूजा अर्चना की। साथ ही उनसे धान का भण्डार भरने की मन्नत मांगी। इस पर्व को लेकर जनपद शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के बाजारो में सुबह से ही दुकानदारो द्वारा अपनी अपनी दुकाने सजा गई थी। महंगाई के कारण लोगो ने अपनी हैसियत के मुताबिक खरीददारी करके त्योहार की परम्परा का निर्वहन किया। बता दे कि धनतेरस का पर्व युगो युगो से हमारे पूर्वज मनाते रहे है। इस दिन भगवान धनवन्तरि की पूजा करने से घर में धन धान्य की बढ़ोत्तरी होन की मान्यता है। यही वजह है कि लोग इस दिन अपने अपने घरो को पहले से ही साफ सुथरा कर लेते है। इस दिन भगवान धनवन्तरि की प्रतिमां को स्थापित करके विधि विधान के साथ भगवान की पूजा करते है। धनतेरस के दिन घर में कुछ नया खरीदकर लाने की परम्परा है। बुद्धि जीवियों का कहना है कि इस दिन घर पर सोने चांदी व बर्तन आदि खरीदने से घर में धन की प्राप्ति होती है। यही वजह है कि धनतेरस के दिन दुकानदारो द्वारा अपनी दुकाने सजा दी जाती है। बर्तन व जेवर की दुकानो पर अधिक खरीददारी होती है। इस दिन बाजाो में लाई, लावा, चिवरा गट्टा आदि की दुकाने में सजी थी। लोगो ने लाई, लावा, गट्टा आदि भी खरीदा। इसके अलावा चीनी के बने खिलौनो मिठाई की भी खरीददारी की गई। लोगो ने महंगाई को दर किनार करके खरीददारी की।



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