कौशाम्बी। नगर पालिका परिषद भरवारी के नेता नगर मोहल्ले में रहने वाले करीब 30 परिवारों को आवास की दरकार है। आवेदन कि बाद भी इन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी का लाभ नहीं मिल पाया है। सभी कच्चे घर में रहने को मजबूर हैं। बारिश में कच्चा मकान ढहा तो हादसा भी हो सकता है। भरवारी के नेता नगर मोहल्ले की आबादी करीब ढाई हजार है। यहां आर्थिक रूप से मजबूत लोगों ने तो अपना पक्का मकान बनवा लिया है। जिनकी माली हालत ठीक नहीं है, वे कच्चे आशियाने में जीवन यापन करने को विवश हैं। कोई तिरपाल डालकर रह रहा है तो कोई खपरैल। तकरीबन 30 परिवारों के मुखिया का कहना है कि उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के लिए महीनों पहले आवेदन किया था। अभी तक योजना का लाभ नहीं मिल सका है। नगर पालिका कार्यालय का चक्कर काटते-काटते पांव थक गए हैं। नगर पालिका के जिम्मेदार किसी भी सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं देते हैं। डूडा कार्यालय जाओ तो वहां अधिकारी मिलते ही नहीं है।
कौशाम्बी। नगर पालिका परिषद भरवारी के नेता नगर मोहल्ले में रहने वाले करीब 30 परिवारों को आवास की दरकार है। आवेदन कि बाद भी इन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी का लाभ नहीं मिल पाया है। सभी कच्चे घर में रहने को मजबूर हैं। बारिश में कच्चा मकान ढहा तो हादसा भी हो सकता है। भरवारी के नेता नगर मोहल्ले की आबादी करीब ढाई हजार है। यहां आर्थिक रूप से मजबूत लोगों ने तो अपना पक्का मकान बनवा लिया है। जिनकी माली हालत ठीक नहीं है, वे कच्चे आशियाने में जीवन यापन करने को विवश हैं। कोई तिरपाल डालकर रह रहा है तो कोई खपरैल। तकरीबन 30 परिवारों के मुखिया का कहना है कि उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के लिए महीनों पहले आवेदन किया था। अभी तक योजना का लाभ नहीं मिल सका है। नगर पालिका कार्यालय का चक्कर काटते-काटते पांव थक गए हैं। नगर पालिका के जिम्मेदार किसी भी सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं देते हैं। डूडा कार्यालय जाओ तो वहां अधिकारी मिलते ही नहीं है।



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