मिल्कीपुर -अयोध्या । आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में वर्ष 2003 में एक पद पर तीन नियुक्तियां करने का जो सिलसिला चालू हुआ वही कुलपति के गले की फांस बन बैठा। नतीजतन मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद थाना कुमारगंज में पूर्व कुलपति डॉक्टर बी बी सिंह एवं एक लिपिक के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत कराया गया। जांच अधिकारी की आख्या के आधार एवं मुख्यमंत्री के अनुमोदन पर अंकित कराई गई प्रथम सूचना रिपोर्ट के अनुसार ट्रेनिंग एसोसिएट के एक पद के लिए 9 अगस्त 2003 को कराए गए साक्षात्कार के एक अभ्यर्थी विनोद कुमार सिंह ने विश्वविद्यालय से प्राप्त जन सूचना के आधार पर उच्च न्यायालय में वाद दायर किया कि वह इस पद का दावेदार था पर उसका चयन नहीं किया गया। उच्च न्यायालय के आदेश पर विजिलेंस द्वारा जांच कराया गया जिसमें बड़े स्तर पर नियमों की अनदेखी कर नियुक्तियां करने का राज खुला। यहां यह भी जानना उचित होगा कि इस हाई प्रोफाइल फर्जीवाड़े का मुकदमा माननीय उच न्यायालय लखनऊ खंडपीठ में योजित रिट याचिका संख्या 994 [एस•वी] 20017 विनोद कुमार सिंह बनाम कुलपति नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय व दो अन्य में पारित दिनांक 25/1/ 16-17 के संबंध में खुली जांच सतर्कता अधिष्ठान से कराए जाने के आदेश के क्रम में सेक्टर अयोध्या द्वारा पूर्ण कर सतर्कता मुख्यालय प्रेषित की गई जहां से अंतिम आंख्या शासन को प्रेषित की गई जिसके आधार पर जांच अधिकारी विजय कुमार यादव ने प्रथम सूचना रिपोर्ट अंकित कराई।थाना कुमारगंज में अंकित कराई गई प्रथम सूचना रिपोर्ट 0154/29/6/2020 के अनुसार खुली जांच के मध्य संकलित अभिलेखी एवं मौखिक जांच के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ कि तत्कालीन कुलपति बी बी सिंह नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय के कार्यकाल में वर्ष 2001-2003 में ट्रेनिंग एसोसिएट प्लांट प्रोटक्शन के पद पर 3 नाम चयन किए गए। प्रथम स्थान पर डॉ अरविंद कुमार सिंह, द्वितीय स्थान पर रूद्र प्रताप सिंह तथा तृतीय स्थान पर किसी अन्य का नाम चयनित किए जाने के बाद विश्वविद्यालय की प्रबंध परिषद समिति द्वारा अनुमोदित कराते हुए 26 फरवरी 2004 को तत्कालीन कुलपति डॉ बी•बी• सिंह के पास पत्रावली भेज दी गई थी। सतर्कता अधिष्ठान द्वारा शासन को भेजी गई आंख्या में बताया गया कि कुलपति द्वारा क्रम संख्या तीन पर चयनित अभ्यर्थी के नाम के स्थान पर सफेदा लगाकर पेन से डॉक्टर प्रमोद कुमार का नाम अंकित कर दिया गया। काली स्याही वाली पेन से कूट रचना करके आपराधिक षड्यंत्र रच कर उसी विज्ञप्ति पर 17 अगस्त 2004 को क्रमशः डॉ अरविंद कुमार सिंह एवं डॉक्टर रूद्र प्रताप सिंह को भी नियुक्ति पत्र जारी कर दिया गया।27 दिसंबर 2008 को कूट रचना कर अंकित किए गए गैर चयनित डॉ प्रमोद कुमार को भी नियुक्ति पत्र जारी कर दिया। इसके बाद फर्जीवाड़े के इस मामले ने तूल पकड़ा, मामला उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ जा पहुंचा और फर्जी नियुक्ति का सच बाहर आ गया। तत्कालीन कुलपति डॉ बी बी सिंह, वरिष्ठ लिपिक कृषि विश्वविद्यालय ओम प्रकाश गौड़, विषय वस्तु विशेषज्ञ फसल सुरक्षा कृषि विज्ञान केंद्र बसुली महाराजगंज डॉ प्रमोद कुमार तथा वस्तु विशेषज्ञ फसल सुरक्षा कृषि विज्ञान केंद्र अंबापुर सीतापुर विनोद कुमार सिंह के विरुद्ध तहरीर के आधार पर थाना कुमारगंज पुलिस ने 29 जून 2020 को कुलपति सहित उपरोक्त चारों लोगों के विरुद्ध धारा 420,467,468,471 व 120 बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया। कुमारगंज थाना प्रभारी संतोष सिंह ने बताया कि 1 वर्ष पूर्व ही इस मुकदमे को सतर्कता अधिष्ठान गोरखपुर को ट्रांसफर किया गया था ।18 वर्ष पूर्व हुए इस फर्जीवाड़े में देखना है कि सतर्कता अधिष्ठान गोरखपुर माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष अपनी रिपोर्ट कब प्रस्तुत करता है।
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नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय पद एक नियुक्ति बनी कुलपति के गले की फांस
