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फसलों में उत्पादन की गुणवत्ता व मृदा स्वास्थ्य के लिए जिप्सम उपयोगी

अमेठी । मृदा के स्वास्थ्य को सुधारने एवं फसलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए जिप्सम का उपयोग जरूरी होता है। जिप्सम के उपयोग से तिलहनी ,दलहनी व अनाज वाली फसलों के उत्पादन एवं गुणवत्ता में बढ़ोत्तरी के साथ-साथ भूमि का स्वास्थ्य भी बना रहता है ।जिप्सम पोषक तत्व गंधक का सर्वोत्तम एवं सस्ता स्रोत है। यह कृषि विभाग के राजकीय कृषि बीज भंडारों  शाहगढ, भेटुआ, संग्रामपुर, बाज़ारशुकुल, गौरीगंज, तिलोई व अमेठी पर 75 फीसदी अनुदान पर उपलब्ध है। इसकी बिक्री दर रुपये 252.40 प्रति बोरी है जिस पर 75 फीसदी अनुदान की धनराशि डी0बी0टी0 के माध्यम से किसानों के खाते में भेजी जाएगी। पौधों के लिए नाइट्रोजन फास्फोरस एवं पोटाश के बाद गंधक चौथा प्रमुख पोषक तत्व है। एक अनुमान के अनुसार तिलहनी फसलों के पौधों को फास्फोरस के बराबर मात्रा में गंधक की अधिकता होती है। कृषकों द्वारा प्रायः गंधक रहित उर्वरकों जैसे डीएपी, यूरिया का अधिक उपयोग किया जा रहा है और गंधक युक्त सिंगल सुपर फास्फेट का उपयोग कम हो रहा है, इसके कारण खेतों में गंधक की कमी हो रही है। इसकी कमी को दूर करने एवं अच्छी गुणवत्ता का अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए वैज्ञानिकों ने 250 किलोग्राम जिप्सम प्रति हेक्टेयर की दर से खेतों में उपयोग करने की सलाह दी है। जिप्सम में 13.5% गंधक तथा 19% कैल्शियम तत्व पाए जाते हैं। क्षारीय भूमि सुधार हेतु मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर जिप्सम का उपयोग कर मिट्टी की दशा सुधारी जा सकती है। तिलहनी फसलों में गंधक के उपयोग से दाने में तेल की मात्रा में बढ़ोत्तरी होती है। साथ ही दाने सुडौल एवं चमकीले बनते हैं, जिसके कारण तिलहनी फसलों में पैदावार में 10 से 15% की बढ़ोतरी होती है। दलहनी फसलों में प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसके निर्माण के लिए गंधक आवश्यक तत्व है, इससे दलहनी फसलों में भी दाने सुडोल बनते हैं व पैदावार बढ़ती है। यह पौधों की जड़ों में स्थित राइजोबियम जीवाणु की क्रियाशीलता को बढ़ाता है जिससे पौधे वातावरण में उपस्थित नाइट्रोजन का अधिक से अधिक उपयोग कर पाते हैं। जिप्सम भूमि के क्षारीय प्रभाव को निष्क्रिय करता है एवं भूमि की मृदुता को बढ़ाता है।

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अमेठी । मृदा के स्वास्थ्य को सुधारने एवं फसलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए जिप्सम का उपयोग जरूरी होता है। जिप्सम के उपयोग से तिलहनी ,दलहनी व अनाज वाली फसलों के उत्पादन एवं गुणवत्ता में बढ़ोत्तरी के साथ-साथ भूमि का स्वास्थ्य भी बना रहता है ।जिप्सम पोषक तत्व गंधक का सर्वोत्तम एवं सस्ता स्रोत है। यह कृषि विभाग के राजकीय कृषि बीज भंडारों  शाहगढ, भेटुआ, संग्रामपुर, बाज़ारशुकुल, गौरीगंज, तिलोई व अमेठी पर 75 फीसदी अनुदान पर उपलब्ध है। इसकी बिक्री दर रुपये 252.40 प्रति बोरी है जिस पर 75 फीसदी अनुदान की धनराशि डी0बी0टी0 के माध्यम से किसानों के खाते में भेजी जाएगी। पौधों के लिए नाइट्रोजन फास्फोरस एवं पोटाश के बाद गंधक चौथा प्रमुख पोषक तत्व है। एक अनुमान के अनुसार तिलहनी फसलों के पौधों को फास्फोरस के बराबर मात्रा में गंधक की अधिकता होती है। कृषकों द्वारा प्रायः गंधक रहित उर्वरकों जैसे डीएपी, यूरिया का अधिक उपयोग किया जा रहा है और गंधक युक्त सिंगल सुपर फास्फेट का उपयोग कम हो रहा है, इसके कारण खेतों में गंधक की कमी हो रही है। इसकी कमी को दूर करने एवं अच्छी गुणवत्ता का अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए वैज्ञानिकों ने 250 किलोग्राम जिप्सम प्रति हेक्टेयर की दर से खेतों में उपयोग करने की सलाह दी है। जिप्सम में 13.5% गंधक तथा 19% कैल्शियम तत्व पाए जाते हैं। क्षारीय भूमि सुधार हेतु मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर जिप्सम का उपयोग कर मिट्टी की दशा सुधारी जा सकती है। तिलहनी फसलों में गंधक के उपयोग से दाने में तेल की मात्रा में बढ़ोत्तरी होती है। साथ ही दाने सुडौल एवं चमकीले बनते हैं, जिसके कारण तिलहनी फसलों में पैदावार में 10 से 15% की बढ़ोतरी होती है। दलहनी फसलों में प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसके निर्माण के लिए गंधक आवश्यक तत्व है, इससे दलहनी फसलों में भी दाने सुडोल बनते हैं व पैदावार बढ़ती है। यह पौधों की जड़ों में स्थित राइजोबियम जीवाणु की क्रियाशीलता को बढ़ाता है जिससे पौधे वातावरण में उपस्थित नाइट्रोजन का अधिक से अधिक उपयोग कर पाते हैं। जिप्सम भूमि के क्षारीय प्रभाव को निष्क्रिय करता है एवं भूमि की मृदुता को बढ़ाता है।

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