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विचार,वैराग्य, ज्ञान के साथ हरि से मिलने का मार्ग बता देती है भगवान की कथा – कथा व्यास जयनारायण महराज

किशोरी सदन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में उमड़ रहीं भक्तों की भीड़
प्रतापगढ़। मनुष्य से गलती हो जाना बड़ी बात नहीं। लेकिन ऐसा होने पर समय रहते सुधार और प्रायश्चित जरूरी है। ऐसा नहीं हुआ तो गलती पाप की श्रेणी में आ जाती है। उक्त विचार शहर के किशोरी सदन में दयाल परिवार की ओर से आयोजित संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिवस आकाश सिद्ध हनुमान आश्रम के कथा व्यास पीठाधीश्वर जयनारायण शुक्ल महराज ने कही। उन्होंने पांडवों के जीवन में होने वाली श्रीकृष्ण की कृपा को बड़े ही सुंदर ढंग से दर्शाया। कथा व्यास ने कहा कि भक्ति एक ऐसा उत्तम निवेश है,जो जीवन में परेशानियों का उत्तम समाधान देती है। साथ ही जीवन के बाद मोक्ष भी सुनिश्चित करती है। उन्होंने कहा कि द्वापर युग में धर्मराज युधिष्ठिर ने सूर्यदेव की उपासना कर अक्षयपात्र की प्राप्ति किया। हमारे पूर्वजों ने सदैव पृथ्वी का पूजन व रक्षण किया। इसके बदले प्रकृति ने मानव का रक्षण किया। भागवत के श्रोता के अंदर जिज्ञासा और श्रद्धा होनी चाहिए। परमात्मा दिखाई नहीं देता है वह हर किसी में बसता है। इस दौरान कथा व्यास ने भगवान शिव,पार्वती की अमर कथा का विस्तार से वर्णन करते हुए शिव और पार्वती के विवाह के प्रसंग पर प्रकाश डाला।कथा व्यास ने बताया कि भगवान की कथा विचार, वैराग्य, ज्ञान और हरि से मिलने का मार्ग बता देती है।कथा सुन सदन में उपास्थित श्रद्धालु भाव विभोर होकर झूमते नजर आये।इस मौके पर प्रमुख रूप से अरविंद कसौधन, आशा, गोविंद कसौधन,अवधेश कसौधन, राजेश कसौधन, अमर कसौधन, पप्पू कसौधन, कुसुम गुप्ता पिंकी दयाल, रिचा केसरवानी,नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती प्रेमलता सिंह, अजीत शर्मा,अंजली,मंजू दूबे,नीलम, पुष्पा, मंजू श्रीवास्तव,पूनम खण्डेलवाल सहित आदि मौजूद रहे।

किशोरी सदन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में उमड़ रहीं भक्तों की भीड़
प्रतापगढ़। मनुष्य से गलती हो जाना बड़ी बात नहीं। लेकिन ऐसा होने पर समय रहते सुधार और प्रायश्चित जरूरी है। ऐसा नहीं हुआ तो गलती पाप की श्रेणी में आ जाती है। उक्त विचार शहर के किशोरी सदन में दयाल परिवार की ओर से आयोजित संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिवस आकाश सिद्ध हनुमान आश्रम के कथा व्यास पीठाधीश्वर जयनारायण शुक्ल महराज ने कही। उन्होंने पांडवों के जीवन में होने वाली श्रीकृष्ण की कृपा को बड़े ही सुंदर ढंग से दर्शाया। कथा व्यास ने कहा कि भक्ति एक ऐसा उत्तम निवेश है,जो जीवन में परेशानियों का उत्तम समाधान देती है। साथ ही जीवन के बाद मोक्ष भी सुनिश्चित करती है। उन्होंने कहा कि द्वापर युग में धर्मराज युधिष्ठिर ने सूर्यदेव की उपासना कर अक्षयपात्र की प्राप्ति किया। हमारे पूर्वजों ने सदैव पृथ्वी का पूजन व रक्षण किया। इसके बदले प्रकृति ने मानव का रक्षण किया। भागवत के श्रोता के अंदर जिज्ञासा और श्रद्धा होनी चाहिए। परमात्मा दिखाई नहीं देता है वह हर किसी में बसता है। इस दौरान कथा व्यास ने भगवान शिव,पार्वती की अमर कथा का विस्तार से वर्णन करते हुए शिव और पार्वती के विवाह के प्रसंग पर प्रकाश डाला।कथा व्यास ने बताया कि भगवान की कथा विचार, वैराग्य, ज्ञान और हरि से मिलने का मार्ग बता देती है।कथा सुन सदन में उपास्थित श्रद्धालु भाव विभोर होकर झूमते नजर आये।इस मौके पर प्रमुख रूप से अरविंद कसौधन, आशा, गोविंद कसौधन,अवधेश कसौधन, राजेश कसौधन, अमर कसौधन, पप्पू कसौधन, कुसुम गुप्ता पिंकी दयाल, रिचा केसरवानी,नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती प्रेमलता सिंह, अजीत शर्मा,अंजली,मंजू दूबे,नीलम, पुष्पा, मंजू श्रीवास्तव,पूनम खण्डेलवाल सहित आदि मौजूद रहे।