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रास्ते के नाम पर लाखों रुपए का हुआ घोटाला

अन्तू, प्रतापगढ। जनपद प्रतापगढ़ के ब्लॉक संडवा चंदिका  के अंतर्गत आने वाली एक ऐसी गांव सभा जहां पर कोई भी आने जाने का रास्ता नहीं है, यहाँ के लोग आज भी जी रहे मूलभूत सुविधाओं  के बिना जिंदगी। मामला है ब्लॉक-  सांडवा चंडिका,तहसील- सदर  के कल्याणपुर, मौरहा, मजरा- तिवरान ग्राम सभा का है। प्रत्येक पंचवर्षीय में इस गांव के विकास के नाम पर निकाले जाते हैं लाखों रुपए, जमकर हो रही है घोटालेबाजी,  ना तो किसी के पास आवास है, ना शौचालय है, ना पेंशन है, न ही खड़ंजा है, ना नाली है। तो सोचने वाली बात है कि आखिर इस गांव के विकास के नाम पर निकाली गई राशि कहां जा रही है, क्या बिना उच्च अधिकारियों की मिलीभगत के इस तरह के सरकारी पैसे का गबन होना संभव है। गलत रिपोर्ट लगाकर पैसों का बंदरबांट कौन कर रहा है? ऐसे न जाने कितने सवाल इस गांव में आने के बाद देखने को मिलते हैं ।आज भी लोग अपनी परेशानियों को बयां करते हुए हमारे पत्रकार से बताएं की बीमारी वगैरह में हम लोग खाट की डोली बनाकर बीमार व्यक्ति को मेन रोड तक ले जाते हैं । बरसात के दिनों में हम अपने घरों में कैद हो जाते हैं, क्योंकि चारों तरफ पानी होता है और इस गांव में आने का कोई रास्ता है ही नहीं। ऐसे में हमारे पास दवा इलाज खानपान, बच्चों के स्कूल जाने से संबंधित समस्याएं बहुत ही भयानक हो जाती हैं। सोचने वाली बात है कि आज की आधुनिक सुविधाओं के बावजूद आखिर यह ग्रामसभा इतनी पिछड़ी क्यों है।

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अन्तू, प्रतापगढ। जनपद प्रतापगढ़ के ब्लॉक संडवा चंदिका  के अंतर्गत आने वाली एक ऐसी गांव सभा जहां पर कोई भी आने जाने का रास्ता नहीं है, यहाँ के लोग आज भी जी रहे मूलभूत सुविधाओं  के बिना जिंदगी। मामला है ब्लॉक-  सांडवा चंडिका,तहसील- सदर  के कल्याणपुर, मौरहा, मजरा- तिवरान ग्राम सभा का है। प्रत्येक पंचवर्षीय में इस गांव के विकास के नाम पर निकाले जाते हैं लाखों रुपए, जमकर हो रही है घोटालेबाजी,  ना तो किसी के पास आवास है, ना शौचालय है, ना पेंशन है, न ही खड़ंजा है, ना नाली है। तो सोचने वाली बात है कि आखिर इस गांव के विकास के नाम पर निकाली गई राशि कहां जा रही है, क्या बिना उच्च अधिकारियों की मिलीभगत के इस तरह के सरकारी पैसे का गबन होना संभव है। गलत रिपोर्ट लगाकर पैसों का बंदरबांट कौन कर रहा है? ऐसे न जाने कितने सवाल इस गांव में आने के बाद देखने को मिलते हैं ।आज भी लोग अपनी परेशानियों को बयां करते हुए हमारे पत्रकार से बताएं की बीमारी वगैरह में हम लोग खाट की डोली बनाकर बीमार व्यक्ति को मेन रोड तक ले जाते हैं । बरसात के दिनों में हम अपने घरों में कैद हो जाते हैं, क्योंकि चारों तरफ पानी होता है और इस गांव में आने का कोई रास्ता है ही नहीं। ऐसे में हमारे पास दवा इलाज खानपान, बच्चों के स्कूल जाने से संबंधित समस्याएं बहुत ही भयानक हो जाती हैं। सोचने वाली बात है कि आज की आधुनिक सुविधाओं के बावजूद आखिर यह ग्रामसभा इतनी पिछड़ी क्यों है।

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