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गंगा का जलस्तर बढ़ा, गंग दीप के शिविरों में घुसा पानी

शिविरों को सेक्टर 5 में किया गया स्थानांतरित
प्रयागराज। गंगा में अचानक पानी बढ़ने के कारण संगम किनारे गंग द्वीप डूब गया है। इसके आसपास चार दर्जन से अधिक शिविर जलमग्न हो गए हैं। श्रद्धालुओं को अपनी गृहस्थी बचाने की जद्दोजहद करनी पड़ रही है। मेला प्रशासन ने करीब शिविरों को सेक्टर 5 में विस्थापित कर दिया है। इसी के साथ त्रिवेणी पांटून पुल से आवागमन रोक दिया गया है। कटान के कारण पुल का एक हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो गया है। उसको ठीक करने का काम जारी है। संगम किनारे गंग द्वीप आध्यात्मिक संस्थाओं के लिए बताया गया था। गंगा में अचानक तेज बहाव और कटान के कारण यह द्वीप मंगलवार की देर रात पूरी तरह से डूब गया। अचानक शिविरों में आए पानी के कारण संस्थाओं को अपना सामान बचाने की पूरी रात मशक्कत करनी पड़ी। मंगलवार को कुछ संस्थाओं को सेक्टर 5 में विस्थापित कर दिया गया था। बुधवार की सुबह भी जिन संस्थाओं में पानी आ गया था, उनका सामान सेक्टर 5 में विस्थापित कर उन्हें जमीन देकर बसाने का काम जारी है। गंग द्वीप क्षेत्र की बिजली को एहतियात काट दिया गया है। कटान की स्थिति का जायजा लेने के लिए नए मेला प्रभारी अरविंद कुमार चौहान एसपी मेला राजीव नारायण त्रिपाठी भी पहुंचे। मेला अधिकारी ने बताया कि जो संस्थाएं प्रभावित हुई थी उनको दूसरी जगह स्थापित कर दिया गया है। पानी शिविरों की ओर ना घुसे इसके लिए कटान वाले क्षेत्र में मिट्टी डाली जा रही है। हमारी पूरी कोशिश हे कि शिविरों में रह रहे लोगों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। सिंचाई विभाग (बाढ़ खंड) के अधिशासी अभियंता बृजेश कुमार ने बताया कि पहाड़ों पर लगातार हो रही बर्फबारी और बारिश के कारण हरिद्वार से काफी मात्रा में पानी मैदानी क्षेत्रों की तरफ आ रहा है। इससे नरौरा बांध में पानी का दबाव अधिक हो गया है। नरौरा बांध से प्रतिदिन करीब 30 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। उस पानी का दबाव कानपुर बैराज पर पड़ रहा है। कानपुर बैराज से सामान्य तौर पर 10 हजार क्यूसेक पानी गंगा में प्रतिदिन छोड़ा जाता है। बैराज पर दबाव बढ़ने के बाद 22 हजार क्यूसेक पानी प्रतिदिन गंगा में छोड़ा जा रहा है। अचानक दोगुनी मात्रा में पानी छोड़ने के कारण संगम किनारे गंग द्वीप के आसपास के 50 से अधिक तंबुओं में पानी घुस गया है। मौसम साफ होने तक और पहाड़ों पर बर्फबारी और बारिश रुकने तक ऐसे ही आगे भी गंगा में पानी छोड़ा जाता रहेगा। इसकी मात्रा बढ़ भी सकती है। लिहाजा संगम क्षेत्र में गंगा के किनारे बने तंबुओं में रह रहे लोगों को अलर्ट किया गया है।
सिंचाई विभाग ने माघ मेला में पहली बार कटान रोकने के लिए जियो ट्यूब लगाने का निर्णय लिया था। इसके लिए विभाग ने बाकायदा 10 लाख रुपए का टेंडर भी पास किया था। टेंडर पास हुए 2 महीने से अधिक का समय बीत गया है, लेकिन अभी भी माघ मेला क्षेत्र में जियो ट्यूब नहीं लग पाई है। अगर जियो ट्यूब समय से लगाई गई होती तो शायद शिविरों में पानी घुसने की नौबत नहीं आती। हजारों लोगों को अपने शिविर छोड़कर दूसरी जगह विस्थापित होने को मजबूर नहीं होना पड़ता। यही नहीं सिंचाई विभाग को कटान रोकने के लिए लगभग एक करोड़ रुपये का बजट भी दिया गया है। इसके बावजूद कटान रोकने में सिंचाई विभाग के अधिकारी पूरी तरह से विफल साबित हुए हैं।

