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पिण्डदान के साथ विदा हुई पुरखिने

प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। पितृपक्ष की मातृ नवमी को लोगो ने माता पक्ष के लोगो का श्राद्ध एवं तर्पण किया। पुरखिने आज आशीर्वाद देकर बिदा हुई। इसके लिए गंगा तथा अन्य नदियो के घाटो पर आज सुबह से ही भीड़ जुटी रही। लोगो ने पुरोहितो की देखरेख में अपने परिवार की दिवंगत महिलाओ का श्राद्ध एवं तर्पण किया। साथ ही ब्राम्हणो को अपनी सामथ्र्य के अनुसार दान भी दिया। पिण्डदान व तर्पण के बाद गाय, कुत्ता, कौवा तथा ब्राम्हण एवं गरीब को भोजन दान दिया। मातृनवमी पर आज नगर स्थित बेल्हा देवी धाम में सई नदी घाट पर पिण्डदान एवं तर्पण करके दिवंगत महिलाओ को विदा किया गया। पुरखिने विदा होते समय परिजनो को आशीर्वाद भी देती है। पिण्डदान एवं तर्पण का कार्यक्रम पुरोहितो की मदद से विधि विधान पूर्वक सम्पन्न किया गया। पुरोहितो ने बताया कि पितरो के ऋण से मुक्ति पाने तथा उनकी आत्मा की शांति के लिए तिलांजलि अनिवार्य होती है। यह व्यवस्था सभी धर्मो में है परन्तु उसकी विधियां अलग अलग है। मातृनवमी के दिन माता पक्ष के लोगो का श्राद्ध एवं तर्पण किया जाता है। इस दिन मातृदोष से मुक्ति के लिए भी तर्पण किया जाता है। वही जिनको महिला पूर्वजो के दिवंगत होने की तिथि निश्चित नही होती है उनका भी आज ही के दिन श्राद्ध एवं तर्पण किया जाता है। नवमी को महिलाओ यानि पुरखिनो की विदाई हो जाती है। इसके बाद पितरो की विदाई अमावस्या को होती है। तर्पण के लिए आज काफी संख्या में लोग बेल्हा देवी धाम स्थित सई नदी घाट पर एकत्र हुए। वहां पर तीर्थ पुरोहितो की देखरेख में जौ, तिल, चावल, शहद, गंगाजल आदि से तर्पण सम्पन्न किया गया। इस मौके पर जौ के आटा और खोआ का पिण्ड बनाया गया। उसे नदी में प्रवाहित किया गया। इसके बाद लोगो ने अपनी सामथ्र्य के अनुसार दान दिया। इसके बाद ब्राम्हण तथा गरीबो को दान के साथ ही गाय, कौआ और कुत्ता को भोजन दिया गया। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्रो में भी आज श्राद्ध व तर्पण करके महिला पूर्वजो को विदा किया गया। पुरखिने अपने परिजनो को आशीर्वाद देकर विदा करके एक वर्ष तक गया में निवास करने की याचना भी की गई।

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प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। पितृपक्ष की मातृ नवमी को लोगो ने माता पक्ष के लोगो का श्राद्ध एवं तर्पण किया। पुरखिने आज आशीर्वाद देकर बिदा हुई। इसके लिए गंगा तथा अन्य नदियो के घाटो पर आज सुबह से ही भीड़ जुटी रही। लोगो ने पुरोहितो की देखरेख में अपने परिवार की दिवंगत महिलाओ का श्राद्ध एवं तर्पण किया। साथ ही ब्राम्हणो को अपनी सामथ्र्य के अनुसार दान भी दिया। पिण्डदान व तर्पण के बाद गाय, कुत्ता, कौवा तथा ब्राम्हण एवं गरीब को भोजन दान दिया। मातृनवमी पर आज नगर स्थित बेल्हा देवी धाम में सई नदी घाट पर पिण्डदान एवं तर्पण करके दिवंगत महिलाओ को विदा किया गया। पुरखिने विदा होते समय परिजनो को आशीर्वाद भी देती है। पिण्डदान एवं तर्पण का कार्यक्रम पुरोहितो की मदद से विधि विधान पूर्वक सम्पन्न किया गया। पुरोहितो ने बताया कि पितरो के ऋण से मुक्ति पाने तथा उनकी आत्मा की शांति के लिए तिलांजलि अनिवार्य होती है। यह व्यवस्था सभी धर्मो में है परन्तु उसकी विधियां अलग अलग है। मातृनवमी के दिन माता पक्ष के लोगो का श्राद्ध एवं तर्पण किया जाता है। इस दिन मातृदोष से मुक्ति के लिए भी तर्पण किया जाता है। वही जिनको महिला पूर्वजो के दिवंगत होने की तिथि निश्चित नही होती है उनका भी आज ही के दिन श्राद्ध एवं तर्पण किया जाता है। नवमी को महिलाओ यानि पुरखिनो की विदाई हो जाती है। इसके बाद पितरो की विदाई अमावस्या को होती है। तर्पण के लिए आज काफी संख्या में लोग बेल्हा देवी धाम स्थित सई नदी घाट पर एकत्र हुए। वहां पर तीर्थ पुरोहितो की देखरेख में जौ, तिल, चावल, शहद, गंगाजल आदि से तर्पण सम्पन्न किया गया। इस मौके पर जौ के आटा और खोआ का पिण्ड बनाया गया। उसे नदी में प्रवाहित किया गया। इसके बाद लोगो ने अपनी सामथ्र्य के अनुसार दान दिया। इसके बाद ब्राम्हण तथा गरीबो को दान के साथ ही गाय, कौआ और कुत्ता को भोजन दिया गया। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्रो में भी आज श्राद्ध व तर्पण करके महिला पूर्वजो को विदा किया गया। पुरखिने अपने परिजनो को आशीर्वाद देकर विदा करके एक वर्ष तक गया में निवास करने की याचना भी की गई।

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