पूजन अर्चन कर मांगा सुख व समृद्धि का आशीर्वाद
प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। पुत्रवती महिलाओ ने बुधवार को संतान के आरोग्य दीर्घ जीवन, मंगल तथा सर्वविधि कल्याण की कामना से जीवितपुत्रिका व्रत रखा। साथ ही परम्परागत ढंग से विधि विधान पूर्वक पूजन अर्चन करके सुख व समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। उधर बाजारो में पूजन सामग्री की खरीददारो को लेकर भीड़ रही। बताते चले कि सामान्य जीवन में जिउतिया तथा जीमूत वाहन व्रत के नाम से विख्यात जीवितपुत्रिका व्रत पर महिलाएं तीन दिन का अनुष्ठान करती है। यह व्रत महिलाओ द्वारा अश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। हालांकि यह व्रत एक दिन पूर्व सप्तमी को ही शुरू हो जाता है। महिलाएं अष्टमी को निर्जला व्रत रहकर नवमी तिथि को पारण करके समाप्त करती है। इस व्रत में भगवान सूर्यदेव, भगवान श्री कृष्ण तथा गन्धर्वो के राजकुमार जीमूत वाहन की पूजा का पारम्परिक विधान है। सप्तमी तिथि से व्रती महिलाएं व्रत की तैयारी शुरू कर देती है। साथ ही नियम व संयम का पालन करते हुए अष्टमी तिथि को स्नान से निवृत्त होकर स्वच्छ तथा नवीन वस्त्र धारण करती है। इसके पश्चात वे काष्ठ निर्मित चैकी पर पीले रंग का रेशमी वस्त्र बिछाकर उस पर भगवान श्री कृष्ण, भगवान सूर्य तथा गन्धर्वो के राजकुमार जीमूत वाहन चित्र अथवा प्रतिमा की स्थापना करती है। प्रतिमा के समक्ष अखण्ड दीप प्रज्जवलित करके पूज्य देवताओ का आहवान किया जाता है। इसके बाद व्रती महिलाएं विविध सुगन्धित पुष्प, धूप, दीप तथा नैवेद्य सादर अर्पित करते हुए भगवान श्रीकृष्ण का पंचामृत से अभिषेक के साथ महिलाएं पूजन अर्चन करती है। पूजन के बाद भगवान सूर्य को तांबे के पात्र में जल, अक्षत, रोली, लाल चन्दन तथा लाल पुष्प डालकर मंत्रोच्चार के साथ अध्र्य देती है। इस पर्व की तैयारी के लिए बाजारो में पूजन सामग्री की खरीददारी के लिए एक दिन पूर्व से ही महिलाओ की भीड़ रही। महंगाई के बावजूद बाजारो में सेब, नारियल, धागा, केला तथा अन्य मौसमी फलो एवं पूजन सामग्रियो की खूब बिक्री हुई। इस व्रत में सांयकाल नदी अथवा तालाब के किनारे पूजन अर्चन के लिए महिलाओ की भीड़ उमड़ रही। अनेक महिलाएं समूह में पूजन स्थल पर पहुंची। इस अवसर पर नदी एवं तालाबो के किनारे महिलाओ की भीड़ देखने को मिली।
पूजन अर्चन कर मांगा सुख व समृद्धि का आशीर्वाद
प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। पुत्रवती महिलाओ ने बुधवार को संतान के आरोग्य दीर्घ जीवन, मंगल तथा सर्वविधि कल्याण की कामना से जीवितपुत्रिका व्रत रखा। साथ ही परम्परागत ढंग से विधि विधान पूर्वक पूजन अर्चन करके सुख व समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। उधर बाजारो में पूजन सामग्री की खरीददारो को लेकर भीड़ रही। बताते चले कि सामान्य जीवन में जिउतिया तथा जीमूत वाहन व्रत के नाम से विख्यात जीवितपुत्रिका व्रत पर महिलाएं तीन दिन का अनुष्ठान करती है। यह व्रत महिलाओ द्वारा अश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। हालांकि यह व्रत एक दिन पूर्व सप्तमी को ही शुरू हो जाता है। महिलाएं अष्टमी को निर्जला व्रत रहकर नवमी तिथि को पारण करके समाप्त करती है। इस व्रत में भगवान सूर्यदेव, भगवान श्री कृष्ण तथा गन्धर्वो के राजकुमार जीमूत वाहन की पूजा का पारम्परिक विधान है। सप्तमी तिथि से व्रती महिलाएं व्रत की तैयारी शुरू कर देती है। साथ ही नियम व संयम का पालन करते हुए अष्टमी तिथि को स्नान से निवृत्त होकर स्वच्छ तथा नवीन वस्त्र धारण करती है। इसके पश्चात वे काष्ठ निर्मित चैकी पर पीले रंग का रेशमी वस्त्र बिछाकर उस पर भगवान श्री कृष्ण, भगवान सूर्य तथा गन्धर्वो के राजकुमार जीमूत वाहन चित्र अथवा प्रतिमा की स्थापना करती है। प्रतिमा के समक्ष अखण्ड दीप प्रज्जवलित करके पूज्य देवताओ का आहवान किया जाता है। इसके बाद व्रती महिलाएं विविध सुगन्धित पुष्प, धूप, दीप तथा नैवेद्य सादर अर्पित करते हुए भगवान श्रीकृष्ण का पंचामृत से अभिषेक के साथ महिलाएं पूजन अर्चन करती है। पूजन के बाद भगवान सूर्य को तांबे के पात्र में जल, अक्षत, रोली, लाल चन्दन तथा लाल पुष्प डालकर मंत्रोच्चार के साथ अध्र्य देती है। इस पर्व की तैयारी के लिए बाजारो में पूजन सामग्री की खरीददारी के लिए एक दिन पूर्व से ही महिलाओ की भीड़ रही। महंगाई के बावजूद बाजारो में सेब, नारियल, धागा, केला तथा अन्य मौसमी फलो एवं पूजन सामग्रियो की खूब बिक्री हुई। इस व्रत में सांयकाल नदी अथवा तालाब के किनारे पूजन अर्चन के लिए महिलाओ की भीड़ उमड़ रही। अनेक महिलाएं समूह में पूजन स्थल पर पहुंची। इस अवसर पर नदी एवं तालाबो के किनारे महिलाओ की भीड़ देखने को मिली।



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