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दांपत्य जीवन में पति-पत्नी के बीच सामंजस्य होना जरूरी

 सराय नानकर गांव में चल रही भागवत कथा में बोले मनीष शरण जी
रखहा, प्रतापगढ़ । दांपत्य जीवन में पति पत्नी के बीच सामंजस्य का होना बहुत जरूरी है तभी दोनों का जीवन सुखमय होने के साथ संतान तथा परिवार में एकता बनी रहती है ।  यह बातें बाबा बेलखरनाथ धाम के सराय नानकार गांव में विजय नारायण तिवारी के आमंत्रण पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा की तीसरे दिन अयोध्या धाम से पधारे आचार्य श्री मनीष शरण जी महाराज ने कही । उन्होंने सोमवार को भागवत कथा के क्रम में भौतिकवादी युग में मन की व्याख्या करते हुए कहा कि मन को जिस प्रकार लगाया जायेगा उसी प्रकार वह जायेगा । मन को यदि भक्ति के मार्ग पर ले जाया जायेगा तो श्रद्धाभाव उत्पन्न होगा तथा यदि उसे भौतिक सुखों की ओर लगाया जायेगा तो सांसारिकता की ओर ले जाया जाएगा । कथा के पूर्व कथाव्यास ने परिवार के शहीद सैनिक वीर सपूत चंद्रलोक तिवारी को श्रद्धासुमन अर्पित किया । कथा के मुख्य श्रोता विजय नारायण तिवारी व उनकी पत्नी शकुंतला देवी तिवारी रही । इस दौरान अजब नारायण तिवारी, राकेश तिवारी, अरुण तिवारी, विपिन, वरुण, विवेक, आलोक आदि मौजूद रहे ।

 सराय नानकर गांव में चल रही भागवत कथा में बोले मनीष शरण जी
रखहा, प्रतापगढ़ । दांपत्य जीवन में पति पत्नी के बीच सामंजस्य का होना बहुत जरूरी है तभी दोनों का जीवन सुखमय होने के साथ संतान तथा परिवार में एकता बनी रहती है ।  यह बातें बाबा बेलखरनाथ धाम के सराय नानकार गांव में विजय नारायण तिवारी के आमंत्रण पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा की तीसरे दिन अयोध्या धाम से पधारे आचार्य श्री मनीष शरण जी महाराज ने कही । उन्होंने सोमवार को भागवत कथा के क्रम में भौतिकवादी युग में मन की व्याख्या करते हुए कहा कि मन को जिस प्रकार लगाया जायेगा उसी प्रकार वह जायेगा । मन को यदि भक्ति के मार्ग पर ले जाया जायेगा तो श्रद्धाभाव उत्पन्न होगा तथा यदि उसे भौतिक सुखों की ओर लगाया जायेगा तो सांसारिकता की ओर ले जाया जाएगा । कथा के पूर्व कथाव्यास ने परिवार के शहीद सैनिक वीर सपूत चंद्रलोक तिवारी को श्रद्धासुमन अर्पित किया । कथा के मुख्य श्रोता विजय नारायण तिवारी व उनकी पत्नी शकुंतला देवी तिवारी रही । इस दौरान अजब नारायण तिवारी, राकेश तिवारी, अरुण तिवारी, विपिन, वरुण, विवेक, आलोक आदि मौजूद रहे ।