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पत्रकारिता जगत का चमकता सितारा लुप्त हो गया:वीरेंद्र सक्सेना

लखनऊ। वीरेंद्र सक्सेना पत्रकार एवं पूर्व सूचना आयुक्त ने कहा कि वरिष्ठ पत्रकार श्री वीर विक्रम बहादुर मिश्र के अचानक निधन का समाचार सुनकर मैं स्तब्ध हूं। श्री मिश्र मेरे 40 साल पुराने सहयोगी रहे ।मैंने और उन्होंने साथ साथ समाचार पत्र में
लेखन एवं रिपोर्टिंग का कार्य किया। बेहद विनम्र और मृदु स्वभाव के श्री मिश्र सदैव दूसरों की मदद करने का सतत प्रयास करते रहते थे। लेखन एवं साहित्य के क्षेत्र में तो वह पारंगत थे ही इसके साथ ही उनकी रूचि सदैव धार्मिक कार्यों में रही।वह रामायण के प्रखर ज्ञाता थे और कितनी ही बार उन्होंने मुझे रामायण के अंदर छुपे हुए भावों को बड़ी सरल भाषा में समझाया। वह बातों बातों में मुझसे सदैव यही कहते थे की दूसरों की खूबियां और अपनी बुराइयों को बहुत ध्यान से देखना चाहिए। उनका परमात्मा में अटूट विश्वास था और सदैव यही कहते थे कि जिसकी परमात्मा में आस्था है उसका कभी अहित तो हो ही नहीं सकता ।बेहद सादगी और सरल स्वभाव के मिश्रा जी को मैंने कभी किसी की बुराई करते नहीं सुना। वह एक दिव्य आत्मा थे उनके निधन से पत्रकारिता जगत का एक चमकता सितारा लुप्त हो गया है।

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लखनऊ। वीरेंद्र सक्सेना पत्रकार एवं पूर्व सूचना आयुक्त ने कहा कि वरिष्ठ पत्रकार श्री वीर विक्रम बहादुर मिश्र के अचानक निधन का समाचार सुनकर मैं स्तब्ध हूं। श्री मिश्र मेरे 40 साल पुराने सहयोगी रहे ।मैंने और उन्होंने साथ साथ समाचार पत्र में
लेखन एवं रिपोर्टिंग का कार्य किया। बेहद विनम्र और मृदु स्वभाव के श्री मिश्र सदैव दूसरों की मदद करने का सतत प्रयास करते रहते थे। लेखन एवं साहित्य के क्षेत्र में तो वह पारंगत थे ही इसके साथ ही उनकी रूचि सदैव धार्मिक कार्यों में रही।वह रामायण के प्रखर ज्ञाता थे और कितनी ही बार उन्होंने मुझे रामायण के अंदर छुपे हुए भावों को बड़ी सरल भाषा में समझाया। वह बातों बातों में मुझसे सदैव यही कहते थे की दूसरों की खूबियां और अपनी बुराइयों को बहुत ध्यान से देखना चाहिए। उनका परमात्मा में अटूट विश्वास था और सदैव यही कहते थे कि जिसकी परमात्मा में आस्था है उसका कभी अहित तो हो ही नहीं सकता ।बेहद सादगी और सरल स्वभाव के मिश्रा जी को मैंने कभी किसी की बुराई करते नहीं सुना। वह एक दिव्य आत्मा थे उनके निधन से पत्रकारिता जगत का एक चमकता सितारा लुप्त हो गया है।

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