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शिक्षकों को बदनाम करने से जिम्मेदार बाज आएं – विनोद मिश्र

एमडीएम योजना संचालन में प्रधान व प्रधानाध्यापक दोनों जिम्मेदार
प्रदेश सरकार की योजनाओं से स्कूलों का हो रहा कायाकल्प
लोकमित्र ब्यूरो
मेजा (प्रयागराज)। प्रदेश सरकार ने कायाकल्प योजना के जरिए परिषदीय विद्यालयों को व्यवस्थित करने के गम्भीर प्रयास शुरू किए हैं। इसके लिए पंचायतों को स्कूली व्यवस्था से जुड़े 19 पैरामीटर तय किए गए हैं। शिक्षक नेता विनोद मिश्र ने कहा कि क्षेत्र के केवटाही स्कूल में एमडीएम का विवाद दुर्भाग्यपूर्ण है। इसकी जिम्मेदारी प्रधान और प्रधानाध्यपक दोनों की है।प्रधानों को शिक्षकों को बदनाम करने की सोच से बाहर आना होगा    प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिला उपाध्यक्ष विनोद मिश्र ने कहा एक शिक्षक होने के नाते मुझे पता है कि विद्यालय की कम्पोजिट ग्राण्ट से दैनिक और आकस्मिक आवश्यकताएँ ही पूरी की जा सकती हैं। प्रधान की जिम्मेदारी को भी हम समझते हैं, लेकिन  क्षेत्र के केवटाही स्कूल में एमडीएम विवाद दुर्भाग्य पूर्ण है।उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत गौरा चौकठा में संचालित प्राथमिक विद्यालय केवटाही में प्रधान और शिक्षकों के तथाकथित विवाद प्रकरण में शिक्षक संघ से जुड़े होने के नाते मैं इतना कह सकता हूं कि शिक्षक अपना दायित्व बखूबी निभा रहे हैं।
गांव की राजनीति को इससे दूर रखा जाना चाहिए।एमडीएम योजना से शिक्षक या प्रधान पल्ला नही झाड़ सकता है।एक शिक्षक जो सम्मानित और पवित्र पेशे से जुड़ा है वह बच्चों के जीवन के साथ कभी ओछी हरकत नही कर सकता। इसलिए राजनीति के लिए बेवजह बात को तूल नहीं दिया जाना चाहिए।श्री मिश्र ने बताया कि महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरण आनन्द के निर्देशन में परिषदीय विद्यालयों के शैक्षिक और भौतिक वातावरण में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहा है। परिषदीय विद्यालयों को सजाने सँवारने में अब विद्यालय प्रशासन के साथ-साथ ग्राम पंचायतों की भी बड़ी भूमिका है। सरकार द्वारा कायाकल्प योजना लागू कर ग्राम पंचायतों की जवाबदेही भी तय की गयी है। प्रधान व शिक्षक एक दूसरे के पूरक हैं और संयोजन से ही शिक्षा सुधार को गति दी जा सकती है।

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एमडीएम योजना संचालन में प्रधान व प्रधानाध्यापक दोनों जिम्मेदार
प्रदेश सरकार की योजनाओं से स्कूलों का हो रहा कायाकल्प
लोकमित्र ब्यूरो
मेजा (प्रयागराज)। प्रदेश सरकार ने कायाकल्प योजना के जरिए परिषदीय विद्यालयों को व्यवस्थित करने के गम्भीर प्रयास शुरू किए हैं। इसके लिए पंचायतों को स्कूली व्यवस्था से जुड़े 19 पैरामीटर तय किए गए हैं। शिक्षक नेता विनोद मिश्र ने कहा कि क्षेत्र के केवटाही स्कूल में एमडीएम का विवाद दुर्भाग्यपूर्ण है। इसकी जिम्मेदारी प्रधान और प्रधानाध्यपक दोनों की है।प्रधानों को शिक्षकों को बदनाम करने की सोच से बाहर आना होगा    प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिला उपाध्यक्ष विनोद मिश्र ने कहा एक शिक्षक होने के नाते मुझे पता है कि विद्यालय की कम्पोजिट ग्राण्ट से दैनिक और आकस्मिक आवश्यकताएँ ही पूरी की जा सकती हैं। प्रधान की जिम्मेदारी को भी हम समझते हैं, लेकिन  क्षेत्र के केवटाही स्कूल में एमडीएम विवाद दुर्भाग्य पूर्ण है।उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत गौरा चौकठा में संचालित प्राथमिक विद्यालय केवटाही में प्रधान और शिक्षकों के तथाकथित विवाद प्रकरण में शिक्षक संघ से जुड़े होने के नाते मैं इतना कह सकता हूं कि शिक्षक अपना दायित्व बखूबी निभा रहे हैं।
गांव की राजनीति को इससे दूर रखा जाना चाहिए।एमडीएम योजना से शिक्षक या प्रधान पल्ला नही झाड़ सकता है।एक शिक्षक जो सम्मानित और पवित्र पेशे से जुड़ा है वह बच्चों के जीवन के साथ कभी ओछी हरकत नही कर सकता। इसलिए राजनीति के लिए बेवजह बात को तूल नहीं दिया जाना चाहिए।श्री मिश्र ने बताया कि महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरण आनन्द के निर्देशन में परिषदीय विद्यालयों के शैक्षिक और भौतिक वातावरण में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहा है। परिषदीय विद्यालयों को सजाने सँवारने में अब विद्यालय प्रशासन के साथ-साथ ग्राम पंचायतों की भी बड़ी भूमिका है। सरकार द्वारा कायाकल्प योजना लागू कर ग्राम पंचायतों की जवाबदेही भी तय की गयी है। प्रधान व शिक्षक एक दूसरे के पूरक हैं और संयोजन से ही शिक्षा सुधार को गति दी जा सकती है।

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