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कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद के जन्म जयंती पर लायंस क्लब प्रतापगढ़ हर्ष के पदाधिकारियों एवं सदस्यों द्वारा उनकी मूर्ति को धुलकर माल्यार्पण किया गया

प्रतापगढ़ ।  कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद के जन्म जयंती पर लायंस क्लब प्रतापगढ़ हर्ष के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने राजकीय इंटर कॉलेज प्रतापगढ़ में स्थापित मूर्ति पर  सुबह 9:00 बजे पहुंचकर सर्वप्रथम उनकी मूर्ति स्थल एवं मूर्ति को धुलकर साफ़ किया गया तत्पश्चात माल्यार्पण कर उन्हें याद किया गया लायन डॉ श्याम शंकर शुक्ला ने 31 जुलाई 1880 को वाराणसी जिले की लंमहि  गांव में एक  कायस्थ परिवार में जन्मे मुंशी प्रेमचंद को याद करते हुए कहा कि उनकी कहानियां उपन्यास हिंदी जगत की धरोहर है जिसके कारण उन्हें कथा सम्राट के नाम से युगो युगो तक स्मरण करते रहेंगे, वे प्रतापगढ़ के राजकीय कालेज में 1900 से 1904 तक शिक्षक भी रहे,लायंस क्लब के अध्यक्ष लायन अश्वनी सिंह ने कहा कि लमही में जन्मे मुंशी प्रेमचंद्र ने अपने पिता मुंशी अजायब राय एवं माता आनंदी देवी की गोद  को अमर कर दिया,लायन संतोष भगवन ने कहा मुंशी प्रेमचंद्र हिंदी जगत का ऐसा सितारा है जो अपने कहानी एवं उपन्यास के लिए सदैव सर्वोपरि स्थान पाते रहेंगे, विचार एवं माल्यार्पण करने वालों में डॉ क्षितिज कुमार श्रीवास्तव, सतीश शर्मा, राजेश पाल, संदीप श्रीवास्तव, कुंवर बहादुर सिंह आदि लोग उपस्थित रहे

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प्रतापगढ़ ।  कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद के जन्म जयंती पर लायंस क्लब प्रतापगढ़ हर्ष के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने राजकीय इंटर कॉलेज प्रतापगढ़ में स्थापित मूर्ति पर  सुबह 9:00 बजे पहुंचकर सर्वप्रथम उनकी मूर्ति स्थल एवं मूर्ति को धुलकर साफ़ किया गया तत्पश्चात माल्यार्पण कर उन्हें याद किया गया लायन डॉ श्याम शंकर शुक्ला ने 31 जुलाई 1880 को वाराणसी जिले की लंमहि  गांव में एक  कायस्थ परिवार में जन्मे मुंशी प्रेमचंद को याद करते हुए कहा कि उनकी कहानियां उपन्यास हिंदी जगत की धरोहर है जिसके कारण उन्हें कथा सम्राट के नाम से युगो युगो तक स्मरण करते रहेंगे, वे प्रतापगढ़ के राजकीय कालेज में 1900 से 1904 तक शिक्षक भी रहे,लायंस क्लब के अध्यक्ष लायन अश्वनी सिंह ने कहा कि लमही में जन्मे मुंशी प्रेमचंद्र ने अपने पिता मुंशी अजायब राय एवं माता आनंदी देवी की गोद  को अमर कर दिया,लायन संतोष भगवन ने कहा मुंशी प्रेमचंद्र हिंदी जगत का ऐसा सितारा है जो अपने कहानी एवं उपन्यास के लिए सदैव सर्वोपरि स्थान पाते रहेंगे, विचार एवं माल्यार्पण करने वालों में डॉ क्षितिज कुमार श्रीवास्तव, सतीश शर्मा, राजेश पाल, संदीप श्रीवास्तव, कुंवर बहादुर सिंह आदि लोग उपस्थित रहे

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