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साकार होता भारतीय जनसंघ के संस्थापक डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना

आज भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर एक गोष्ठी का आयोजन भाजपा कार्यालय पर किया गया जिसका संचालन जिला उपाध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव ने किया मुख्य अतिथि नागेंद्र रघुवंशी जिला प्रभारी रहे और अध्यक्षता हरिओम मिश्र ने किया गोष्ठी को संबोधित करते हुए नागेंद्र रघुवंशी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को भारतीय संविधान के अंतर्गत लाने के तीन वर्ष पूरे होने को हैं। जम्मू-कश्मीर को भारतीय संविधान के दायरे में लाने और देश में औद्योगिक विकास की राह तैयार करने में डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। जम्मू-कश्मीर को भारतीय संविधान के दायरे में लाने और एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान (झंडा) के विरोध में सबसे पहले आवाज उठाने वाले भारतीय जनसंघ के संस्थापक डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का आज बलिदान दिवस है। उनका यह स्वप्न स्वतंत्रता प्राप्ति के सात दशक बाद तब पूरा हुआ जब नरेन्द्र मोदी सरकार ने वर्ष 2019 में संसद में संविधान के अनुच्छेद 370 एवं 35ए को समाप्त करने का विधेयक पारित कराया। इसके बाद ही जम्मू-कश्मीर भारत देश का सही मायनों में अभिन्न अंग बना। हरिओम मिश्र जिलाध्यक्ष भाजपा ने कहा कि डा. मुखर्जी स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व ही भारत विभाजन के खिलाफ थे और उन्होंने संविधान सभा की बैठकों में भी अपने विचारों को काफी प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया था। लेकिन जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय को लेकर कांग्रेस नेताओं और तत्कालीन सरकार के सोच के साथ वह कभी एकमत नहीं थे। वह पहले ही दिन से जम्मू-कश्मीर को भारतीय संविधान की सीमाओं के अंतर्गत लाने के पक्षधर थे। इसे संघर्ष की सीमा तक ले जाने की शुरुआत अप्रैल 1952 में तब हुई जब जम्मू-कश्मीर की प्रजा परिषद पार्टी के नेता पंडित प्रेमनाथ डोगरा नई दिल्ली में उनसे मुलाकात करने आए। डोगरा ने डा. मुखर्जी से राज्य में चल रहे इस आंदोलन में भाग लेने का आग्रह किया। डा. मुखर्जी ने डोगरा को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से मिलकर अपना पक्ष रखने को कहा। लेकिन इसे विडंबना कहें या कांग्रेस की तत्कालीन सरकार का अड़ियल रवैया, डोगरा को अपनी बात रखने के लिए नेहरू से मिलने का समय नहीं मिला। गोष्ठी में प्रमुख रूप से निवर्तमान जिला अध्यक्ष ओम प्रकाश त्रिपाठी महामंत्री आशीष श्रीवास्तव राजेश सिंह पवन गौतम, अशोक सरोज जिला उपाध्यक्ष सतीश चौरसिया पंकज सिंह देवेश त्रिपाठी गजराज सिंह रजत सक्सेना विद्यासागर शुक्ला टिशू शुक्ला नवीन सिंह,पूनम इंसान, राघवेंद्र शुक्ला अशोक मिश्रा रुचि केशरवानी सुशीला सरोज छोटे सरकार विजय मिश्रा रामजी मिश्र पंकज मिश्र गुड्डू पांडे सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे
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आज भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर एक गोष्ठी का आयोजन भाजपा कार्यालय पर किया गया जिसका संचालन जिला उपाध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव ने किया मुख्य अतिथि नागेंद्र रघुवंशी जिला प्रभारी रहे और अध्यक्षता हरिओम मिश्र ने किया गोष्ठी को संबोधित करते हुए नागेंद्र रघुवंशी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को भारतीय संविधान के अंतर्गत लाने के तीन वर्ष पूरे होने को हैं। जम्मू-कश्मीर को भारतीय संविधान के दायरे में लाने और देश में औद्योगिक विकास की राह तैयार करने में डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। जम्मू-कश्मीर को भारतीय संविधान के दायरे में लाने और एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान (झंडा) के विरोध में सबसे पहले आवाज उठाने वाले भारतीय जनसंघ के संस्थापक डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का आज बलिदान दिवस है। उनका यह स्वप्न स्वतंत्रता प्राप्ति के सात दशक बाद तब पूरा हुआ जब नरेन्द्र मोदी सरकार ने वर्ष 2019 में संसद में संविधान के अनुच्छेद 370 एवं 35ए को समाप्त करने का विधेयक पारित कराया। इसके बाद ही जम्मू-कश्मीर भारत देश का सही मायनों में अभिन्न अंग बना। हरिओम मिश्र जिलाध्यक्ष भाजपा ने कहा कि डा. मुखर्जी स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व ही भारत विभाजन के खिलाफ थे और उन्होंने संविधान सभा की बैठकों में भी अपने विचारों को काफी प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया था। लेकिन जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय को लेकर कांग्रेस नेताओं और तत्कालीन सरकार के सोच के साथ वह कभी एकमत नहीं थे। वह पहले ही दिन से जम्मू-कश्मीर को भारतीय संविधान की सीमाओं के अंतर्गत लाने के पक्षधर थे। इसे संघर्ष की सीमा तक ले जाने की शुरुआत अप्रैल 1952 में तब हुई जब जम्मू-कश्मीर की प्रजा परिषद पार्टी के नेता पंडित प्रेमनाथ डोगरा नई दिल्ली में उनसे मुलाकात करने आए। डोगरा ने डा. मुखर्जी से राज्य में चल रहे इस आंदोलन में भाग लेने का आग्रह किया। डा. मुखर्जी ने डोगरा को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से मिलकर अपना पक्ष रखने को कहा। लेकिन इसे विडंबना कहें या कांग्रेस की तत्कालीन सरकार का अड़ियल रवैया, डोगरा को अपनी बात रखने के लिए नेहरू से मिलने का समय नहीं मिला। गोष्ठी में प्रमुख रूप से निवर्तमान जिला अध्यक्ष ओम प्रकाश त्रिपाठी महामंत्री आशीष श्रीवास्तव राजेश सिंह पवन गौतम, अशोक सरोज जिला उपाध्यक्ष सतीश चौरसिया पंकज सिंह देवेश त्रिपाठी गजराज सिंह रजत सक्सेना विद्यासागर शुक्ला टिशू शुक्ला नवीन सिंह,पूनम इंसान, राघवेंद्र शुक्ला अशोक मिश्रा रुचि केशरवानी सुशीला सरोज छोटे सरकार विजय मिश्रा रामजी मिश्र पंकज मिश्र गुड्डू पांडे सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे
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