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मन ही हमारे बंधन और मोक्ष का कारण है:अनुरागी जी महाराज

प्रतापगढ़। आध्यात्मिक योग मोक्ष का साधन है। मन ही हमारे बंधन और मोक्ष का कारण है। जब संत पुरुषों का संग होता है तो मन सतोगुण संयुक्त होकर भगवत चिंतन करता है जो ही मुक्ति का कारण भी बन जाता है। विक्रम पट्टी मे आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह समारोह में पं. शेषधर मिश्र ‘अनुरागी’ जी महाराज ने तृतीय दिवस की भागवत कथा में कपिल भगवान व माता देवहूति प्रसंग का वर्णन करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जब कर्म अथवा यज्ञ का उद्देश्य परमेश्वर के लिए होता है तो वह सफल होता है। कर्मों के उपभोक्ता तो वास्तव में ईश्वर ही है वही हमें कर्म फल प्रदान करते हैं। मनुष्य को अपने माता पिता, गुरु व अपने श्रेष्ठ का अपमान नहीं करना चाहिए। गुरु ज्ञान का दाता है, जो जीवन को परम लक्ष्य परमात्मा से मिलाता है। कथा के दौरान सैकडों भक्तगण मौजूद रहे।

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प्रतापगढ़। आध्यात्मिक योग मोक्ष का साधन है। मन ही हमारे बंधन और मोक्ष का कारण है। जब संत पुरुषों का संग होता है तो मन सतोगुण संयुक्त होकर भगवत चिंतन करता है जो ही मुक्ति का कारण भी बन जाता है। विक्रम पट्टी मे आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह समारोह में पं. शेषधर मिश्र ‘अनुरागी’ जी महाराज ने तृतीय दिवस की भागवत कथा में कपिल भगवान व माता देवहूति प्रसंग का वर्णन करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जब कर्म अथवा यज्ञ का उद्देश्य परमेश्वर के लिए होता है तो वह सफल होता है। कर्मों के उपभोक्ता तो वास्तव में ईश्वर ही है वही हमें कर्म फल प्रदान करते हैं। मनुष्य को अपने माता पिता, गुरु व अपने श्रेष्ठ का अपमान नहीं करना चाहिए। गुरु ज्ञान का दाता है, जो जीवन को परम लक्ष्य परमात्मा से मिलाता है। कथा के दौरान सैकडों भक्तगण मौजूद रहे।

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