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धूमधाम से मनाया गया जश्न ए रसूल की पैदाइश की ख़ुशी

बड़ी दिल खुलूसी से मुस्लिम समाज के लोगों ने घर, दूकान, गली, मोहल्ला, मस्जिद को सजाए रखा
करारी कौशाम्बी। मंगलवार को  बड़े ही धूमधाम से जनपद के चारों ओर जश्न ए रसूल की पैदाइश खुशी में जश्न मनाया गया। करारी क़स्बा क्षेत्र में जश्ने ईद मिलाद उन्नबी के ख़ुशी के अज़ीम मौके पर बड़ी शान व शौकत से जुलूस की शक्ल में गाड़ी, ट्राली वाहन में बाजा, साउंड रख पूरे कसबे में नात तखरीर के माध्यम गली गली मोहल्ले में झंडे के साथ सरकार की आमद मरहबा, सरकार की आमद मरहबा के बुलंद आवाज़ के साथ सभी आय हुवे जुलूस में लोगों के अपने आखरी नबी मुहम्मद मुस्तफा सलललाहो अलैहे वसल्लम की पैदाइश की ख़ुशी के मौके पर सभी को मुबारकबाद अदा की। इसी के साथ जगह जगह रुक कर तखरीर के माध्यम से रसूल की जीवनी पर प्रकाश डाला। जिसमे कहा गया कि अल्लाह अपने  रसूल मुहम्मद मुस्तफा को अल्लाह ने सारी दुनिया के मखलूक की जन्नत में जाने यानि शफ़ाअत का जिम्मा दिया और जन्नत में जिस फल को खाना चाहे खाएं, जो चीज की हाजत हो कहें और अल्लाह के हुक्म से एक आवाज़ में अल्लाह के फ़रिश्ते सारी हाजत पूरा करदें, लेकिन अल्लाह के रसूल ने जन्नत के वह फल, चीज़ की न हाजत कर अपने उम्मती को बक्शने के लिए  अल्लाह से दुआ करते रहे, आपकी अपनी पूरी जिंदगी 63वर्ष रही और अपनी तिरसठ साला जिंदगी में सिर्फ अमन, शान्ति, का ही पैगाम दिया गया। यहाँ तक की इतनी ज्यादा अमन, शांति के पैगाम देने के बाद भी  मक्का शहर वाले आपके दुश्मन हो गए तब आप अल्लाह के हुक्म से आप दस मुहर्रम को हजरत के लिए मदीना शरीफ जाने के लिए तैयार हो गए आप नवी की रात को अपने बिस्तर पर हजरत हजरत अली को सुलाकर निकल गए ।काफी पीछा किया गया लेकिन अल्लाह ने हर जगह मदद अता आप जैसे ही मदीना शरीफ पहुंचे ।वहां के सभी लोग आपका खजूरों और थाली बजाकर स्वागत किया ।, जुलूस का शुरआत अंसार गंज से जुलूस उठाया गया आजाद नगर, चमन गंज, कृष्णा नगर, सोनारन टोला, नयागंज, तुर्ती पुर, मौलानी, उखैया ख़ास से चक हिंगुई में जुलूस लाया गया जहाँ चक हिंगुई में सैयद अली के घर के पास हमेशा की तरह होने वाले मिलाद का आयोजन हुवा जिसमे तख़रीर  के माध्यम से मौलाना गुलाम साबिर ने कहा नबी का मिलाद मनाने से ही मुस्लिम और सच्चे नबी का दीवाना नहीं है बल्कि अपने पास के पड़ोस के लिए अच्छे एखलाक और गरीब की मदद करना, दिलसे बोग्ज़ हसद किना निकाल कर फेक देना असली ईमान और सच्चे रसूल के सच्चे गुलाम की पहचान है चक हिंगुई का जुलूस बाजा, ऊँट के साथ तमाम मुस्लेमीन का काफिला वापस  आजाद नगर अंसार गंज के लिए रवाना हो गए असर के वक़्त सराय मस्जिद के पास रुक कर नमाज़ अदा किया गया जुलूस में हर जगह से मदीने के काबा का नक्शा , मीनार का नक्शा आदि सजाए हुवे थे हर तरफ से नारे तकबीर अल्लाहु अकबर की सदा गूँज रही थी।, मरहबा या रसूल अल्लाह शाम में अनसार गंज में सलातो सलाम पढ़ कर जुलूस का समापन किया गया इसी तरह मंझनपुर के चमन गंज से जुलूस ए मुहम्मदी बड़ी ही शान से हार्न बाजे के साथ नात पढ़ते हुवे जुलूस निकाला गया जिसमे तमाम मंझनपुर के कसबे के लोग जुलूस में शिरकत किये इस मौके पर जुलूस में भारी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग उपस्थित रहे।

