लोकमित्र ब्यूरो
थरवई (प्रयागराज)। भागवत कथा के श्रवण से भक्तों का कल्याण होता है और उनका जीवन धन्य हो जाता है। उक्त बातें कथावाचक पंडित करुणा शंकर ओझा कमल ने अपने मुखारविंद से कहा। उन्होंने गंगा तिवारी का पूरा नसीरपुर बाबा चौराहे के समीप स्थित गांव में पंडित राजाराम तिवारी के पैतृक निवास पर श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन कथावाचक महाराज जी ने सुदामा चरित्र परीक्षित मोक्ष पर बहुत ही विस्तार से कथा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि श्रीमद् भागवत कथा के नियमित सात दिन कथा के श्रवण मात्र से जीवो का उद्धार हो जाता है। सुदामा जी के पास भगवान श्री कृष्ण के नाम का धन था। संसार की दृष्टि में सुदामा गरीब थे, लेकिन दरिद्र नहीं थे। अपने जीवन में सुदामा किसी से कुछ मांगे नहीं। पत्नी सुशीला के बार बार कहने के बाद अपने मित्र श्री कृष्ण से मिलने के लिए गए। भगवान श्री कृष्ण के पास जाकर भी कुछ नहीं मांगे। भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं सब कुछ दे दिया। सुदामा चरित्र के माध्यम से भक्तों के सामने दोस्ती की मिसाल पेश करते हुए समाज में समानता का संदेश दिया। उन्होंने भक्तों से भागवत कथा को अपने जीवन में उतारने की बात कही। सात दिन की कथा श्रवण करने से जीव का कल्याण हो जाता है। इस अवसर पर मुख्य यजमान पंडित राजाराम त्रिपाठी एवं श्रीमती गुलाब त्रिपाठी व संजीव त्रिपाठी डीआईजी जेल शैलेंद्र त्रिपाठी, चंद्र त्रिपाठी, जितेंद्र त्रिपाठी, धर्मेंद्र त्रिपाठी, माधवेंद्र त्रिपाठी, वंदना त्रिपाठी, अंजू त्रिपाठी, कल्पना त्रिपाठी, अनीता त्रिपाठी, श्रेया त्रिपाठी, जानवी त्रिपाठी, वेदांत त्रिपाठी, शैल्या त्रिपाठी, आयुष त्रिपाठी, रिया मिश्रा व आयुषी त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में भक्त लोग मौजूद रहे।
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थरवई (प्रयागराज)। भागवत कथा के श्रवण से भक्तों का कल्याण होता है और उनका जीवन धन्य हो जाता है। उक्त बातें कथावाचक पंडित करुणा शंकर ओझा कमल ने अपने मुखारविंद से कहा। उन्होंने गंगा तिवारी का पूरा नसीरपुर बाबा चौराहे के समीप स्थित गांव में पंडित राजाराम तिवारी के पैतृक निवास पर श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन कथावाचक महाराज जी ने सुदामा चरित्र परीक्षित मोक्ष पर बहुत ही विस्तार से कथा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि श्रीमद् भागवत कथा के नियमित सात दिन कथा के श्रवण मात्र से जीवो का उद्धार हो जाता है। सुदामा जी के पास भगवान श्री कृष्ण के नाम का धन था। संसार की दृष्टि में सुदामा गरीब थे, लेकिन दरिद्र नहीं थे। अपने जीवन में सुदामा किसी से कुछ मांगे नहीं। पत्नी सुशीला के बार बार कहने के बाद अपने मित्र श्री कृष्ण से मिलने के लिए गए। भगवान श्री कृष्ण के पास जाकर भी कुछ नहीं मांगे। भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं सब कुछ दे दिया। सुदामा चरित्र के माध्यम से भक्तों के सामने दोस्ती की मिसाल पेश करते हुए समाज में समानता का संदेश दिया। उन्होंने भक्तों से भागवत कथा को अपने जीवन में उतारने की बात कही। सात दिन की कथा श्रवण करने से जीव का कल्याण हो जाता है। इस अवसर पर मुख्य यजमान पंडित राजाराम त्रिपाठी एवं श्रीमती गुलाब त्रिपाठी व संजीव त्रिपाठी डीआईजी जेल शैलेंद्र त्रिपाठी, चंद्र त्रिपाठी, जितेंद्र त्रिपाठी, धर्मेंद्र त्रिपाठी, माधवेंद्र त्रिपाठी, वंदना त्रिपाठी, अंजू त्रिपाठी, कल्पना त्रिपाठी, अनीता त्रिपाठी, श्रेया त्रिपाठी, जानवी त्रिपाठी, वेदांत त्रिपाठी, शैल्या त्रिपाठी, आयुष त्रिपाठी, रिया मिश्रा व आयुषी त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में भक्त लोग मौजूद रहे।



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