दर्शकों की आँखें नम कर गयी एक वृद्ध कलाकार की व्यथा
प्रयागराज। कलाकार का फ़न कभी छोटे रास्ते से हासिल नहीं हो सकता उसके लिए लगन व मेहनत ही एक रास्ता हैI ऐसे ही एक वृद्ध कलाकार की कथा-व्यथा मंच पर दिखा गया नाटक बैंड मास्टर, और दर्शकों की तालियाँ गवाही देती रहीं इस प्रयास की सफलता की। विनोद रस्तोगी स्मृति संस्थान रंगमण्डल, प्रयागराज ने शनिवार को उ.म.क्षे. सांस्कृतिक केन्द्र के प्रेक्षागृह में परिमल दत्ता लिखित नाटक “बैण्ड मास्टर” अजय मुखर्जी के निर्देशन में मंचित किया और मुख्य भूमिका में अभिलाष नारायण ने यह साबित कर दिया कि उम्र कभी रचनात्मक कार्य में बाधक नहीं होती। वृद्ध बैंड मास्टर अपने स्वास्थ्य के कारण असमर्थ होता जाता है, पर अपरिपक्व युवा पीढ़ी को अपना साज़ सौपना नहीं चाहता, क्योंकि वो बदलाव की बयार में शास्त्रीयता से दूर हो गये हैंI दो पीढ़ियों के संघर्ष को बैंड मास्टर के माध्यम से बड़ी ही सहजता से दर्शकों तक संप्रेषित किया गया, और दर्शक दीर्घा ने उसे करतल ध्वनि से ग्रहण किया। इस सफल प्रस्तुति के मंच पर कर्णधार अभिलाष नारायण, अजय मुखर्जी, सौरभ शुक्ला, अक्षत अग्रवाल, रोहित यादव, रजत कुशवाहा, आशीष यादव, उपासना देवांशी, दिग्विजय सिंह, हिमांशु तिवारी व कृष्णा प्रताप सिंह थे। मंच परे रंगदीपन सुजॉय घोषाल, संगीत संचालन शुभम वर्मा, रूपसज्जा संजय चौधरी की रही जबकि प्रस्तुतकर्ता आलोक रस्तोगी एवं संगीत, परिकल्पना एवं निर्देशन अजय मुखर्जी का र



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