समन्वय समिति की बैठक नहीं होने तक न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे अधिवक्ता
लोकमित्र ब्यूरो
मेजा (प्रयागराज)। उपजिलाधिकारी मेजा विनोद कुमार पांडेय द्वारा न्यायिक कार्य मे वेवजह देरी से खफा बार पदाधिकारियों ने मोर्चा खोल दिया है। अधिवक्ताओं की मांग पर समन्वय समिति से कन्नी काट चुके उपजिलाधिकारी और तहसीलदार के रवैये से ब्रेंच और बार मे खटास बढ़ने की उम्मीद है।अधिवक्ताओं ने बुधवार को फरमान जारी किया है कि जब तक बार ब्रेंच की बैठक नहीं होगी,उस वक्त तक न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे। उप जिलाधिकारी मेजा विनोद कुमार पांडे का मातहतों पर अंकुश नही होने तथा तहसीलदार गजराज सिंह यादव के तहसील मुख्यालय से निरंतर दूर रहने के कारण वादकारी न्याय के लिए भटक रहे हैं। अधिकारियों के रवैये से अधिवक्ता और वादकारी दोनो जूझ रहे हैं और दोहरी मार झेलने के लिए मजबूर है।तहसील के लंबित मामलों की फाइलें की संख्या प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। राजस्व के रिकार्ड की जांच की जाय तो लम्बित मामलों की संख्या हाल के छह महीने में तेजी से बढ़ी है। फरियादियों को टरकाने के लिए एसडीएम “नि.आ. का एवं शांति बहाल रखे जैसे तकिया कलाम आदेश कर रहे हैं। को लेकर स्पष्ट आदेश के अभाव में फरियादी कानूनगो एवं लेखपाल को ढूंढ रहे हैं। मामले को टालने से जमीन और रास्ता पर अवैध कब्जा पूरी तरह हो जाता है। बार अध्यक्ष उमाकांत मिश्र ने बताया कि तहसील दार मेजा का न्यायालय एवं कार्यालय विगत 22 दिन से लगातार बंद चल रहा है। प्राइवेट मुंशी आकर तारीख दे जाता है। तहसील मुख्यालय से दूर गेस्ट हाउस से शासन की सूचना आईजीआरएस निस्तारण एवं शासन की चिट्ठी का निस्तारण चन्द वकीलों के साथ तहसील छोड़ने के उपरांत देर रात्रि में किया जा रहा है। दाखिल खारिज भी बैक डेट में करके वसूली जारी है।एसडीएम के विरुद्ध वकीलों की घोषित हड़ताल जारी है।तहसील में साधारण फाइलों का अंबार लगा हुआ है। दो सौ से अधिक फाइलों में अनावश्यक कमेंट कर प्रकरण को उलझाया गया है तहसील में अधिकारी मिलेंगे नहीं तो निस्तारण का सवाल ही नहीं उठता।आरोप है कि शासन की चिट्ठी का जवाब भेजकर अधिकारी मौज कर रहे हैं। कई गड़बड़ियों पर खुली चर्चा की मांग की गई है। बैठक में सतीश चंद्र दुबे ,जीएम दुबे ,एस पी, मिश्रा आनंद पांडे, ओम प्रकाश, पूर्व मंत्री नरेंद्र त्रिपाठी, संतोष मिश्रा, कमलेश मिश्रा, हरिशंकर मिश्र, अतुल वैभव द्विवेदी, चंद्र शुक्ला जटाशंकर शुक्ला, पूर्व अध्यक्ष दुर्गेश तिवारी, के पी पटेल ,ओंकार पाल, राजेश गुप्ता सहित दर्जनों अधिवक्ता मौजूद रहे।



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