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आबकारी कार्यालय से हमेसा नदारद रहते है कर्मी

 सरायअकिल,कौशांबी। चायल तहसील में स्थित आबकारी कार्यालय से कर्मचारी हमेसा नदारत दिखते है।   निरीक्षक और कर्मचारी के नदारद रहने से क्षेत्र के गांवों में कच्ची शराब बनाने का धंधा खूब फल-फूल रहा है। विभाग के द्वारा कभी भी गांवों में शराब बनाने के खिलाफ अभियान नहीं चलाया जाता।इस कारण लोगों में काफी नाराजगी है। तहसील चायल प्रांगण में आबकारी विभाग का कार्यालय स्थित है।  कार्यालय में एक आबकारी निरीक्षक और चार सिपाही नियुक्त किए गए हैं।इससे पहले आबकारी निरीक्षक और सिपाही कार्यालय में बराबर आते थे और गांवों में छापेमारी कर शराब बनाने पर अंकुश लगाते हुए आरोपियों की धरपकड़ किया करते थे। जिसके कारण गांवों में काफी दहशत रहा करती थी। पूर्व आबकारी निरीक्षक सुषमा मिश्रा के स्थानांतरण हो जाने के बाद तहसील का आबकारी विभाग बेलगाम हो गया है। इस समय आबकारी निरीक्षक के पद पर साहब सिंह पाल तैनात हैं*। आबकारी निरीक्षक के साथ साथ सभी कर्मचारी नदारद रहते हैं। जिसके कारण कार्यालय में ताला लटका रहता है। उनके नदारद रहने के कारण क्षेत्र के गांवों में अवैध कच्ची शराब बनाने का धंधा खूब फल फूल रहा है। उन पर अंकुश न लगने के कारण लोग बड़े पैमाने पर शराब बनाकर उसकी तस्करी भी कर रहे हैं। आबकारी विभाग के नदारद रहने और शराब निर्माताओं के खिलाफ कोई भी निरोधात्मक कार्रवाई न होने से लोगों में काफी आक्रोश है*।

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 सरायअकिल,कौशांबी। चायल तहसील में स्थित आबकारी कार्यालय से कर्मचारी हमेसा नदारत दिखते है।   निरीक्षक और कर्मचारी के नदारद रहने से क्षेत्र के गांवों में कच्ची शराब बनाने का धंधा खूब फल-फूल रहा है। विभाग के द्वारा कभी भी गांवों में शराब बनाने के खिलाफ अभियान नहीं चलाया जाता।इस कारण लोगों में काफी नाराजगी है। तहसील चायल प्रांगण में आबकारी विभाग का कार्यालय स्थित है।  कार्यालय में एक आबकारी निरीक्षक और चार सिपाही नियुक्त किए गए हैं।इससे पहले आबकारी निरीक्षक और सिपाही कार्यालय में बराबर आते थे और गांवों में छापेमारी कर शराब बनाने पर अंकुश लगाते हुए आरोपियों की धरपकड़ किया करते थे। जिसके कारण गांवों में काफी दहशत रहा करती थी। पूर्व आबकारी निरीक्षक सुषमा मिश्रा के स्थानांतरण हो जाने के बाद तहसील का आबकारी विभाग बेलगाम हो गया है। इस समय आबकारी निरीक्षक के पद पर साहब सिंह पाल तैनात हैं*। आबकारी निरीक्षक के साथ साथ सभी कर्मचारी नदारद रहते हैं। जिसके कारण कार्यालय में ताला लटका रहता है। उनके नदारद रहने के कारण क्षेत्र के गांवों में अवैध कच्ची शराब बनाने का धंधा खूब फल फूल रहा है। उन पर अंकुश न लगने के कारण लोग बड़े पैमाने पर शराब बनाकर उसकी तस्करी भी कर रहे हैं। आबकारी विभाग के नदारद रहने और शराब निर्माताओं के खिलाफ कोई भी निरोधात्मक कार्रवाई न होने से लोगों में काफी आक्रोश है*।

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