अयोध्या। एक बार फिर राममंदिर निर्माण के कार्य में तेजी लाने के उद्देश्य से राममंदिर की कार्यशाला प्रारंभ हो गई। 2013 से बंद पड़ी कार्यशाला में फिर से ठक-ठक की आवाज गूंजने लगी है।कारीगरों ने पूजन-अर्चन के बाद पत्थरों की तराशी का काम प्रारंभ कर दिया। राममंदिर निर्माण में कुल चार लाख घनफीट पत्थर लगने हैं, अभी महज 50 हजार घनफीट ही तैयार हैं।ट्रस्ट ने दिसंबर 2023 तक भव्य गर्भगृह में भक्तों को रामलला का दर्शन हो, ऐसा लक्ष्य तय किया है। 1989 में रामघाट पर महंत रामचंद्र दास परमहंस व अशोक सिंहल के निर्देशन में रामजन्मभूमि न्यास कार्यशाला का शुभारंभ करीब 50 कारीगरों के साथ हुआ था।यह कार्यशाला 24 सालों तक निरंतर संचालित होती रही। 2013 में तत्कालीन समाजवादी पार्टी की सरकार ने पत्थरों की आपूर्ति पर रोक लगा दी। जिसके चलते कार्यशाला बंद हो गई। इसके बाद 2017 में प्रदेश में जब योगी आदित्यनाथ की सरकार आई तो एक बार फिर से पत्थरों की आपूर्ति में तेजी आई, हालांकि कारीगरों के अभाव में कार्यशाला बंद ही रही। सुप्रीम कोर्ट से राममंदिर के हक में फैसला आ गया। पीएम नरेंद्र मोदी ने 5 अगस्त 2020 को अयोध्या पहुंचकर रामजन्मभूमि में मंदिर निर्माण के कार्य शुरू करने के लिए भूमिपूजन किया तो पूरे देश में खुशी छा गई। राममंदिर का निर्माण कार्य प्रारंभ हुए एक साल बीत गए हैं। नींव निर्माण का काम लगभग पूरा हो चुका है। अब मंदिर के प्लिंथ का निर्माण शुरू होगा। इसके बाद पत्थरों को लगाने का काम प्रारंभ हो जाएगा। ऐसे में ट्रस्ट ने भी काम की गति बढ़ा दी है। दो दिन पूर्व राजस्थान से पहुंचे आठ कारीगरों के दल ने गुरुवार से रामघाट स्थित कार्यशाला में पत्थरों की तराशी शुरू कर दी तो करीब एक दशक बाद कार्यशाला में फिर से ठक-ठक की आवाज गूंजने लगी।रामसेवकपुरम में रखे गए पत्थरों को रामघाट स्थित कार्यशाला में शिफ्ट किया जा रहा है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि राममंदिर निर्माण के लिए अयोध्या के साथ-साथ राजस्थान में भी पत्थरों की तराशी शुरू की जाएगी।प्लिंथ बनने के बाद भूतल में पत्थर लगाने का काम शुरू होगा। भूतल के पत्थर तराशे कर रखे गए हैं। बताया कि करीब आठ वर्षों से यहां डंप पत्थरों को अभी तराशने का काम किया जाएगा। चार लाख घनफीट पत्थरों से मंदिर का निर्माण होगा। 50 हजार घनफीट पत्थर ही अभी तैयार हैं। बताया कि रामसेवकपुरम में अभी इतने पत्थर हैं कि उन्हें तराशने में करीब दो माह लग जाएंगे। बाकी पत्थर राजस्थान से ही तराश कर लाए जाएंगे। वहां भी कार्यशाला शुरू की जाएगी। बताया कि अभी राजस्थान की खदान प्रारंभ नही हुई है। जब तक खदान शुरू होगी तब तक अयोध्या में रखे पत्थरों को तराश कर नक्काशी की जाएगी।
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फिर शुरू हुई राममंदिर की कार्यशाला
