नैनी(प्रयागराज)। सैम हिग्गिनबाॅटम कृषि, प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान विश्वविद्यालय (शुआट्स) में चल रहे ग्रामीण कृषि मौसम सेवान्तर्गत भारत सरकार से प्राप्त पूर्वानुमान के अनुसार वैज्ञानिकों ने पूरे सप्ताह वर्षा के आसार जताते हुए कृषकों को सलाह दी है कि बासमती धान की पूसा – 1509 , पूसा बासमती – 1 , पूसा 1121 ए पूसा – 1692 आदि प्रजातियों को पश्चिमी उ.प्र . में जुलाई के अंतिम सप्ताह व पूर्वी उ.प्र . में अगस्त के प्रथम पक्ष में रोपाई करें । जिससे दाने की गुणवत्ता व सुगन्ध का विकास अच्छी तरह से हो सके । 20×15 से.मी. की दूरी पर 2 से 3 पौध की रोपाई करें । बासमती प्रजातियों में लगने वाले बकानी रोग से बचाव हेतु कार्बेन्डाजिम के 1 ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल से पौध को उपचारित करके रोपाई करें अथवा खड़ी फसल में छिड़काव करें । रोपित धान में यदि खैरा रोग लगा है तो रोग नियंत्रण के लिये फसल पर 5 किग्रा . जिंक सल्फेट 2.5 किग्रा . बुझे हुये चूने के साथ 1000 ली . पानी में मिलाकर प्रति हे . की दर से पर्णीत छिड़काव करें । धान की फसल में जड़ की सूड़ी से 5 प्रतिशत प्रकोपित पौधे होने की दशा में तथा दीमक का प्रकोप होने पर नियंत्रण हेतु क्लोरपायरीफॉस 20 ई.सी. 2.5 ली / हे . की दर से सिंचाई के पानी के साथ प्रयोग करें । 45-60 दिन की मक्का की फसल में नत्रजन की कुल संस्तुत मात्रा की एक चौथाई टॉप ड्रेसिंग के रुप में दें । बसन्तकालीन गन्ने में पर्याप्त नमी की दशा में मिटटी चढ़ा दें , जिससे अवांछित कल्लों की वृद्धि न हो बैंगन एवं मिर्च की तैयार पौध की मेड़ों पर रोपाई करें । टमाटर की अगेती संस्तुत किस्मों की बुआई करें । आम की रंगीन संकर किस्मों अम्बिका , अरुणिका , पूसा श्रेष्ठ आदि प्रजातियों का रोपण करें । अजोला की खेती को प्रदेश के पशुपालनकों को बड़े पैमाने पर अपनाये जाने हेतु प्रोत्साहित किये जाने की आवश्यकता है । पौधों को रोपण से पहले सावधानीपूर्वक पालीथीन से निकालें तथा पिण्डी को टूटने न दें उसके उपरांत ही रोपण करें । तालाब में यदि 4 प्रजातियों का पालन किया जाता है तो कतला 30 प्रतिशत व नैन 30 प्रतिशत का संचय अनुपात होना चाहिए ।
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शुआट्स वैज्ञानिकों की सलाह, पूरे सप्ताह वर्षा के आसार

नैनी(प्रयागराज)। सैम हिग्गिनबाॅटम कृषि, प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान विश्वविद्यालय (शुआट्स) में चल रहे ग्रामीण कृषि मौसम सेवान्तर्गत भारत सरकार से प्राप्त पूर्वानुमान के अनुसार वैज्ञानिकों ने पूरे सप्ताह वर्षा के आसार जताते हुए कृषकों को सलाह दी है कि बासमती धान की पूसा – 1509 , पूसा बासमती – 1 , पूसा 1121 ए पूसा – 1692 आदि प्रजातियों को पश्चिमी उ.प्र . में जुलाई के अंतिम सप्ताह व पूर्वी उ.प्र . में अगस्त के प्रथम पक्ष में रोपाई करें । जिससे दाने की गुणवत्ता व सुगन्ध का विकास अच्छी तरह से हो सके । 20×15 से.मी. की दूरी पर 2 से 3 पौध की रोपाई करें । बासमती प्रजातियों में लगने वाले बकानी रोग से बचाव हेतु कार्बेन्डाजिम के 1 ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल से पौध को उपचारित करके रोपाई करें अथवा खड़ी फसल में छिड़काव करें । रोपित धान में यदि खैरा रोग लगा है तो रोग नियंत्रण के लिये फसल पर 5 किग्रा . जिंक सल्फेट 2.5 किग्रा . बुझे हुये चूने के साथ 1000 ली . पानी में मिलाकर प्रति हे . की दर से पर्णीत छिड़काव करें । धान की फसल में जड़ की सूड़ी से 5 प्रतिशत प्रकोपित पौधे होने की दशा में तथा दीमक का प्रकोप होने पर नियंत्रण हेतु क्लोरपायरीफॉस 20 ई.सी. 2.5 ली / हे . की दर से सिंचाई के पानी के साथ प्रयोग करें । 45-60 दिन की मक्का की फसल में नत्रजन की कुल संस्तुत मात्रा की एक चौथाई टॉप ड्रेसिंग के रुप में दें । बसन्तकालीन गन्ने में पर्याप्त नमी की दशा में मिटटी चढ़ा दें , जिससे अवांछित कल्लों की वृद्धि न हो बैंगन एवं मिर्च की तैयार पौध की मेड़ों पर रोपाई करें । टमाटर की अगेती संस्तुत किस्मों की बुआई करें । आम की रंगीन संकर किस्मों अम्बिका , अरुणिका , पूसा श्रेष्ठ आदि प्रजातियों का रोपण करें । अजोला की खेती को प्रदेश के पशुपालनकों को बड़े पैमाने पर अपनाये जाने हेतु प्रोत्साहित किये जाने की आवश्यकता है । पौधों को रोपण से पहले सावधानीपूर्वक पालीथीन से निकालें तथा पिण्डी को टूटने न दें उसके उपरांत ही रोपण करें । तालाब में यदि 4 प्रजातियों का पालन किया जाता है तो कतला 30 प्रतिशत व नैन 30 प्रतिशत का संचय अनुपात होना चाहिए ।



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