रामगढ़ महोत्सव में वही काव्य गंगा छठे रामगढ़ महोत्सव का भव्य समापन
प्रयागराज। यमुनापार के अति प्राचीन राम गढ़ धाम मे तीन दिवसीय छठे रामगढ़ महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। जन सहयोग तथा लोक भागीदारी से आयोजित महोत्सव व पूसी तेरस मेले मे हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन पूजन के बाद मेले व महोत्सव का आनन्द लिया। महोत्सव का समापन कवि सम्मेलन व मुशायरे से हुआ। कार्यक्रम का शुभारम्भ करते हुए धाम के मार्गदर्शक सामाजिक कार्यकर्ता समाज शेखर ने कहा की यमुनापार मे पर्यटन विकास की अपार संभावना है। यहां के प्राचीन महत्व के स्थलो के विकास मे समाज व सरकार को अपनी साझी भूमिका निभानी चाहिए। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवियत्री डा नीलिमा मिश्रा ने किया। उन्होने ‘हे शिव शंकर, शांभ सदा शिव, हे करूणा , हे त्रिपुरारी’ से रामगढ़ महादेव की आराधना की। वहीं वरिष्ठ लोक कवि राम लोचन सांवरिया ने अवधी मे पढ़ा कि “भाई रहे भयकरा होई गए, बईरी के चौतरा होई गए, मेहरारू कय कहा मानकर बहुत बडे महुकरा होई गए” खूब सराही गई। इसके साथ ही प्रसिद्ध गीतकार डा राजेंद्र शुक्ल ने पढ़ा “ऊमीदो को पूरा होना अच्छा लगता है, जागी रात के बाद का सोना अच्छा लगता है। बादल को सामर्थ्य मिले हारियाली का, बूँद – बूँद कर बारिस होना अच्छा लगता है।।” लोगो को सोचने पर मजबूर कर दिया। कवि सम्मेलन में खेल गांव इन्टर नेशनल पब्लिक स्कूल की प्राध्यापिका रेनू मिश्रा, शायर सबरेज अहमद, युवा गीतकार शिवम भगवती, कवि चन्द्र भूषण तिवारी चन्द्र ने कई बेहतरीन प्रस्तुतिया देकर सभी को अनांदित किया। कवि सम्मेलन का बेहतरीन संचालन डा पीयूष मिश्र पीयूष ने किया। सभी का स्वागत रामगढ़ पर्यटन विकास ट्रस्ट के अध्यक्ष इन्द्र भान सिंह व महासचिव सचिन सिंह ने किया। आभार महंत नन्द लाल दास जी महराज ने किया।
इस अवसर पर यमुनापार विकास समिति के अध्यक्ष गजेन्द्र प्रताप सिंह, पंडित दिनेश तिवारी, इन्द्र सेन सिंह, हंसराज पटेल, सीता राम आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।



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