अयोध्या। एक बार फिर राममंदिर निर्माण के कार्य में तेजी लाने के उद्देश्य से राममंदिर की कार्यशाला प्रारंभ हो गई। 2013 से बंद पड़ी कार्यशाला में फिर से ठक-ठक की आवाज गूंजने लगी है।कारीगरों ने पूजन-अर्चन के बाद पत्थरों की तराशी का काम प्रारंभ कर दिया। राममंदिर निर्माण में कुल चार लाख घनफीट पत्थर लगने हैं, अभी महज 50 हजार घनफीट ही तैयार हैं।ट्रस्ट ने दिसंबर 2023 तक भव्य गर्भगृह में भक्तों को रामलला का दर्शन हो, ऐसा लक्ष्य तय किया है। 1989 में रामघाट पर महंत रामचंद्र दास परमहंस व अशोक सिंहल के निर्देशन में रामजन्मभूमि न्यास कार्यशाला का शुभारंभ करीब 50 कारीगरों के साथ हुआ था।यह कार्यशाला 24 सालों तक निरंतर संचालित होती रही। 2013 में तत्कालीन समाजवादी पार्टी की सरकार ने पत्थरों की आपूर्ति पर रोक लगा दी। जिसके चलते कार्यशाला बंद हो गई। इसके बाद 2017 में प्रदेश में जब योगी आदित्यनाथ की सरकार आई तो एक बार फिर से पत्थरों की आपूर्ति में तेजी आई, हालांकि कारीगरों के अभाव में कार्यशाला बंद ही रही। सुप्रीम कोर्ट से राममंदिर के हक में फैसला आ गया। पीएम नरेंद्र मोदी ने 5 अगस्त 2020 को अयोध्या पहुंचकर रामजन्मभूमि में मंदिर निर्माण के कार्य शुरू करने के लिए भूमिपूजन किया तो पूरे देश में खुशी छा गई। राममंदिर का निर्माण कार्य प्रारंभ हुए एक साल बीत गए हैं। नींव निर्माण का काम लगभग पूरा हो चुका है। अब मंदिर के प्लिंथ का निर्माण शुरू होगा। इसके बाद पत्थरों को लगाने का काम प्रारंभ हो जाएगा। ऐसे में ट्रस्ट ने भी काम की गति बढ़ा दी है। दो दिन पूर्व राजस्थान से पहुंचे आठ कारीगरों के दल ने गुरुवार से रामघाट स्थित कार्यशाला में पत्थरों की तराशी शुरू कर दी तो करीब एक दशक बाद कार्यशाला में फिर से ठक-ठक की आवाज गूंजने लगी।रामसेवकपुरम में रखे गए पत्थरों को रामघाट स्थित कार्यशाला में शिफ्ट किया जा रहा है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि राममंदिर निर्माण के लिए अयोध्या के साथ-साथ राजस्थान में भी पत्थरों की तराशी शुरू की जाएगी।प्लिंथ बनने के बाद भूतल में पत्थर लगाने का काम शुरू होगा। भूतल के पत्थर तराशे कर रखे गए हैं। बताया कि करीब आठ वर्षों से यहां डंप पत्थरों को अभी तराशने का काम किया जाएगा। चार लाख घनफीट पत्थरों से मंदिर का निर्माण होगा। 50 हजार घनफीट पत्थर ही अभी तैयार हैं। बताया कि रामसेवकपुरम में अभी इतने पत्थर हैं कि उन्हें तराशने में करीब दो माह लग जाएंगे। बाकी पत्थर राजस्थान से ही तराश कर लाए जाएंगे। वहां भी कार्यशाला शुरू की जाएगी। बताया कि अभी राजस्थान की खदान प्रारंभ नही हुई है। जब तक खदान शुरू होगी तब तक अयोध्या में रखे पत्थरों को तराश कर नक्काशी की जाएगी।



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