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गंगा दशहरा उत्सव के रूप में मनाया गया।

राष्ट्रीय परशुराम सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदीप शुक्ल   के नेतृत्व एवम युवा समाज सेवी संतोष मिश्र के सयोजकत्व  में गंगा दशहरा  के पावन पर्व की पूर्व संध्या पर  शनिदेव धाम स्थित बकुलाई नदी तट पर पर  2100 दीपक जलाकर घाटों को रोशन किया गया ।  कार्यक्रम के ब्यवस्थापक अवनीश पांडेय सूरज एवम सागर शुक्ल पूर्व प्रधान मंदिर के महन्थ  मंगलाचरण के साथ  मंत्रोचार एवम संख ध्वनि के साथ आरती की। वहाँ का मनोरम दृश्य देखते ही बन रहा था। शनिदेव धाम के नदी तट को देखकर  ऐसा लग रहा था  । जैसे वास्तव में  देवलोक  से देवताओं को धरती पर  आने के लिए दीपों की सीढ़ियां बनाई गई हो ।दूर से देखने पर ऐसा लग रहा था नदी के जल में आसमान से तारे उतर आये हो।
गंगा दशहरा मनाने की प्रथा का शुभारंभ प्रदीप शुक्ल द्वारा सन 2007 में माँ बेल्हादेवी मंदिर के मुख्य पुजारी राजा जी पंडा के सहयोग  से  101 दीप  जलाकर दीपदान कर आरती की गई। सन 2008 में  राजा जी पंडा , आशीष पाठक एवम  रबी गुप्ता जी के सहयोग  वृस्तृत रूप से माँ बेल्हादेवी धाम के सई तट पर दीपदान कर आरती की गई।आज आलम यह है कि श्रद्धालुओं में आस्था बढ़ती गई असंख्य दीप जलने लगे। जनपद के हर नदी  घाट पर दीप जलाने का  संकल्प प्रदीप शुक्ल द्वारा लिया गया था ।जो लगभग पूर्ण हो रहा है। सभी नदियों के घाटों को वहाँ के छेत्रीय  लोगों को दीप जलाने की जिम्मेदारी दी गई है। उक्त अवसर पर प्रमुख रूप से – अजय सिंह,ललन परिहार,अनुज मिश्र,अरुण उपाध्याय,पवन मिश्र,धीरज, शुभम , उत्कर्ष कुमार मिश्र सुमित,आशीष,अभिषेक ,यशस्वीअनुराग त्रिपाठी विनय तिवारी  ,राजेश चन्द्र ,दीपक पांडेय,विवेक साईं ,तरुण भट्ट, राघवेंद्र भट्ट, अंकुर पांडेय,आलोक आदि सैकड़ो भक्त उपस्थित रहे।

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राष्ट्रीय परशुराम सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदीप शुक्ल   के नेतृत्व एवम युवा समाज सेवी संतोष मिश्र के सयोजकत्व  में गंगा दशहरा  के पावन पर्व की पूर्व संध्या पर  शनिदेव धाम स्थित बकुलाई नदी तट पर पर  2100 दीपक जलाकर घाटों को रोशन किया गया ।  कार्यक्रम के ब्यवस्थापक अवनीश पांडेय सूरज एवम सागर शुक्ल पूर्व प्रधान मंदिर के महन्थ  मंगलाचरण के साथ  मंत्रोचार एवम संख ध्वनि के साथ आरती की। वहाँ का मनोरम दृश्य देखते ही बन रहा था। शनिदेव धाम के नदी तट को देखकर  ऐसा लग रहा था  । जैसे वास्तव में  देवलोक  से देवताओं को धरती पर  आने के लिए दीपों की सीढ़ियां बनाई गई हो ।दूर से देखने पर ऐसा लग रहा था नदी के जल में आसमान से तारे उतर आये हो।
गंगा दशहरा मनाने की प्रथा का शुभारंभ प्रदीप शुक्ल द्वारा सन 2007 में माँ बेल्हादेवी मंदिर के मुख्य पुजारी राजा जी पंडा के सहयोग  से  101 दीप  जलाकर दीपदान कर आरती की गई। सन 2008 में  राजा जी पंडा , आशीष पाठक एवम  रबी गुप्ता जी के सहयोग  वृस्तृत रूप से माँ बेल्हादेवी धाम के सई तट पर दीपदान कर आरती की गई।आज आलम यह है कि श्रद्धालुओं में आस्था बढ़ती गई असंख्य दीप जलने लगे। जनपद के हर नदी  घाट पर दीप जलाने का  संकल्प प्रदीप शुक्ल द्वारा लिया गया था ।जो लगभग पूर्ण हो रहा है। सभी नदियों के घाटों को वहाँ के छेत्रीय  लोगों को दीप जलाने की जिम्मेदारी दी गई है। उक्त अवसर पर प्रमुख रूप से – अजय सिंह,ललन परिहार,अनुज मिश्र,अरुण उपाध्याय,पवन मिश्र,धीरज, शुभम , उत्कर्ष कुमार मिश्र सुमित,आशीष,अभिषेक ,यशस्वीअनुराग त्रिपाठी विनय तिवारी  ,राजेश चन्द्र ,दीपक पांडेय,विवेक साईं ,तरुण भट्ट, राघवेंद्र भट्ट, अंकुर पांडेय,आलोक आदि सैकड़ो भक्त उपस्थित रहे।

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