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रासायनिक उर्वरकों के लगातार प्रयोग से पर्यावरण को भारी नुकसान: डॉ हेमलता पंत

प्रयागराज। कुलभास्कर आश्रम पीजी कॉलेज प्रयागराज में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के विशेष शिविर के चौथे दिन महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर (डॉक्टर) गीतांजलि मौर्य के निर्देशन में सर्वप्रथम अंतरराष्ट्रीय योगा विशेषज्ञ मोनिका सिंह के योगाभ्यास से प्रारंभ हुआ। आज की मुख्य वक्ता डॉ. हेमलता पंत असिस्टेंट प्रोफेसर सीएमपी पीजी कॉलेज प्रयागराज ने जैविक खेती पर व्याख्यान देते हुए बताया कि लगातार रसायनों के उपयोग से हमारी मृदा और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। हम सभी की सेहत पर बहुत नुकसान हो रहा है। अतः अब कार्बनिक खेती जैसे गोबर की खाद, कंपोस्ट की केचुआ,  नाडेप कंपोस्ट, होमा फार्मिंग और जैव उर्वरक कीटनाशकों का प्रयोग अति आवश्यक हो गया है। हम सब को परंपरागत तथा आधुनिक खेती में सामंजस्य बनाकर चलना होगा तभी कृषि में वृद्धि होगी। आर्थिक उन्नत होगी और आगे की पीढ़ियों के लिए भोजन और पर्यावरण संतुलित बना रहेगा। दूसरे वक्ता के रूप में डॉक्टर सूर्य नारायण, एसोसिएट प्रोफेसर उद्यान विज्ञान विभाग कुलभास्कर आश्रम पीजी कॉलेज प्रयागराज का था। उन्होंने अपने व्याख्यान में बताया कि फूलों की खेती करने से किसान को कम लागत कम समय में अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त होता है। अगले वक्ता के रूप में डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार सिंह असिस्टेंट प्रोफेसर उद्यान विज्ञान विभाग ने बताया कि संतुलित आहार स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक है के विषय पर अपना व्याख्यान विस्तार से दिए। कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम अधिकारी डॉ मनोज कुमार सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ एस पी यादव ने किया। दूसरे सत्र में स्वयंसेवक एवं स्वयं सेविकाओं ने स्वच्छता अभियान चलाया और घर घर जाकर महिला के अधिकार, नियमानुसार प्रावधान के बारे में बताया।

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प्रयागराज। कुलभास्कर आश्रम पीजी कॉलेज प्रयागराज में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के विशेष शिविर के चौथे दिन महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर (डॉक्टर) गीतांजलि मौर्य के निर्देशन में सर्वप्रथम अंतरराष्ट्रीय योगा विशेषज्ञ मोनिका सिंह के योगाभ्यास से प्रारंभ हुआ। आज की मुख्य वक्ता डॉ. हेमलता पंत असिस्टेंट प्रोफेसर सीएमपी पीजी कॉलेज प्रयागराज ने जैविक खेती पर व्याख्यान देते हुए बताया कि लगातार रसायनों के उपयोग से हमारी मृदा और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। हम सभी की सेहत पर बहुत नुकसान हो रहा है। अतः अब कार्बनिक खेती जैसे गोबर की खाद, कंपोस्ट की केचुआ,  नाडेप कंपोस्ट, होमा फार्मिंग और जैव उर्वरक कीटनाशकों का प्रयोग अति आवश्यक हो गया है। हम सब को परंपरागत तथा आधुनिक खेती में सामंजस्य बनाकर चलना होगा तभी कृषि में वृद्धि होगी। आर्थिक उन्नत होगी और आगे की पीढ़ियों के लिए भोजन और पर्यावरण संतुलित बना रहेगा। दूसरे वक्ता के रूप में डॉक्टर सूर्य नारायण, एसोसिएट प्रोफेसर उद्यान विज्ञान विभाग कुलभास्कर आश्रम पीजी कॉलेज प्रयागराज का था। उन्होंने अपने व्याख्यान में बताया कि फूलों की खेती करने से किसान को कम लागत कम समय में अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त होता है। अगले वक्ता के रूप में डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार सिंह असिस्टेंट प्रोफेसर उद्यान विज्ञान विभाग ने बताया कि संतुलित आहार स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक है के विषय पर अपना व्याख्यान विस्तार से दिए। कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम अधिकारी डॉ मनोज कुमार सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ एस पी यादव ने किया। दूसरे सत्र में स्वयंसेवक एवं स्वयं सेविकाओं ने स्वच्छता अभियान चलाया और घर घर जाकर महिला के अधिकार, नियमानुसार प्रावधान के बारे में बताया।

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