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सरकार द्वारा एनपीआरसी पद खत्म होने के बाद भी बीआरसी में रौब गालिब कर रहे लोग

कौशाम्बी। भाजपा सरकार बनने के बाद से ही शिक्षा व्यवस्था को पटरी में लाने हेतु बीआरसी में अपना ब्यर्थ समय गंवाने वाले शिक्षक जिन्हें एनपीआरसी के रूप में तैनाती दी गई थी ऐसे पद को तत्काल प्रभाव से खत्म कर दिया गया था ।और एनपीआरसी रहे शिक्षकों को अपने मूल विद्यालय में पठन-पाठन करने हेतु कड़े निर्देश जारी किए गए थे ।परंतु सरकार द्वारा पद खत्म करने के बाद भी पूर्व में तैनात रहे कुछ एनपीआरसी आज भी अपना पूरा समय बीआरसी में देते हुए रौब गालिब करते देखे जा रहे है। पूरे समय बीआरसी में खण्ड शिक्षाधिकारियों के आगे पीछे घूमकर राजनीति करते देखे जा रहे है। नतीजन सरकार की योजनाओं में  शामिल।विद्यालयों की मोहल्ला पाठशाला प्रभावित हो रही है।  प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से भाजपा की सरकार ने संकुल (एनपीआरसी) का पद सामाप्त कर दिया था।  संकुल की नवीनीकरण करके शिक्षक संकुल गठन का निर्देश दिया गया था। इसमें प्रत्येक न्याय पंचातय से एक शिक्षक संकुल के साथ पांच टीचरों को सदस्य बनाया गया है। साथ ही विद्यालयों में रहकर अपने कर्तव्यों के निर्वाहन का निर्देश दिया गया है। लेकिन मंझनपुर,सरसँवा,कौशाम्बी  बीआरसी सहित लगभग सभी ब्लाकों में जिम्मेदारो की सरपरस्ती कई संकुल अब भी विद्यालय नहीं जा रहें है।

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कौशाम्बी। भाजपा सरकार बनने के बाद से ही शिक्षा व्यवस्था को पटरी में लाने हेतु बीआरसी में अपना ब्यर्थ समय गंवाने वाले शिक्षक जिन्हें एनपीआरसी के रूप में तैनाती दी गई थी ऐसे पद को तत्काल प्रभाव से खत्म कर दिया गया था ।और एनपीआरसी रहे शिक्षकों को अपने मूल विद्यालय में पठन-पाठन करने हेतु कड़े निर्देश जारी किए गए थे ।परंतु सरकार द्वारा पद खत्म करने के बाद भी पूर्व में तैनात रहे कुछ एनपीआरसी आज भी अपना पूरा समय बीआरसी में देते हुए रौब गालिब करते देखे जा रहे है। पूरे समय बीआरसी में खण्ड शिक्षाधिकारियों के आगे पीछे घूमकर राजनीति करते देखे जा रहे है। नतीजन सरकार की योजनाओं में  शामिल।विद्यालयों की मोहल्ला पाठशाला प्रभावित हो रही है।  प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से भाजपा की सरकार ने संकुल (एनपीआरसी) का पद सामाप्त कर दिया था।  संकुल की नवीनीकरण करके शिक्षक संकुल गठन का निर्देश दिया गया था। इसमें प्रत्येक न्याय पंचातय से एक शिक्षक संकुल के साथ पांच टीचरों को सदस्य बनाया गया है। साथ ही विद्यालयों में रहकर अपने कर्तव्यों के निर्वाहन का निर्देश दिया गया है। लेकिन मंझनपुर,सरसँवा,कौशाम्बी  बीआरसी सहित लगभग सभी ब्लाकों में जिम्मेदारो की सरपरस्ती कई संकुल अब भी विद्यालय नहीं जा रहें है।

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