अयोध्या । जहां देश में कोरोना की दूसरी लहर में एंटीजन और आरटीपीसीआर टेस्ट में जहां कई लोगों की रिपोर्ट नेगेटिव आ रही है तो अब चेस्ट के सिटी स्कैन में कोरोना पकड़ में आ रहा है। बावजूद इसके जिला चिकित्सालय की सिटी स्कैन मशीन चार वर्ष से खराब है। न तो मशीन को ठीक कराया गया और न ही नई मशीन लगी। दर्शननगर स्थित मेडिकल कॉलेज में लगी सिटी स्कैन मशीन से भी नाम मात्र जांच हो पा रही है। ऐसे में लोगों को निजी डायग्नोस्टिक सेंटर पर जाना पड़ रहा है। नतीजा यह है कि जिला चिकित्सालय में जो सिटी स्कैन पांच सौ रुपये में हो सकती है, उसी का लोगों को पांच हजार तक देना पड़ता है। खोजनपुर निवासी ऋषभ अग्रवाल बताते हैं कि 71 वर्षीय पिता राजेंद्र कुमार अग्रवाल की तबीयत खराब होने के बाद कोरोना की जांच कराई, रिपोर्ट निगेटिव मिली थी। इसके बाद स्थित सामान्य होती न देख 28 अप्रैल को एक डायग्नोस्टिक सेंटर पर चेस्ट सिटी स्कैन कराने से कोरोना की पुष्टि हुई। मेडिकल कॉलेज में 11 दिन इलाज चलने के बाद स्वस्थ हुए। पूराकलंदर थाना क्षेत्र के शांतीपुर गांव निवासी 57 वर्षीय शकुंतला देवी को सांस की समस्या होने पर 26 अप्रैल को जिला चिकित्सालय में भर्ती हुईं। कोरोना जांच में निगेटिव थी, चिकित्सकों ने स्थित गंभीर होती देख सिटी स्कैन कराया तो कोरोना की पुष्टि हुई। कोविड पॉजिटिव होने पर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।शिवविहार कॉलोनी की कमला चौरसिया भी सिटी स्कैन में कोरोना संक्रमित मिलीं। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. घनश्याम सिंह का कहना है कि जिला अस्पताल की सिटी स्कैन मशीन की मरम्मत नहीं हो सकती। टेक्नीशियन की रिपोर्ट लगाकर सूचना शासन को भेजी गई है।
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जिला चिकित्सालय की सिटी स्कैन मशीन खराब , नई का इंतजार
अयोध्या । जहां देश में कोरोना की दूसरी लहर में एंटीजन और आरटीपीसीआर टेस्ट में जहां कई लोगों की रिपोर्ट नेगेटिव आ रही है तो अब चेस्ट के सिटी स्कैन में कोरोना पकड़ में आ रहा है। बावजूद इसके जिला चिकित्सालय की सिटी स्कैन मशीन चार वर्ष से खराब है। न तो मशीन को ठीक कराया गया और न ही नई मशीन लगी। दर्शननगर स्थित मेडिकल कॉलेज में लगी सिटी स्कैन मशीन से भी नाम मात्र जांच हो पा रही है। ऐसे में लोगों को निजी डायग्नोस्टिक सेंटर पर जाना पड़ रहा है। नतीजा यह है कि जिला चिकित्सालय में जो सिटी स्कैन पांच सौ रुपये में हो सकती है, उसी का लोगों को पांच हजार तक देना पड़ता है। खोजनपुर निवासी ऋषभ अग्रवाल बताते हैं कि 71 वर्षीय पिता राजेंद्र कुमार अग्रवाल की तबीयत खराब होने के बाद कोरोना की जांच कराई, रिपोर्ट निगेटिव मिली थी। इसके बाद स्थित सामान्य होती न देख 28 अप्रैल को एक डायग्नोस्टिक सेंटर पर चेस्ट सिटी स्कैन कराने से कोरोना की पुष्टि हुई। मेडिकल कॉलेज में 11 दिन इलाज चलने के बाद स्वस्थ हुए। पूराकलंदर थाना क्षेत्र के शांतीपुर गांव निवासी 57 वर्षीय शकुंतला देवी को सांस की समस्या होने पर 26 अप्रैल को जिला चिकित्सालय में भर्ती हुईं। कोरोना जांच में निगेटिव थी, चिकित्सकों ने स्थित गंभीर होती देख सिटी स्कैन कराया तो कोरोना की पुष्टि हुई। कोविड पॉजिटिव होने पर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।शिवविहार कॉलोनी की कमला चौरसिया भी सिटी स्कैन में कोरोना संक्रमित मिलीं। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. घनश्याम सिंह का कहना है कि जिला अस्पताल की सिटी स्कैन मशीन की मरम्मत नहीं हो सकती। टेक्नीशियन की रिपोर्ट लगाकर सूचना शासन को भेजी गई है।



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