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श्रीराम का जीवन ही सनातन धर्म का आधार

मानस सत्संग समारोह में बोले पंडित रामगोपाल तिवारी
पांती के सिद्ध हनुमान मंदिर परिसर में चल रहा 55वाँ मानस सम्मेलन
लोकमित्र ब्यूरो
मेजा (प्रयागराज)। पांती के श्री सिद्ध हनुमान मानस मंदिर में विराट मानस सत्संग समारोह में दूसरे दिन पंडित रामगोपाल तिवारी ने कहा ‘भगति तात अनुपम सुखमूला,, मिलई जो संत होई अनुकूला,, संत तुलसीदास ने मानस। की इस चौपाई से लोगों को भक्ति मार्ग का बोध कराया है। कहा प्रभु श्रीराम नाम जाप से सारे ताप और पाप दूर हो जाते हैं।  मानस वेत्ता तिवारी ने कथा प्रेमियों को भगवान की भक्ति और उनसे आत्मिक सम्बन्ध के लिए किसी संत या सद्गगुरु की जरूरत होती है। माध्यम के बिना भगवान की कृपा असंभव है ।श्री तिवारी ने कहा हनुमान जी सीता माता की खोज में लंका पहुंचे तो संत विभीषण के माध्यम से वह शक्ति सीता तक पहुंच सके थे । उन्होंने कहा कि सत्संग एवं भगवत कथा में  संत मिलना होना ही कल्याणकारी है। प्रयाग पीठाधीश्वर जगत गुरु रामानुजाचार्य ने कहा जब पाप के ताप से धरती बोझिल होती है तब भगवान का अवतरण होता है। भगवान का अवतरण ही अधर्म के नाश और धर्म स्थापना के लिए होता है। इसी क्रम में मानस मर्मज्ञ डॉ रामसूरत रामायणी ने कथा कहते हुए कहा भगवान श्री राम के लौकिक जीवन के आदर्श को हमारा समाज जीने की कोशिश करता है।प्रभु श्री राम को सनातन धर्म आदर्श मानकर पूजता है।संत तुलसीदास ने कहा है कि, जहां सुमति तहँ संम्पति नाना, जहाँ कुमति तहँ विपति निधाना। यह मान्य व्यवस्था है और इसी में सुख शांति है।

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मानस सत्संग समारोह में बोले पंडित रामगोपाल तिवारी
पांती के सिद्ध हनुमान मंदिर परिसर में चल रहा 55वाँ मानस सम्मेलन
लोकमित्र ब्यूरो
मेजा (प्रयागराज)। पांती के श्री सिद्ध हनुमान मानस मंदिर में विराट मानस सत्संग समारोह में दूसरे दिन पंडित रामगोपाल तिवारी ने कहा ‘भगति तात अनुपम सुखमूला,, मिलई जो संत होई अनुकूला,, संत तुलसीदास ने मानस। की इस चौपाई से लोगों को भक्ति मार्ग का बोध कराया है। कहा प्रभु श्रीराम नाम जाप से सारे ताप और पाप दूर हो जाते हैं।  मानस वेत्ता तिवारी ने कथा प्रेमियों को भगवान की भक्ति और उनसे आत्मिक सम्बन्ध के लिए किसी संत या सद्गगुरु की जरूरत होती है। माध्यम के बिना भगवान की कृपा असंभव है ।श्री तिवारी ने कहा हनुमान जी सीता माता की खोज में लंका पहुंचे तो संत विभीषण के माध्यम से वह शक्ति सीता तक पहुंच सके थे । उन्होंने कहा कि सत्संग एवं भगवत कथा में  संत मिलना होना ही कल्याणकारी है। प्रयाग पीठाधीश्वर जगत गुरु रामानुजाचार्य ने कहा जब पाप के ताप से धरती बोझिल होती है तब भगवान का अवतरण होता है। भगवान का अवतरण ही अधर्म के नाश और धर्म स्थापना के लिए होता है। इसी क्रम में मानस मर्मज्ञ डॉ रामसूरत रामायणी ने कथा कहते हुए कहा भगवान श्री राम के लौकिक जीवन के आदर्श को हमारा समाज जीने की कोशिश करता है।प्रभु श्री राम को सनातन धर्म आदर्श मानकर पूजता है।संत तुलसीदास ने कहा है कि, जहां सुमति तहँ संम्पति नाना, जहाँ कुमति तहँ विपति निधाना। यह मान्य व्यवस्था है और इसी में सुख शांति है।

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