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गांधी और शास्त्री की आधुनिक प्रासंगिकता : परिचर्चा

प्रतापगढ़ । अखिल भारतीय स्वतंत्र लेखक मंच की प्रतापगढ़ इकाई द्वारा अचलपुर स्थित स्थानीय कार्यालय पर एक परिचर्चा आयोजित की गई । विषय था – ” गांधी और शास्त्री की आधुनिक प्रासंगिकता ” । परिचर्चा की अध्यक्षता स्लेम  अध्यक्ष डॉ. सुभाष श्रीवास्तव ने की । शामिल साहित्यकारों के वक्तव्य निचोड़ में कहा गया कि दो अक्टूबर को दो महान अमर विभूति की जयंती मनाई जाती है। प्रतिवर्ष हम भारतीय अत्यंत श्रद्धा से उन्हें नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं । और उनके आदर्शो का स्मरण करते हुए उनका अनुसरण करने को प्रतिबद्ध होते हैं ।
 इस दिन देश के अलावा विदेशी श्रद्धालु भी समाधिस्थल पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं । देश भर में  सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा  उनके बताए हुए कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं । दोनों ही अमर सपूतों का हमारे देश के निर्माण में महान योगदान है । ये सदैव देश हित के लिए जीते रहे । जनहित ही इनके जीवन का उद्देश्य था । अंग्रेज़ों को भगाया और स्वदेशी में जीना सिखाया । आजादी और   आत्म निर्भरता उनका सपना था । हस्त उद्योग को बढ़ावा दिया । गांधी जी ने बताया कि अहिंसा से मानवता जिंदा रहती है । शास्त्री जी ने जय जवान जय किसान का नारा दिया । किसानों के हित के लिए वह हमेशा आगे रहे । उनका ईमानदारी युक्त , त्यागमय जीवन वर्तमान परिदृश्य के भारतीय राजनीतिज्ञों के लिए आदर्श और प्रेरणा स्वरूप है । इनके विचार देश के भावी पीढ़ियों के लिए वरदान हैं । पुनश्च गांधी जी और शास्त्री जी की जयंती पर दोनों महान विभूति को कोटिश: प्रणाम । परिचर्चा में भाग लेने वालों में डा.विशाल , डा.सुभाषश्रीवास्तव , डा. करूणेश शर्मा , विमलेश , अजय कटियार , गंगेश , राजेश, विभूति पाल , राजेंद्र प्रसाद , रिंकू , और ज्ञानेश आदि सम्मिलित हुए ।

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प्रतापगढ़ । अखिल भारतीय स्वतंत्र लेखक मंच की प्रतापगढ़ इकाई द्वारा अचलपुर स्थित स्थानीय कार्यालय पर एक परिचर्चा आयोजित की गई । विषय था – ” गांधी और शास्त्री की आधुनिक प्रासंगिकता ” । परिचर्चा की अध्यक्षता स्लेम  अध्यक्ष डॉ. सुभाष श्रीवास्तव ने की । शामिल साहित्यकारों के वक्तव्य निचोड़ में कहा गया कि दो अक्टूबर को दो महान अमर विभूति की जयंती मनाई जाती है। प्रतिवर्ष हम भारतीय अत्यंत श्रद्धा से उन्हें नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं । और उनके आदर्शो का स्मरण करते हुए उनका अनुसरण करने को प्रतिबद्ध होते हैं ।
 इस दिन देश के अलावा विदेशी श्रद्धालु भी समाधिस्थल पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं । देश भर में  सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा  उनके बताए हुए कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं । दोनों ही अमर सपूतों का हमारे देश के निर्माण में महान योगदान है । ये सदैव देश हित के लिए जीते रहे । जनहित ही इनके जीवन का उद्देश्य था । अंग्रेज़ों को भगाया और स्वदेशी में जीना सिखाया । आजादी और   आत्म निर्भरता उनका सपना था । हस्त उद्योग को बढ़ावा दिया । गांधी जी ने बताया कि अहिंसा से मानवता जिंदा रहती है । शास्त्री जी ने जय जवान जय किसान का नारा दिया । किसानों के हित के लिए वह हमेशा आगे रहे । उनका ईमानदारी युक्त , त्यागमय जीवन वर्तमान परिदृश्य के भारतीय राजनीतिज्ञों के लिए आदर्श और प्रेरणा स्वरूप है । इनके विचार देश के भावी पीढ़ियों के लिए वरदान हैं । पुनश्च गांधी जी और शास्त्री जी की जयंती पर दोनों महान विभूति को कोटिश: प्रणाम । परिचर्चा में भाग लेने वालों में डा.विशाल , डा.सुभाषश्रीवास्तव , डा. करूणेश शर्मा , विमलेश , अजय कटियार , गंगेश , राजेश, विभूति पाल , राजेंद्र प्रसाद , रिंकू , और ज्ञानेश आदि सम्मिलित हुए ।

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