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पं. श्रीराम शर्मा के विचारों को आगे बढ़ाने में जुटे हैं भागवताचार्य

कथावाचन की अद्भुत शैली के जरिये प्रतापगढ़ जिले का भी नाम रोशन कर रहे हैं विजय तिवारी
होलागढ़ (प्रयागराज)। जनपद प्रतापगढ़ का नाम अन्य शहरों से यूं ही नहीं है आगे। यहां के लोग सचमुच में डंका बजाने जैसा काम भी कर रहे हैं। चाहे वह श्रीमद भागवत कथा सुनाने का ही क्यों न हो। इसी काम में जुटे हैं उस जिले के कथावाचक पं. विजय तिवारी। वह अपने कथावाचन के जरिए आचार्य पं. श्रीराम शर्मा के विचारों को भी आगे बढ़ा रहे हैं। बता दें कि शांतिकुंज हरिद्वार के आचार्य पं. श्री राम शर्मा के अनन्य भक्त बसिरहा, फतनपुर जनपद प्रतापगढ़ के भागवत भूषण पं. विजय कांत तिवारी अब तक 105 श्रीमद्भागवत कथा कह चुके हैं। जिनसे जनपद प्रतापगढ़ का नाम रोशन हो रहा है। विजय जी गायत्री परिवार से जुड़े रहे। शांतिकुंज में 12 वर्ष तक समय दान देकर वह विभिन्न प्रदेशों में केंद्रीय टोली के साथ दौरा कर चुके हैं। लगभग 500 प्रज्ञा पुराण कथा व हजारों गायत्री यज्ञ करा चुके हैं।  श्री तिवारी ने बताया कि इसके पूर्व बसिरहा में संचालित श्री गायत्री रामलीला समिति में 45 वर्ष से व्यास गद्दी / संचालक की भूमिका निभा रहे हैं। वाद्ययंत्र हारमोनियम, ढपली, ढोल, तबला के शौकीन विजयजी गीत की स्वयं रचना करते हैं। 500 से अधिक गीतों की रचना इन्होंने खुद की है। श्रीमद्भागवत की कथा अवधी मिक्स, खड़ी भाषा शैली में कहते हैं।प्रतापगढ़, प्रयागराज, सुल्तानपुर, जौनपुर सहित पंजाब, पश्चिम बंगाल, मुंबई में भी कथा कह चुके हैं।  उनका मानना है कि व्यक्ति को जीवन में आगे बढ़ने के लिए तथा मोक्ष प्राप्ति के लिए श्रीमद्भागवत कथा हर वर्ग और आयु के लोगों को सुननी चाहिए। वह 12 से 15 कथा गरीबों को निःशुल्क सुना चुके हैं। शायद इसीलिए श्रीमद्भागवत भगवान की इन पर साक्षात कृपा है। इकलौता बेटा दिल्ली में एलएनटी में इंजीनियर है। पत्नी कमलेश कुमारी व चार बेटियां सभी खुशहाल हैं। ‘अपना अपना करो सुधार, तभी मिटेगा भ्रष्टाचार। जो सवारी तुम तक न पहुंचे प्रभु, वह सवारी हमको नहीं चाहिए।’ इस तरह के इनके अनेक गीत लोकप्रिय हैं। श्रोता इनकी ओर बरबस दौड़े चले आते हैं। फिलहाल लोगों का मानना है कि अपने बच्चों को ऐसा बनाएं की वे घर, परिवार, इलाका और क्षेत्र का नाम विजय जैसा रोशन करें।

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कथावाचन की अद्भुत शैली के जरिये प्रतापगढ़ जिले का भी नाम रोशन कर रहे हैं विजय तिवारी
होलागढ़ (प्रयागराज)। जनपद प्रतापगढ़ का नाम अन्य शहरों से यूं ही नहीं है आगे। यहां के लोग सचमुच में डंका बजाने जैसा काम भी कर रहे हैं। चाहे वह श्रीमद भागवत कथा सुनाने का ही क्यों न हो। इसी काम में जुटे हैं उस जिले के कथावाचक पं. विजय तिवारी। वह अपने कथावाचन के जरिए आचार्य पं. श्रीराम शर्मा के विचारों को भी आगे बढ़ा रहे हैं। बता दें कि शांतिकुंज हरिद्वार के आचार्य पं. श्री राम शर्मा के अनन्य भक्त बसिरहा, फतनपुर जनपद प्रतापगढ़ के भागवत भूषण पं. विजय कांत तिवारी अब तक 105 श्रीमद्भागवत कथा कह चुके हैं। जिनसे जनपद प्रतापगढ़ का नाम रोशन हो रहा है। विजय जी गायत्री परिवार से जुड़े रहे। शांतिकुंज में 12 वर्ष तक समय दान देकर वह विभिन्न प्रदेशों में केंद्रीय टोली के साथ दौरा कर चुके हैं। लगभग 500 प्रज्ञा पुराण कथा व हजारों गायत्री यज्ञ करा चुके हैं।  श्री तिवारी ने बताया कि इसके पूर्व बसिरहा में संचालित श्री गायत्री रामलीला समिति में 45 वर्ष से व्यास गद्दी / संचालक की भूमिका निभा रहे हैं। वाद्ययंत्र हारमोनियम, ढपली, ढोल, तबला के शौकीन विजयजी गीत की स्वयं रचना करते हैं। 500 से अधिक गीतों की रचना इन्होंने खुद की है। श्रीमद्भागवत की कथा अवधी मिक्स, खड़ी भाषा शैली में कहते हैं।प्रतापगढ़, प्रयागराज, सुल्तानपुर, जौनपुर सहित पंजाब, पश्चिम बंगाल, मुंबई में भी कथा कह चुके हैं।  उनका मानना है कि व्यक्ति को जीवन में आगे बढ़ने के लिए तथा मोक्ष प्राप्ति के लिए श्रीमद्भागवत कथा हर वर्ग और आयु के लोगों को सुननी चाहिए। वह 12 से 15 कथा गरीबों को निःशुल्क सुना चुके हैं। शायद इसीलिए श्रीमद्भागवत भगवान की इन पर साक्षात कृपा है। इकलौता बेटा दिल्ली में एलएनटी में इंजीनियर है। पत्नी कमलेश कुमारी व चार बेटियां सभी खुशहाल हैं। ‘अपना अपना करो सुधार, तभी मिटेगा भ्रष्टाचार। जो सवारी तुम तक न पहुंचे प्रभु, वह सवारी हमको नहीं चाहिए।’ इस तरह के इनके अनेक गीत लोकप्रिय हैं। श्रोता इनकी ओर बरबस दौड़े चले आते हैं। फिलहाल लोगों का मानना है कि अपने बच्चों को ऐसा बनाएं की वे घर, परिवार, इलाका और क्षेत्र का नाम विजय जैसा रोशन करें।

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