प्रतापगढ़ । संडवाचंद्रिका क्षेत्र के मनोरथपुर गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा व्यास स्वामी ओमानंद जी महाराज ने श्री कृष्ण जन्म एवं उनकी लीलाओं का वर्णन किया और कहा कि पृथ्वी पर जब-जब धर्म की हानि होती है दुष्टों, पापियों और अधर्मियों की संख्या बढ़ती है तब -तब भगवान दुष्टों के संहार के लिए अवतरित होते हैं। आचार्य जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा लोक कल्याणकारी है जिसके सुनने मात्र से मनुष्य के समस्त पाप धुल जाते हैं और परमपद की प्राप्ति होती है। कथा जीवन की मुक्ति का मार्ग है। मनुष्य, जन्म के उपरांत कर्मों के अनुसार विभिन्न योनियों में भटकता रहता है किंतु श्रीमद्भागवत कथा के सुनने से वह विभिन्न योनियों में भटकने की बजाए जन्म- मृत्यु रूपी आवागमन के बंधन से मुक्त हो जाता है। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह कथा मनुष्य को सत्कर्म करने की ओर प्रेरित करती है एवं कर्तव्य बोध कराती है जिससे व्यक्ति मानवीय मूल्यों के साथ ही आध्यात्मिक एवं सामाजिक मूल्यों को न केवल जीवंत रखता है अपितु उसमें उत्तरोत्तर वृद्धि करता है। भागवत कथा, आदि- अनादि काल से प्रासंगिक रही है और आगे भी यह लोक कल्याण करती रहेगी।आचार्य जी ने कहा कि भगवान भक्ति एवं प्रेम के भूखे हैं।भक्तिभाव से जो कथा सुनता है उसके समस्त पाप व कष्ट दूर हो जाते हैं।कथा युवा चेतना मंच के अध्यक्ष ललित पांडे के संयोजन में आयोजित की गई है। कथा के मुख्य श्रोताओं में सावित्री पांडे, सुशील पांडे,डाॅ प्रशांत पांडे, कपिल पांडे, डॉ रिचा, सीता पांडे, वत्सला, भानु प्रताप पांडे, सुरेंद्र प्रसाद पांडे, डॉ छवि नारायण पांडे, संजय श्रीवास्तव, डाॅ अयोध्या प्रसाद पाण्डेय, प्रबंधक बीके अग्रवाल, आमोद दुबे, बीएन चौबे, डॉ ज्ञानेंद्र नाथ त्रिपाठी, हरिवंश तिवारी, तीर्थराज मिश्र, डॉ देवमणि तिवारी, रामचंद्र मिश्र, संतोष तिवारी, हरिश्चंद्र ओझा आदि उपस्थित रहे। कथा आयोजक सुशील पांडे ने बताया कि आगामी 14 अक्टूबर को पूर्णाहुति एवं 15 अक्टूबर को प्रसाद वितरण का आयोजन होगा।



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