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बड़ी दिल खुलूसी से मुस्लिम समाज के लोगों ने घर, दूकान, गली, मोहल्ला, मस्जिद को सजाए रखा
करारी कौशाम्बी। मंगलवार को  बड़े ही धूमधाम से जनपद के चारों ओर जश्न ए रसूल की पैदाइश खुशी में जश्न मनाया गया। करारी क़स्बा क्षेत्र में जश्ने ईद मिलाद उन्नबी के ख़ुशी के अज़ीम मौके पर बड़ी शान व शौकत से जुलूस की शक्ल में गाड़ी, ट्राली वाहन में बाजा, साउंड रख पूरे कसबे में नात तखरीर के माध्यम गली गली मोहल्ले में झंडे के साथ सरकार की आमद मरहबा, सरकार की आमद मरहबा के बुलंद आवाज़ के साथ सभी आय हुवे जुलूस में लोगों के अपने आखरी नबी मुहम्मद मुस्तफा सलललाहो अलैहे वसल्लम की पैदाइश की ख़ुशी के मौके पर सभी को मुबारकबाद अदा की। इसी के साथ जगह जगह रुक कर तखरीर के माध्यम से रसूल की जीवनी पर प्रकाश डाला। जिसमे कहा गया कि अल्लाह अपने  रसूल मुहम्मद मुस्तफा को अल्लाह ने सारी दुनिया के मखलूक की जन्नत में जाने यानि शफ़ाअत का जिम्मा दिया और जन्नत में जिस फल को खाना चाहे खाएं, जो चीज की हाजत हो कहें और अल्लाह के हुक्म से एक आवाज़ में अल्लाह के फ़रिश्ते सारी हाजत पूरा करदें, लेकिन अल्लाह के रसूल ने जन्नत के वह फल, चीज़ की न हाजत कर अपने उम्मती को बक्शने के लिए  अल्लाह से दुआ करते रहे, आपकी अपनी पूरी जिंदगी 63वर्ष रही और अपनी तिरसठ साला जिंदगी में सिर्फ अमन, शान्ति, का ही पैगाम दिया गया। यहाँ तक की इतनी ज्यादा अमन, शांति के पैगाम देने के बाद भी  मक्का शहर वाले आपके दुश्मन हो गए तब आप अल्लाह के हुक्म से आप दस मुहर्रम को हजरत के लिए मदीना शरीफ जाने के लिए तैयार हो गए आप नवी की रात को अपने बिस्तर पर हजरत हजरत अली को सुलाकर निकल गए ।काफी पीछा किया गया लेकिन अल्लाह ने हर जगह मदद अता आप जैसे ही मदीना शरीफ पहुंचे ।वहां के सभी लोग आपका खजूरों और थाली बजाकर स्वागत किया ।, जुलूस का शुरआत अंसार गंज से जुलूस उठाया गया आजाद नगर, चमन गंज, कृष्णा नगर, सोनारन टोला, नयागंज, तुर्ती पुर, मौलानी, उखैया ख़ास से चक हिंगुई में जुलूस लाया गया जहाँ चक हिंगुई में सैयद अली के घर के पास हमेशा की तरह होने वाले मिलाद का आयोजन हुवा जिसमे तख़रीर  के माध्यम से मौलाना गुलाम साबिर ने कहा नबी का मिलाद मनाने से ही मुस्लिम और सच्चे नबी का दीवाना नहीं है बल्कि अपने पास के पड़ोस के लिए अच्छे एखलाक और गरीब की मदद करना, दिलसे बोग्ज़ हसद किना निकाल कर फेक देना असली ईमान और सच्चे रसूल के सच्चे गुलाम की पहचान है चक हिंगुई का जुलूस बाजा, ऊँट के साथ तमाम मुस्लेमीन का काफिला वापस  आजाद नगर अंसार गंज के लिए रवाना हो गए असर के वक़्त सराय मस्जिद के पास रुक कर नमाज़ अदा किया गया जुलूस में हर जगह से मदीने के काबा का नक्शा , मीनार का नक्शा आदि सजाए हुवे थे हर तरफ से नारे तकबीर अल्लाहु अकबर की सदा गूँज रही थी।, मरहबा या रसूल अल्लाह शाम में अनसार गंज में सलातो सलाम पढ़ कर जुलूस का समापन किया गया इसी तरह मंझनपुर के चमन गंज से जुलूस ए मुहम्मदी बड़ी ही शान से हार्न बाजे के साथ नात पढ़ते हुवे जुलूस निकाला गया जिसमे तमाम मंझनपुर के कसबे के लोग जुलूस में शिरकत किये इस मौके पर जुलूस में भारी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग उपस्थित रहे।

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