लोकमित्र ब्यूरो
होलागढ़(प्रयागराज)। माता पिता की सेवा करने वाला पुत्र कभी दुखी नहीं रहता।साथ ही मां के ऋण से कभी उऋण नहीं हुआ जा सकता। तभी तो गाया की मां के दुधवा से मीठ कवनो मिठाई नाहीं बा।उक्त बातें मुकुंदपुर श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिन कथा व्यास विनीत कृष्ण द्विवेदी जी महाराज ने कही। बताया कि राम विवाह के समय जो मर्यादा रही वह कभी नहीं रही।कुबलया पीठ बध,कंस बध और रुक्मिणी विवाह का बहुत ही सुंदर वर्णन किया।कथा में मुख्य यजमान श्रीमती मिथिला सिंह एव त्रिवेणी बहादुर सिंह,सुनील सिंह,जीत लाल मिश्र,विक्रमा जीत सिंह,आशुतोष सिंह, अभिषेक सिंह आदि मौजूद रहे।
लोकमित्र ब्यूरो
होलागढ़(प्रयागराज)। माता पिता की सेवा करने वाला पुत्र कभी दुखी नहीं रहता।साथ ही मां के ऋण से कभी उऋण नहीं हुआ जा सकता। तभी तो गाया की मां के दुधवा से मीठ कवनो मिठाई नाहीं बा।उक्त बातें मुकुंदपुर श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिन कथा व्यास विनीत कृष्ण द्विवेदी जी महाराज ने कही। बताया कि राम विवाह के समय जो मर्यादा रही वह कभी नहीं रही।कुबलया पीठ बध,कंस बध और रुक्मिणी विवाह का बहुत ही सुंदर वर्णन किया।कथा में मुख्य यजमान श्रीमती मिथिला सिंह एव त्रिवेणी बहादुर सिंह,सुनील सिंह,जीत लाल मिश्र,विक्रमा जीत सिंह,आशुतोष सिंह, अभिषेक सिंह आदि मौजूद रहे।



उत्तरप्रदेश









शेयर करें




































































