लोक अदालत में कोविड-19 के प्रोटोकॉल का किया गया पालन – सचिव रिचा वर्मा
अयोध्या । राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण फैजाबाद की ओर से शनिवार को दीवानी न्यायालय प्रांगण में जिला जज ज्ञान प्रकाश तिवारी की अध्यक्षता मे आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में 14486 वादों का निस्तारण किया गया साथ ही 379844 रुपये का अर्थदंड वसूला गया। इसके अलावा मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण के न्यायाधीश भूदेव गौतम की अदालत मे 85 केस दाखिल हुए जिसमे 83 निस्तारित किए गए। साथ ही 3 करोड़ 23 लाख 158 रुपए की धनराशि क्षतिपूर्ति निर्धारित की गई इसके पहले राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष / जनपद न्यायाधीश ज्ञान प्रकाश तिवारी ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित करके किया । इस मौके पर उन्होंने कहा कि लोक अदालत की मूल भावना में समाहित है लोक कल्याण की भावना। सुलह समझौता के दौरान सभी का मान, सभी का सम्मान, सभी को न्याय मिले इसका ध्यान रखा जाता है। राष्ट्रीय लोक अदालत में दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखकर आपसी सुलह-समझौते के माध्यम से वादों को निस्तारित कराया जाता है। इतिहास में दर्ज है कि सदियों पहले जब अदालतें नहीं हुआ करती थी तब दो पक्षों के आपसी मतभेद को सुलह-समझौता के माध्यम से समाज के गणमान्य व्यक्ति एक निर्धारित स्थल पर बैठकर दोनों पक्षों की बात सुनकर यह निर्णय करते थे कि दोनों पक्षों का हित किसमें हैं। इसी को देखते हुए सुलह-समझौता कराते थे और समाज में इसके सार्थक परिणाम भी दिखाई पड़तें थे। दोनों पक्षों के मध्य आपसी क्लेष, मतभेद एवं दुर्भावना समाप्त हो जाती थी। लोक कल्याण के भावना से ओत-प्रोत उसी स्वरूप को माननीय उच्चतम न्यायालय, माननीय उच्च न्यायालय द्वारा विस्तार रूप देते हुए एक स्थल एक मंच पर बहुत सारे वादों को सुलह-समझौता के आधार पर समाप्त कराने के उद्देश्य से लोक अदालत आयोजित कराने का निर्देश दिये जाते हैं, जिसमें दोनों पक्षों के हित के साथ सामाजिक प्रेम भावना भी समाहित हैं। उन्होंने आगे कहा कि समाज एवं राष्ट्र के हित में हैं कि लोग मिल-जुल कर प्रेम भावना से रहे। यदि आपसी मतभेद पनपते भी है, तो उसे शांत एव सदभाव के साथ समाप्त करने का प्रथम प्रयास दोनों पक्षों द्वारा किया जाना चाहिए। यदि प्रथम प्रयास में दोनों पक्ष सफल नहीं होते है तभी उन्हें न्यायालय के शरण जाना चाहिए। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती रिचा वर्मा ने कहा कि लोक अदालत के आयोजन में कोविड-19 प्रोटो काल एवं गाइडलाइन का पालन कराने के साथ आने वाले दोनों पक्षों के बैठने शुद्ध पेयजल आदि की समुचित व्यवस्था कराई गई थी। शनिवार को आयोजित वृहद लोक अदालत में अधिक से अधिक वादों को आपसी सुलह समझौता के माध्यम से समाप्त करा कर लोगों को लोक अदालत के उद्देश्य का लाभ दिलाया गया । राष्ट्रीय लोक अदालत के नोडल अधिकारी शैलेंद्र सिंह यादव ने बताया कि शनिवार को लगाई गई राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 14486 वादों को निस्तारित किया गया। पारिवारिक न्यायाधीश रीता कौशिक की अदालत में पेश किए गए 102 मुकदमों में से कई पुराने वादों सहित 84 मुकदमे निस्तारित किए गए। इस मौके पर 21 लाख 89 हजार 5 सौ रुपये का समझौता कराया गया। विशेष न्यायाधीश ई सी एक्ट असद अहमद हाशमी की अदालत में 158 दावे पेश किए गए जिसमें 155 का निस्तारण हुआ तथा 56 हजार की धनराशि वसूली गई । वही पूर्व मे विद्युत विभाग के सरकारी वकील मनोज कुमार श्रीवास्तव की पैरवी के दौरान अदालत में प्रस्तुत 140 वादों के निस्तारण में लगभग ढाई लाख का समन शुल्क जमा कराया गया था। बैंक रिकवरी से संबंधित 862 प्री लिटिगेशन वाद निस्तारित किए गए जिसमें बैंक संबंधित ऋण की वसूली 4 करोड़ 77 लाख 65 हजार 5 सौ 69 रुपये की गई। चेक सम्बंधित एन आई एक्ट की धारा 138 के अंतर्गत 15 वादों का निस्तारण किया गया साथ ही 30 लाख 31 हजार 637 रुपए का समझौता कराया गया। सिविल न्यायालय की ओर से 106 मामलों का निस्तारण किया गया। मजिस्ट्रेट अदालत मे 2521 फौजदारी वादों का निस्तारण हुआ। वहीं राजस्व मामलों से संबंधित 10424 वाद विभिन्न राजस्व न्यायालयों में प्रस्तुत हुए जिसमे 10351 वादों का निस्तारण किया गया। वही लंच के दौरान जनपद न्यायाधीश ज्ञान प्रकाश तिवारी ने दीवानी प्रांगण में विभिन्न बैंकों की ओर से लगाए गए कैम्पो का निरीक्षण किया। इस दौरान लोन से पीड़ित 3 वाद कारियों की समस्याओं को सुना और बैंक अधिकारियों से मिलकर उसका निराकरण कराया। इस मौके पर विधि और न्याय मंत्रालय भारत सरकार की ओर से विधि के क्षेत्र में हिंदी का प्रचार प्रसार और विधि साहित्य प्रकाशन के पुस्तकों की जानकारी दी गई। राष्ट्रीय लोक अदालत में पारिवारिक न्यायाधीश रीता कौशिक अपर जिला जज अमित कुमार पांडे सतीश कुमार त्रिपाठी एकता सिंह चंद्रशीला सीजेएम कुलदीप सिंह सिविल जज संजीव त्रिपाठी न्यायिक अधिकारी प्रशांत शुक्ला भगवान दास गुप्ता तरुणिमा ज्योत्सना राय पल्लवी सिंह अधिवक्ता नवीन मिश्रा राकेश वैद सूर्य नारायण सिंह आलोक खरे गौतम यादव रणधीर पांडे विपिन मिश्रा कमलेश पांडे सुदीप तिवारी सीपी श्रीवास्तव राजेन्द्र तिवारी हरिओम दुबे आदि लोक अदालत में शामिल रहे।



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