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गंडकी नदी के दामोदर कुंड में तुलसी दल डालने से मिलते हैं शालिग्राम:– धर्माचार्य ओम प्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुजदास

  प्रतापगढ़ ।  संत निवास परसन पांडे का पुरवा  सेनानी ग्राम देवली में भगवान श्रीमन्नारायण एवं माता तुलसी का विवाहोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर माता तुलसी और शालिग्राम भगवान का विधिवत पूजन अर्चन करने के पश्चात शास्त्रोक्त विधि से वेद मंत्रों के मध्य भगवान का विवाह संपन्न करने के पश्चात धर्माचार्य ओम प्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुजदास  ने कहा कि पूर्व काल में जालंधर नाम का दैत्य जो भगवान के अंश से ही अवतरित हुआ था, जिसकी पत्नी का नाम वृंदा था जो परम तपस्वी भगवान श्रीमन्नारायण की परम भक्त एवं परम तपस्वी तथा पतिव्रता थी। जिसके कारण जालंधर ने दैत्यों के साथ मिलकर के इंद्रलोक पर अधिकार कर लिया। देवता इधर-उधर घूमने लगे यज्ञ इत्यादि बंद हो गए सभी देवता ब्रह्मा जी और शंकर जी को लेकर भगवान नारायण के पास गए भगवान नारायण ने कहा कि मैं उसे नहीं मार सकता हूं। उसकी मृत्यु तो शंकर जी के हाथों ही होगी आप लोग जाकर युद्ध कीजिए दैत्य और देवताओं में बड़ा भयंकर युद्ध हुआ। भगवान को स्मरण करते हुए वृंदा पूजन करती रही इतने में शंख धवनि और गाजे बाजे की आवाज सुनाई पड़ी। वृंदा ने सोचा युद्ध समाप्त हो गया। भगवान जालंधर के रूप में वृंदा के पास पहुंचे वृंदा प्रसन्न होकर आरती उतारी जैसे ही भगवान को स्पर्श किया। उधर शंकर जी से भयंकर युद्ध जालंधर का हुआ। उसी समय जालंधर का सिर कटकर वृंदा के सामने आकर गिरा वृंदा आश्चर्य में पड़ गई । यह क्या हो रहा है। भगवान अपने चतुर्भुज स्वरूप में आ गये। वृंदा ने कहा आपका हृदय पत्थर के समान है इसलिए आप पत्थर के हो जाओ। भगवान वृंदा के श्राप को स्वीकार किया और कहने लगे कि हे हे वृंदा हम तुम्हारे श्राप को स्वीकार कर रहे हैं। तुम जो कुछ चाहती हो मुझसे मांग लो बृंदा शांत चित्त खड़ी हो गई । भगवान ने कहा तुम तुलसी बनकर के मृत्यु लोक में अवतरित होगी और भारत देश के अंदर गंडगी नदी के दामोदर कुंड में जब लोग तुलसी दल डालेंगे तो हम पत्थर के रूप में शालिग्राम स्वरूप में उन्हें मिलेंगे। तुम मेरे सिर पर चढोगी जब तक  तुलसी दल मेरे सिर पर नहीं रखा जाएगा तब तक मेरा सिर दर्द करता रहेगा। कोई कितना भी 56 भोग मुझे परोसेगा लेकिन यदि तुम उसमें नहीं होगी तो हम उसे स्वीकार नहीं करेंगे। मेरा भोग तभी संभव है जब उसमें तुलसी दल होगा। तुम मुझे प्राणों से भी प्रिय हो। द्वापर में तुम्हारे नाम पर स्थित वृंदावन में मैं गोपियों के साथ महारास करूंगा। वृंदा जालंधर के शरीर को लेकर सती हो गई। भगवान वृंदा के प्रेम में इतने आसक्त हो गए कि कई दिनों तक उसकी राख में लोटते रहे। वही वृंदा तुलसी बनकर अवतरित हुई कार्तिक मास में जो मनुष्य तुलसी के एक पत्ते से भी ठाकुर जी की सेवा करता है उसको अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। कार्यक्रम मे मुख्य रूप से यशोमती रामानुजदासी नारायणी रामानुजदासी उर्मिला रामानुज दासी नीलम पांडे विनय पांडे जयप्रकाश पांडे  प्रणव कुमार गोविंद पांडे यश पांडे जय पांडे पूनम पांडे राखी पांडे रिद्धि पांडे विश्वम प्रकाश पांडे ओपी यादव पप्पू पाल राजेंद्र पाल जितेंद्र पाल सहित भारी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

