उत्तराखण्ड श्रद्धालुओं की स्मृति में कवि सम्मेलन में गूंजा राष्ट्रीयता का सुर
लालगंज, प्रतापगढ़। उत्तराखण्ड में हुई त्रासदी के श्रद्धालुओं की पुण्य स्मृति में क्षेत्र के रायपुर तियांई स्थित अमन विहार में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ संयोजक साहित्यकार एवं संयुक्त अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष रामलगन यादव तथा वरिष्ठ कवि आचार्य अनीस देहाती ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। रायबरेली के कवि खलील फरीदी ने पढ़ा-यहां के फूल कांटे क्या हर एक पत्ती मे खुशबू है, ये भारत है यहां की दोस्तों मिटटी मे खुशबू है पर श्रोताओं की जमकर तालियां गूंजी। नवोदित कवि कौस्तुभ राज ने भी तू पहले खुद को ढूंढ फिर दुनिया तुझे ढूंढेगी की रचना से भी जन चेतना जागृत करते दिखे। रायबरेली के ही श्याम मनमौजी की पंक्तियां यह दिन था जो आप सब पर आ जाता है भी सराही गयी। लालमणि की रचना लेखनी तू लेख लिख तू लेखनी है को भी जबरदस्त समर्थन नजर आया। संयोजक कवि रामलगन यादव आशीष ने पढ़ा-कोई भूखा पियासा न नंगा रहे, न कभी देश मे फिर दंगा रहे। सांस टूटे कभी जब हमारी प्रभो, तब मेरे हाथ मेरा तिरंगा रहे को भी सुनकर श्रोता राष्ट्रीयता की रंगत में झूम उठे। अध्यक्षीय कवि आचार्य अनीस देहाती की यह पंक्तियां- मैं तो कहता हूं इंसानियत का हामी जो, धीर की वीर की बांके कबीर की दुनिया पर भी तालियां बजी। वहीं नरेन्द्र निराश, सत्येंद्र सिंह सौम्य, सुरेश अकेला, फैयाज परवारा, डा. अम्बिकेश त्रिपाठी की भी रचनाएं ने कवि सम्मेलन को ऊंचाईयां प्रदान करती दिखी। कार्यक्रम में सपा नेता रामधन यादव, वरिष्ठ अधिवक्ता कालिका प्रसाद पाण्डेय, प्रवीण यादव, राजेश कुमार वर्मा, बाबूलाल सरोज, पारसनाथ सरोज ने अपने संबोधन मे उत्तराखण्ड त्रासदी में मृतक श्रद्धालुओं को पुष्पांजलि अर्पित की। प्रारम्भ मे प्रधान ओमप्रकाश यादव ने स्वागत भाषण तथा बीडीसी ज्ञानप्रकाश वर्मा ने आभार प्रदर्शन किया। इस मौके पर रमेश कुमार वर्मा, राकेश पाण्डेय, सुभाषचंद्र यादव, सुरेश यादव, हनुमत सिंह, कामता प्रकाश यादव, संतोष भारती, अजीत यादव, राम बहादुर यादव आदि रहे।



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