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पति की लंबी उम्र के लिए सुहागिनों ने करवाचौथ का ब्रत मनाया

प्रयागराज। पति पत्नी के रिश्ते  को प्रगाढ़ता प्रदान करने एवं पत्नी की लंबी उम्र की कामना के लिए सुहागिनों ने करवाचौथ का व्रत किया। बताते चलें कि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष चतुर्थी को यह व्रत सुबह ब्रह्ममुहूर्त से शुरू होकर रात्रि में चंद्रमा-दर्शन के साथ पूरा होता है। सुहागिन महिलाओं के लिए करवा चौथ का व्रत उनके पति के प्रति आस्था, प्यार, सम्मान व समर्पण को प्रदर्शित करता है। करवा चौथ के दिन सुहागिन अपने पति की लम्बी उम्र की कामना करते हुए इस पर्व में अन्न जल ग्रहण किए बिना दिन भर उपवास रहती है। इसके बाद बिभिन्न प्रकार के फल, फूल, मिठाई, पान-सुपाड़ी बांस के चंगेरे में एकत्रित होकर चलनी में चांद को देखने के बाद भक्तिभाव से पूजा करती है। इसके बाद जल से अ‌र्घ्य देकर उसके बाद पूजन संपन्न होती है। पूजा-अर्चना के बाद पत्नी पति के हाथों से पानी का घूंट पीकर अपना उपवास तोड़ती है। मान्यता है! यकि चलनी से देखे गये चांद की महिमा से दांपत्य जीवन में हमेशा शीतल छाया बनी रहती है। जनपद में महिलाओं ने बताया कि इस पर्व को करने से पति की लंबी उम्र बढ़ने के साथ-साथ दांपत्य जीवन में खुशहाली आती है।

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प्रयागराज। पति पत्नी के रिश्ते  को प्रगाढ़ता प्रदान करने एवं पत्नी की लंबी उम्र की कामना के लिए सुहागिनों ने करवाचौथ का व्रत किया। बताते चलें कि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष चतुर्थी को यह व्रत सुबह ब्रह्ममुहूर्त से शुरू होकर रात्रि में चंद्रमा-दर्शन के साथ पूरा होता है। सुहागिन महिलाओं के लिए करवा चौथ का व्रत उनके पति के प्रति आस्था, प्यार, सम्मान व समर्पण को प्रदर्शित करता है। करवा चौथ के दिन सुहागिन अपने पति की लम्बी उम्र की कामना करते हुए इस पर्व में अन्न जल ग्रहण किए बिना दिन भर उपवास रहती है। इसके बाद बिभिन्न प्रकार के फल, फूल, मिठाई, पान-सुपाड़ी बांस के चंगेरे में एकत्रित होकर चलनी में चांद को देखने के बाद भक्तिभाव से पूजा करती है। इसके बाद जल से अ‌र्घ्य देकर उसके बाद पूजन संपन्न होती है। पूजा-अर्चना के बाद पत्नी पति के हाथों से पानी का घूंट पीकर अपना उपवास तोड़ती है। मान्यता है! यकि चलनी से देखे गये चांद की महिमा से दांपत्य जीवन में हमेशा शीतल छाया बनी रहती है। जनपद में महिलाओं ने बताया कि इस पर्व को करने से पति की लंबी उम्र बढ़ने के साथ-साथ दांपत्य जीवन में खुशहाली आती है।

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