मिल्कीपुर -अयोध्या । आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में वर्ष 2003 में एक पद पर तीन नियुक्तियां करने का जो सिलसिला चालू हुआ वही कुलपति के गले की फांस बन बैठा। नतीजतन मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद थाना कुमारगंज में पूर्व कुलपति डॉक्टर बी बी सिंह एवं एक लिपिक के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत कराया गया। जांच अधिकारी की आख्या के आधार एवं मुख्यमंत्री के अनुमोदन पर अंकित कराई गई प्रथम सूचना रिपोर्ट के अनुसार ट्रेनिंग एसोसिएट के एक पद के लिए 9 अगस्त 2003 को कराए गए साक्षात्कार के एक अभ्यर्थी विनोद कुमार सिंह ने विश्वविद्यालय से प्राप्त जन सूचना के आधार पर उच्च न्यायालय में वाद दायर किया कि वह इस पद का दावेदार था पर उसका चयन नहीं किया गया। उच्च न्यायालय के आदेश पर विजिलेंस द्वारा जांच कराया गया जिसमें बड़े स्तर पर नियमों की अनदेखी कर नियुक्तियां करने का राज खुला। यहां यह भी जानना उचित होगा कि इस हाई प्रोफाइल फर्जीवाड़े का मुकदमा माननीय उच न्यायालय लखनऊ खंडपीठ में योजित रिट याचिका संख्या 994 [एस•वी] 20017 विनोद कुमार सिंह बनाम कुलपति नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय व दो अन्य में पारित दिनांक 25/1/ 16-17 के संबंध में खुली जांच सतर्कता अधिष्ठान से कराए जाने के आदेश के क्रम में सेक्टर अयोध्या द्वारा पूर्ण कर सतर्कता मुख्यालय प्रेषित की गई जहां से अंतिम आंख्या शासन को प्रेषित की गई जिसके आधार पर जांच अधिकारी विजय कुमार यादव ने प्रथम सूचना रिपोर्ट अंकित कराई।थाना कुमारगंज में अंकित कराई गई प्रथम सूचना रिपोर्ट 0154/29/6/2020 के अनुसार खुली जांच के मध्य संकलित अभिलेखी एवं मौखिक जांच के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ कि तत्कालीन कुलपति बी बी सिंह नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय के कार्यकाल में वर्ष 2001-2003 में ट्रेनिंग एसोसिएट प्लांट प्रोटक्शन के पद पर 3 नाम चयन किए गए। प्रथम स्थान पर डॉ अरविंद कुमार सिंह, द्वितीय स्थान पर रूद्र प्रताप सिंह तथा तृतीय स्थान पर किसी अन्य का नाम चयनित किए जाने के बाद विश्वविद्यालय की प्रबंध परिषद समिति द्वारा अनुमोदित कराते हुए 26 फरवरी 2004 को तत्कालीन कुलपति डॉ बी•बी• सिंह के पास पत्रावली भेज दी गई थी। सतर्कता अधिष्ठान द्वारा शासन को भेजी गई आंख्या में बताया गया कि कुलपति द्वारा क्रम संख्या तीन पर चयनित अभ्यर्थी के नाम के स्थान पर सफेदा लगाकर पेन से डॉक्टर प्रमोद कुमार का नाम अंकित कर दिया गया। काली स्याही वाली पेन से कूट रचना करके आपराधिक षड्यंत्र रच कर उसी विज्ञप्ति पर 17 अगस्त 2004 को क्रमशः डॉ अरविंद कुमार सिंह एवं डॉक्टर रूद्र प्रताप सिंह को भी नियुक्ति पत्र जारी कर दिया गया।27 दिसंबर 2008 को कूट रचना कर अंकित किए गए गैर चयनित डॉ प्रमोद कुमार को भी नियुक्ति पत्र जारी कर दिया। इसके बाद फर्जीवाड़े के इस मामले ने तूल पकड़ा, मामला उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ जा पहुंचा और फर्जी नियुक्ति का सच बाहर आ गया। तत्कालीन कुलपति डॉ बी बी सिंह, वरिष्ठ लिपिक कृषि विश्वविद्यालय ओम प्रकाश गौड़, विषय वस्तु विशेषज्ञ फसल सुरक्षा कृषि विज्ञान केंद्र बसुली महाराजगंज डॉ प्रमोद कुमार तथा वस्तु विशेषज्ञ फसल सुरक्षा कृषि विज्ञान केंद्र अंबापुर सीतापुर विनोद कुमार सिंह के विरुद्ध तहरीर के आधार पर थाना कुमारगंज पुलिस ने 29 जून 2020 को कुलपति सहित उपरोक्त चारों लोगों के विरुद्ध धारा 420,467,468,471 व 120 बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया। कुमारगंज थाना प्रभारी संतोष सिंह ने बताया कि 1 वर्ष पूर्व ही इस मुकदमे को सतर्कता अधिष्ठान गोरखपुर को ट्रांसफर किया गया था ।18 वर्ष पूर्व हुए इस फर्जीवाड़े में देखना है कि सतर्कता अधिष्ठान गोरखपुर माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष अपनी रिपोर्ट कब प्रस्तुत करता है।



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