  प्रतापगढ़ ।  संत निवास परसन पांडे का पुरवा  सेनानी ग्राम देवली में भगवान श्रीमन्नारायण एवं माता तुलसी का विवाहोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर माता तुलसी और शालिग्राम भगवान का विधिवत पूजन अर्चन करने के पश्चात शास्त्रोक्त विधि से वेद मंत्रों के मध्य भगवान का विवाह संपन्न करने के पश्चात धर्माचार्य ओम प्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुजदास  ने कहा कि पूर्व काल में जालंधर नाम का दैत्य जो भगवान के अंश से ही अवतरित हुआ था, जिसकी पत्नी का नाम वृंदा था जो परम तपस्वी भगवान श्रीमन्नारायण की परम भक्त एवं परम तपस्वी तथा पतिव्रता थी। जिसके कारण जालंधर ने दैत्यों के साथ मिलकर के इंद्रलोक पर अधिकार कर लिया। देवता इधर-उधर घूमने लगे यज्ञ इत्यादि बंद हो गए सभी देवता ब्रह्मा जी और शंकर जी को लेकर भगवान नारायण के पास गए भगवान नारायण ने कहा कि मैं उसे नहीं मार सकता हूं। उसकी मृत्यु तो शंकर जी के हाथों ही होगी आप लोग जाकर युद्ध कीजिए दैत्य और देवताओं में बड़ा भयंकर युद्ध हुआ। भगवान को स्मरण करते हुए वृंदा पूजन करती रही इतने में शंख धवनि और गाजे बाजे की आवाज सुनाई पड़ी। वृंदा ने सोचा युद्ध समाप्त हो गया। भगवान जालंधर के रूप में वृंदा के पास पहुंचे वृंदा प्रसन्न होकर आरती उतारी जैसे ही भगवान को स्पर्श किया। उधर शंकर जी से भयंकर युद्ध जालंधर का हुआ। उसी समय जालंधर का सिर कटकर वृंदा के सामने आकर गिरा वृंदा आश्चर्य में पड़ गई । यह क्या हो रहा है। भगवान अपने चतुर्भुज स्वरूप में आ गये। वृंदा ने कहा आपका हृदय पत्थर के समान है इसलिए आप पत्थर के हो जाओ। भगवान वृंदा के श्राप को स्वीकार किया और कहने लगे कि हे हे वृंदा हम तुम्हारे श्राप को स्वीकार कर रहे हैं। तुम जो कुछ चाहती हो मुझसे मांग लो बृंदा शांत चित्त खड़ी हो गई । भगवान ने कहा तुम तुलसी बनकर के मृत्यु लोक में अवतरित होगी और भारत देश के अंदर गंडगी नदी के दामोदर कुंड में जब लोग तुलसी दल डालेंगे तो हम पत्थर के रूप में शालिग्राम स्वरूप में उन्हें मिलेंगे। तुम मेरे सिर पर चढोगी जब तक  तुलसी दल मेरे सिर पर नहीं रखा जाएगा तब तक मेरा सिर दर्द करता रहेगा। कोई कितना भी 56 भोग मुझे परोसेगा लेकिन यदि तुम उसमें नहीं होगी तो हम उसे स्वीकार नहीं करेंगे। मेरा भोग तभी संभव है जब उसमें तुलसी दल होगा। तुम मुझे प्राणों से भी प्रिय हो। द्वापर में तुम्हारे नाम पर स्थित वृंदावन में मैं गोपियों के साथ महारास करूंगा। वृंदा जालंधर के शरीर को लेकर सती हो गई। भगवान वृंदा के प्रेम में इतने आसक्त हो गए कि कई दिनों तक उसकी राख में लोटते रहे। वही वृंदा तुलसी बनकर अवतरित हुई कार्तिक मास में जो मनुष्य तुलसी के एक पत्ते से भी ठाकुर जी की सेवा करता है उसको अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। कार्यक्रम मे मुख्य रूप से यशोमती रामानुजदासी नारायणी रामानुजदासी उर्मिला रामानुज दासी नीलम पांडे विनय पांडे जयप्रकाश पांडे  प्रणव कुमार गोविंद पांडे यश पांडे जय पांडे पूनम पांडे राखी पांडे रिद्धि पांडे विश्वम प्रकाश पांडे ओपी यादव पप्पू पाल राजेंद्र पाल जितेंद्र पाल सहित भारी संख्या में लोग उपस्थित रहे।