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शिविरों को सेक्टर 5 में किया गया स्थानांतरित
प्रयागराज। गंगा में अचानक पानी बढ़ने के कारण संगम किनारे गंग द्वीप डूब गया है। इसके आसपास चार दर्जन से अधिक शिविर जलमग्न हो गए हैं। श्रद्धालुओं को अपनी गृहस्थी बचाने की जद्दोजहद करनी पड़ रही है। मेला प्रशासन ने करीब शिविरों को सेक्टर 5 में विस्थापित कर दिया है। इसी के साथ त्रिवेणी पांटून पुल से आवागमन रोक दिया गया है। कटान के कारण पुल का एक हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो गया है। उसको ठीक करने का काम जारी है। संगम किनारे गंग द्वीप आध्यात्मिक संस्थाओं के लिए बताया गया था। गंगा में अचानक तेज बहाव और कटान के कारण यह द्वीप मंगलवार की देर रात पूरी तरह से डूब गया। अचानक शिविरों में आए पानी के कारण संस्थाओं को अपना सामान बचाने की पूरी रात मशक्कत करनी पड़ी। मंगलवार को कुछ संस्थाओं को सेक्टर 5 में विस्थापित कर दिया गया था। बुधवार की सुबह भी जिन संस्थाओं में पानी आ गया था, उनका सामान सेक्टर 5 में विस्थापित कर उन्हें जमीन देकर बसाने का काम जारी है। गंग द्वीप क्षेत्र की बिजली को एहतियात काट दिया गया है। कटान की स्थिति का जायजा लेने के लिए नए मेला प्रभारी अरविंद कुमार चौहान एसपी मेला राजीव नारायण त्रिपाठी भी पहुंचे। मेला अधिकारी ने बताया कि जो संस्थाएं प्रभावित हुई थी उनको दूसरी जगह स्थापित कर दिया गया है। पानी शिविरों की ओर ना घुसे इसके लिए कटान वाले क्षेत्र में मिट्टी डाली जा रही है। हमारी पूरी कोशिश हे कि शिविरों में रह रहे लोगों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। सिंचाई विभाग (बाढ़ खंड) के अधिशासी अभियंता बृजेश कुमार ने बताया कि पहाड़ों पर लगातार हो रही बर्फबारी और बारिश के कारण हरिद्वार से काफी मात्रा में पानी मैदानी क्षेत्रों की तरफ आ रहा है। इससे नरौरा बांध में पानी का दबाव अधिक हो गया है। नरौरा बांध से प्रतिदिन करीब 30 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। उस पानी का दबाव कानपुर बैराज पर पड़ रहा है। कानपुर बैराज से सामान्य तौर पर 10 हजार क्यूसेक पानी गंगा में प्रतिदिन छोड़ा जाता है। बैराज पर दबाव बढ़ने के बाद 22 हजार क्यूसेक पानी प्रतिदिन गंगा में छोड़ा जा रहा है। अचानक दोगुनी मात्रा में पानी छोड़ने के कारण संगम किनारे गंग द्वीप के आसपास के 50 से अधिक तंबुओं में पानी घुस गया है। मौसम साफ होने तक और पहाड़ों पर बर्फबारी और बारिश रुकने तक ऐसे ही आगे भी गंगा में पानी छोड़ा जाता रहेगा। इसकी मात्रा बढ़ भी सकती है। लिहाजा संगम क्षेत्र में गंगा के किनारे बने तंबुओं में रह रहे लोगों को अलर्ट किया गया है।
सिंचाई विभाग ने माघ मेला में पहली बार कटान रोकने के लिए जियो ट्यूब लगाने का निर्णय लिया था। इसके लिए विभाग ने बाकायदा 10 लाख रुपए का टेंडर भी पास किया था। टेंडर पास हुए 2 महीने से अधिक का समय बीत गया है, लेकिन अभी भी माघ मेला क्षेत्र में जियो ट्यूब नहीं लग पाई है। अगर जियो ट्यूब समय से लगाई गई होती तो शायद शिविरों में पानी घुसने की नौबत नहीं आती। हजारों लोगों को अपने शिविर छोड़कर दूसरी जगह विस्थापित होने को मजबूर नहीं होना पड़ता। यही नहीं सिंचाई विभाग को कटान रोकने के लिए लगभग एक करोड़ रुपये का बजट भी दिया गया है। इसके बावजूद कटान रोकने में सिंचाई विभाग के अधिकारी पूरी तरह से विफल साबित हुए हैं।

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