जारी(प्रयागराज)। सफाई कर्मियों की नियुक्ति करके और उन्हें वेतन दे करके गांव गांव को स्वच्छ रखने का सरकारी सपना बेकार साबित होता दिख रहा है। हां इसमें शासन का लाखों रुपया वेतन के नाम पर जरूर बर्बाद हो रहा है।क्षेत्र के किसी भी गांव में ना तो सफाई कर्मी दिख रहे हैं और ना ही उनकी सफाई। घर बैठे ही वेतन लेना शायद सफाई कर्मियों का उद्देश्य बन चुका है। तभी तो आज तक वह किसी भी सार्वजनिक स्थानों पर सफाई करते नहीं दिखे। इलाके के कई गांवों पालपट्टी, कोटर, रेंगा, चंद्रोदया, हर बारी ,डॉंडो, खौरिया ,डेरा लोहरा, कौहट, बड्डिहा के लोगों की माने तो इन गांवों के सफाई कर्मियों ने आज तक कभी गांव में सफाई किया ही नहीं। और न ही गांव के किसी भी सार्वजनिक स्थानों पर इन्हें देखा ही गया है। जारी , गड़ैया, दगवा, बरेठिया, मैदा , कूंड़ी , अतरसुइया, तेलघना, पहाड़ी, लोटाढ़, भिस्कुरी, खूझी, रैपुरा, गौहानी , कोटर, रेंगा, चंद्रोदया, ग्राम वासियों का कहना है कि वह तो अपने गांव में नियुक्त सफाई कर्मियों का नाम तक नहीं जानते हैं। वह सफाई कहां करता है यह जिम्मेदार लोग ही जाने। कुछ इसी तरह का हाल क्षेत्र के ज्यादातर गांवों का है की सफाई कर्मी की सफाई की बात तो दूर उनको उनके नियुक्ति ग्राम सभाओं के लोग जानते व पहचानते तक नहीं है। इन गांवों के लोगों ने शासन व प्रशासन के उच्चाधिकारियों से मांग किया है कि हमारे गांव में नियुक्त सफाई कर्मियों के कार्यों की जांच स्वयं ही शासन व प्रशासन के उच्चाधिकारी मौके पर पहुंच कर कर ले। उसके बाद इनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही करें ताकि इन को दिया जाने वाला शासन का लाखों रुपया बर्बाद होने से बच सके।
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नहीं दिख रहे गांवों में सफाई कर्मी, बर्बाद हो रहा शासन का पैसा

जारी(प्रयागराज)। सफाई कर्मियों की नियुक्ति करके और उन्हें वेतन दे करके गांव गांव को स्वच्छ रखने का सरकारी सपना बेकार साबित होता दिख रहा है। हां इसमें शासन का लाखों रुपया वेतन के नाम पर जरूर बर्बाद हो रहा है।क्षेत्र के किसी भी गांव में ना तो सफाई कर्मी दिख रहे हैं और ना ही उनकी सफाई। घर बैठे ही वेतन लेना शायद सफाई कर्मियों का उद्देश्य बन चुका है। तभी तो आज तक वह किसी भी सार्वजनिक स्थानों पर सफाई करते नहीं दिखे। इलाके के कई गांवों पालपट्टी, कोटर, रेंगा, चंद्रोदया, हर बारी ,डॉंडो, खौरिया ,डेरा लोहरा, कौहट, बड्डिहा के लोगों की माने तो इन गांवों के सफाई कर्मियों ने आज तक कभी गांव में सफाई किया ही नहीं। और न ही गांव के किसी भी सार्वजनिक स्थानों पर इन्हें देखा ही गया है। जारी , गड़ैया, दगवा, बरेठिया, मैदा , कूंड़ी , अतरसुइया, तेलघना, पहाड़ी, लोटाढ़, भिस्कुरी, खूझी, रैपुरा, गौहानी , कोटर, रेंगा, चंद्रोदया, ग्राम वासियों का कहना है कि वह तो अपने गांव में नियुक्त सफाई कर्मियों का नाम तक नहीं जानते हैं। वह सफाई कहां करता है यह जिम्मेदार लोग ही जाने। कुछ इसी तरह का हाल क्षेत्र के ज्यादातर गांवों का है की सफाई कर्मी की सफाई की बात तो दूर उनको उनके नियुक्ति ग्राम सभाओं के लोग जानते व पहचानते तक नहीं है। इन गांवों के लोगों ने शासन व प्रशासन के उच्चाधिकारियों से मांग किया है कि हमारे गांव में नियुक्त सफाई कर्मियों के कार्यों की जांच स्वयं ही शासन व प्रशासन के उच्चाधिकारी मौके पर पहुंच कर कर ले। उसके बाद इनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही करें ताकि इन को दिया जाने वाला शासन का लाखों रुपया बर्बाद होने से बच सके।



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