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विधि विधान से पूजी गई मां ब्रम्हचारिणी

शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन मंदिरो व पाण्डालो में उमड़े भक्त
प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन शुक्रवार को मां भवानी के द्वितीय स्वरूप ब्रम्हचारिणी का पूजन अर्चन किया गया। देवी मंदिरो एवं पूजा पाण्डालो में दर्शन पूजन के लिए भक्त उमड़ पडे़।  धर्मग्रन्थो के अनुसार मां ब्रम्हचारिणी देवी को ज्ञान, वैराग्य और ध्यान की अधिष्ठात्री कहा जाता है। इनके एक हाथ में कमण्डल और दूसरे हाथ में रूद्राक्ष की माला होती है। इनकी पूजा आराधना नवरात्र के दूसरे दिन की जाती है। इस दिन भक्त जितनी आस्था व विश्वास से उनका ध्यान करेगा उसे उतना ही फल प्राप्त होने की बात कही गई है। पुराणो की कथा के अनुसार देवी के इस रूप को ब्रम्हा जी की शक्ति होने की बात कही गई है। इसीलिए मां का यह रूप ब्रम्हचारिणी के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इनके उद्भव को ब्रम्हा जी के कमण्डल से होना कहा गया है। इस लोक का सृष्टिकर्ता ब्रम्हा जी को कहा जाता है। इनके शक्ति को ब्रम्हचारिणी का नाम दिया गया। कहा जाता है कि जब ब्रम्हा जी के मानस पुत्रो से सृष्टि का विस्तार नहीं हो पाया तब ब्रम्हा जी की इसी शक्ति ने सृष्टि का विस्तार किया। इसी लिए स्त्री को सृष्टि का कारक कहा गया है। नवरात्र के दूसरे दिन नगर स्थित मां बेल्हा देवी धाम में सुबह से मां ब्रम्हचारिणी स्वरूप का दर्शन पूजन करने के लिए भक्तो की भीड़ पहुंचने लगी। इसके बाद दर्शन पूजन का सिलसिला देर रात तक चलता रहा। इसके अलावा रानीगंज क्षेत्र स्थित मां बाराही देवी धाम, सण्डवा चन्द्रिका स्थित मां चन्द्रिका धाम समेत अन्य देवी मंदिरो में भी श्रद्धालुओ का तांता लगा रहा। भक्तो ने मां के ब्रम्हचारिणी स्वरूप का पूजन अर्चन करके कल्याण की कामना की। साथ ही प्रसाद भी चढ़ाया। इसी प्रकार पूजा पाण्डालो में भी आज मां के ब्रम्हचारिणी स्वरूप का पूजन अर्चन के लिए भक्तो की भीड़ लगी रही। सुबह शाम पूजन व आरती के दौरान वहां काफी भीड़ दिखाई पड़ी। ग्रामीण क्षेत्रो में भी सजाए गए पूजा पाण्डालो में पूजन अर्चन की धूम मची हुई है। देवी जागरण कराने की भी तैयारी की जा रही है। नवरात्र के समय जिले का वातावरण देवीमय बना हुआ है।

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शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन मंदिरो व पाण्डालो में उमड़े भक्त
प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन शुक्रवार को मां भवानी के द्वितीय स्वरूप ब्रम्हचारिणी का पूजन अर्चन किया गया। देवी मंदिरो एवं पूजा पाण्डालो में दर्शन पूजन के लिए भक्त उमड़ पडे़।  धर्मग्रन्थो के अनुसार मां ब्रम्हचारिणी देवी को ज्ञान, वैराग्य और ध्यान की अधिष्ठात्री कहा जाता है। इनके एक हाथ में कमण्डल और दूसरे हाथ में रूद्राक्ष की माला होती है। इनकी पूजा आराधना नवरात्र के दूसरे दिन की जाती है। इस दिन भक्त जितनी आस्था व विश्वास से उनका ध्यान करेगा उसे उतना ही फल प्राप्त होने की बात कही गई है। पुराणो की कथा के अनुसार देवी के इस रूप को ब्रम्हा जी की शक्ति होने की बात कही गई है। इसीलिए मां का यह रूप ब्रम्हचारिणी के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इनके उद्भव को ब्रम्हा जी के कमण्डल से होना कहा गया है। इस लोक का सृष्टिकर्ता ब्रम्हा जी को कहा जाता है। इनके शक्ति को ब्रम्हचारिणी का नाम दिया गया। कहा जाता है कि जब ब्रम्हा जी के मानस पुत्रो से सृष्टि का विस्तार नहीं हो पाया तब ब्रम्हा जी की इसी शक्ति ने सृष्टि का विस्तार किया। इसी लिए स्त्री को सृष्टि का कारक कहा गया है। नवरात्र के दूसरे दिन नगर स्थित मां बेल्हा देवी धाम में सुबह से मां ब्रम्हचारिणी स्वरूप का दर्शन पूजन करने के लिए भक्तो की भीड़ पहुंचने लगी। इसके बाद दर्शन पूजन का सिलसिला देर रात तक चलता रहा। इसके अलावा रानीगंज क्षेत्र स्थित मां बाराही देवी धाम, सण्डवा चन्द्रिका स्थित मां चन्द्रिका धाम समेत अन्य देवी मंदिरो में भी श्रद्धालुओ का तांता लगा रहा। भक्तो ने मां के ब्रम्हचारिणी स्वरूप का पूजन अर्चन करके कल्याण की कामना की। साथ ही प्रसाद भी चढ़ाया। इसी प्रकार पूजा पाण्डालो में भी आज मां के ब्रम्हचारिणी स्वरूप का पूजन अर्चन के लिए भक्तो की भीड़ लगी रही। सुबह शाम पूजन व आरती के दौरान वहां काफी भीड़ दिखाई पड़ी। ग्रामीण क्षेत्रो में भी सजाए गए पूजा पाण्डालो में पूजन अर्चन की धूम मची हुई है। देवी जागरण कराने की भी तैयारी की जा रही है। नवरात्र के समय जिले का वातावरण देवीमय बना हुआ है।

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