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हुए अब्बास जब पैदा तो बोलीं सानिए ज़हरा!

हज़रत अब्बास की यौमे विलादत  पर जश्ने सब्रो वफा के उनवान पर सजाई शायरों ने महफिल
प्रयागराज। करबला के हुसैनी लश्कर के अलमबरदार हज़रत अब्बास की यौमे विलादत चार शाबान पर हर तरफ खुशियों और मसर्रत का माहौल तारी रहा। घरों मे खीर ज़रदा और तरहा तरहा के व्यंजन बना कर एक दूसरे के साथ खुशियाँ साझा की गईं। दरगाह हज़रत अब्बास को आकर्षक लाईटों और रंगबिरंगे कागज़ के फूलों से सजाया गया।दरगाह हज़रत अब्बास, इमामबारगाह गदा हुसैन दरियाबाद, करैली आज़ाद नगर मे अब्बास विला मे जश्ने सब्रो वफा के उनवान से आयोजक अब्बास गुड्डू की ओर से शायराना महफिल सजाई गई।
शफक़त अब्बास पाशा की निज़ामत मे शायरों हज़रत अब्बास की शान मे एक से बढ़ कर एक कलाम सुनाते हुए वाह वाही बटोरी। मौलाना सैय्यद अली गौहर साहब क़िबला ने हज़रत अब्बास की शुजाअत और वफा के क़िस्से सुनाते हुए अलमदारे हुसैनी की यौमे विलादत की मुबारकबाद पेश की। एक अन्य महफिल मे शायर इतरत नक़वी ने पढ़ा तीरगी को जो निगल ले वह वफा है अब्बास! तशनालब फिक्र की भरपूर ग़िज़ा है अब्बास!!
मौलाना व शायर आमिरुर रिज़वी ने कहा हुए अब्बास जब पैदा तो बोलीं सानिए ज़हरा! हुसैन इब्ने अली यह क़ूवते बाज़ू मुबारक हो!!
इसके अलावा डॉ०क़मर आब्दी, रुस्तम साबरी, जलाल फूलपूरी, फैज़ान वारसी ने अपने कलाम पर जमकर वाह वाही बटोरी।
बाद महफिल लज़ीज़ व्यंजनों का दस्तरख्वान सजा कर ग़ाज़ी अब्बास की नज़्र भी दिलाई गई। बड़ी संख्या मे शामिल अक़ीदतमन्दों ने नज़्रे अब्बास तबर्रुक के तौर पर ग्रहण किया। सभी की सेहत सलामती रिज़्क़ और मुल्के हिन्दूस्तान मे अमनो अमान और हर वबा से महफूज़ रखने की दूआ भी मांगी गई। कई जगहों मे महिलाओं की भी महफिल हुई जिसमे महिला शायरा और ज़ाकिरा ने बढ़ चढ़ कर विलादत मौला अब्बास की खुशियाँ साझा कीं। महफिल में आए हुए लोगों का महफिल आयोजक अब्बास गुड्डू ने शुक्रिया अदा किया।
इस मौक़े पर महमूद हैदर, ऐहसान रज़ा, सनी अब्बास, अली अब्बास, एस एम अहमद, हैदर अब्बास, इमदाद, सै०मो० अस्करी, शाहिद रिज़वी, ज़ामिन हसन, औन ज़ैदी, जॉन ज़ैदी आदि शामिल रहे।

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हज़रत अब्बास की यौमे विलादत  पर जश्ने सब्रो वफा के उनवान पर सजाई शायरों ने महफिल
प्रयागराज। करबला के हुसैनी लश्कर के अलमबरदार हज़रत अब्बास की यौमे विलादत चार शाबान पर हर तरफ खुशियों और मसर्रत का माहौल तारी रहा। घरों मे खीर ज़रदा और तरहा तरहा के व्यंजन बना कर एक दूसरे के साथ खुशियाँ साझा की गईं। दरगाह हज़रत अब्बास को आकर्षक लाईटों और रंगबिरंगे कागज़ के फूलों से सजाया गया।दरगाह हज़रत अब्बास, इमामबारगाह गदा हुसैन दरियाबाद, करैली आज़ाद नगर मे अब्बास विला मे जश्ने सब्रो वफा के उनवान से आयोजक अब्बास गुड्डू की ओर से शायराना महफिल सजाई गई।
शफक़त अब्बास पाशा की निज़ामत मे शायरों हज़रत अब्बास की शान मे एक से बढ़ कर एक कलाम सुनाते हुए वाह वाही बटोरी। मौलाना सैय्यद अली गौहर साहब क़िबला ने हज़रत अब्बास की शुजाअत और वफा के क़िस्से सुनाते हुए अलमदारे हुसैनी की यौमे विलादत की मुबारकबाद पेश की। एक अन्य महफिल मे शायर इतरत नक़वी ने पढ़ा तीरगी को जो निगल ले वह वफा है अब्बास! तशनालब फिक्र की भरपूर ग़िज़ा है अब्बास!!
मौलाना व शायर आमिरुर रिज़वी ने कहा हुए अब्बास जब पैदा तो बोलीं सानिए ज़हरा! हुसैन इब्ने अली यह क़ूवते बाज़ू मुबारक हो!!
इसके अलावा डॉ०क़मर आब्दी, रुस्तम साबरी, जलाल फूलपूरी, फैज़ान वारसी ने अपने कलाम पर जमकर वाह वाही बटोरी।
बाद महफिल लज़ीज़ व्यंजनों का दस्तरख्वान सजा कर ग़ाज़ी अब्बास की नज़्र भी दिलाई गई। बड़ी संख्या मे शामिल अक़ीदतमन्दों ने नज़्रे अब्बास तबर्रुक के तौर पर ग्रहण किया। सभी की सेहत सलामती रिज़्क़ और मुल्के हिन्दूस्तान मे अमनो अमान और हर वबा से महफूज़ रखने की दूआ भी मांगी गई। कई जगहों मे महिलाओं की भी महफिल हुई जिसमे महिला शायरा और ज़ाकिरा ने बढ़ चढ़ कर विलादत मौला अब्बास की खुशियाँ साझा कीं। महफिल में आए हुए लोगों का महफिल आयोजक अब्बास गुड्डू ने शुक्रिया अदा किया।
इस मौक़े पर महमूद हैदर, ऐहसान रज़ा, सनी अब्बास, अली अब्बास, एस एम अहमद, हैदर अब्बास, इमदाद, सै०मो० अस्करी, शाहिद रिज़वी, ज़ामिन हसन, औन ज़ैदी, जॉन ज़ैदी आदि शामिल रहे।

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